पशु जन्म नियंत्रण नियम 2023: जानिए नसबंदी, टीकाकरण और पशु कल्याण योजनाओं के बारे में!
भारतीय संविधान में पशुपालन और पशु कल्याण से संबंधित कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं, जो राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों को इस विषय पर कानून बनाने और उसे लागू करने की शक्ति प्रदान करते हैं।
संविधान का अनुच्छेद 246(3) स्पष्ट रूप से पशुपालन को राज्य सूची का विषय बताता है, जबकि अनुच्छेद 243(डब्ल्यू) स्थानीय निकायों को इस विषय पर योजनाओं को लागू करने और कार्य करने के लिए सशक्त बनाता है।
वर्तमान समय में, भारत में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनसे जुड़े मुद्दों को नियंत्रित करने के लिए पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023 (Animal Birth Control Rules, 2023) को लागू किया गया है।
इस कानून के तहत स्थानीय निकायों को नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण कार्यक्रमों को लागू करने की जिम्मेदारी दी गई है, जिससे आवारा कुत्तों की जनसंख्या को नियंत्रित किया जा सके।
यहाँ हम भारतीय संविधान, पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023, भारतीय पशु जन्म कल्याण बोर्ड और अन्य संबंधित पहलुओं की गहराई से चर्चा करेंगे।
भारतीय संविधान में पशुपालन और पशु जन्म कल्याण से जुड़े प्रावधान
1. अनुच्छेद 246(3): पशुपालन राज्य का विषय
भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार, कानून निर्माण की शक्तियाँ तीन सूचियों में विभाजित हैं –
संघ सूची (Union List) – इस सूची में शामिल विषयों पर केवल केंद्र सरकार कानून बना सकती है।
राज्य सूची (State List) – इसमें शामिल विषयों पर राज्य सरकार को कानून बनाने का अधिकार प्राप्त होता है।
समवर्ती सूची (Concurrent List) – इस सूची में शामिल विषयों पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं।
पशुपालन और पशु जन्म कल्याण को राज्य सूची में रखा गया है, जिसका अर्थ है कि इस विषय पर कानून बनाने और नीतियाँ लागू करने की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है।
2. अनुच्छेद 243(डब्ल्यू): स्थानीय निकायों की भूमिका
संविधान के अनुच्छेद 243(डब्ल्यू) के तहत, राज्य विधानसभाओं को बारहवीं अनुसूची में शामिल विषयों से संबंधित कार्यों को करने के लिए स्थानीय निकायों को सशक्त बनाने की अनुमति दी गई है।
इसमें नगर निगम, नगर पालिका, पंचायतें और अन्य स्थानीय प्रशासनिक इकाइयाँ शामिल हैं।
इसका अर्थ यह है कि आवारा कुत्तों के प्रबंधन, उनके आश्रय और नसबंदी कार्यक्रमों की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों की होती है।
पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023: आवारा कुत्तों के प्रबंधन की नई नीति
1. पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023 की प्रमुख बातें
भारत सरकार ने 2023 में नया कानून – “पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023” लागू किया। इसके तहत, स्थानीय निकायों को नसबंदी (Sterilization) और एंटी-रेबीज टीकाकरण (Anti-Rabies Vaccination) के माध्यम से आवारा कुत्तों की जनसंख्या को नियंत्रित करना अनिवार्य किया गया है।
2. नियम 16(6): बीमार या आक्रामक कुत्तों का प्रबंधन
नियम 16(6) के अनुसार, यदि कोई कुत्ता पागल (Rabid) नहीं है, लेकिन बीमार या आक्रामक (Aggressive) है, तो उसे उपचार और निरीक्षण के लिए पशु कल्याण संगठन (Animal Welfare Organization) को सौंपा जाना चाहिए।
ठीक होने के बाद, उसे नियम 11(19) के तहत उसके मूल स्थान पर वापस छोड़ दिया जाना चाहिए।
3. नियम 10: स्थानीय प्राधिकरण की जिम्मेदारी
इस नियम के तहत, स्थानीय निकायों को पर्याप्त संख्या में कुत्तों के रहने की जगह, पशु चिकित्सा अस्पताल और अन्य आवश्यक सुविधाएँ प्रदान करने की जिम्मेदारी दी गई है, जिससे पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम को सफलतापूर्वक लागू किया जा सके।
4. स्थायी आश्रय की अनुमति नहीं
नियम स्पष्ट रूप से यह निर्धारित करता है कि कुत्तों को केवल उपचार या निरीक्षण के लिए अस्थायी रूप से आश्रय दिया जा सकता है, दीर्घकालिक देखभाल के लिए नहीं, जब तक कि वे बीमार या आक्रामक न हों।
भारतीय पशु जन्म कल्याण बोर्ड की भूमिका
1. भारतीय पशु जन्म कल्याण बोर्ड द्वारा उठाए गए कदम
भारतीय पशु जन्म कल्याण बोर्ड (Animal Welfare Board of India – AWBI) भारत सरकार की एक प्रमुख संस्था है, जो पशु अधिकारों की रक्षा और उनके कल्याण के लिए काम करती है।
AWBI ने स्वदेशी नस्ल के कुत्तों के संरक्षण और गोद लेने (Adoption) को बढ़ावा देने की पहल की है। साथ ही, आवारा कुत्तों के लिए अधिक मानवीय आश्रय की व्यवस्था को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे इन कुत्तों को एक सुरक्षित जीवन मिल सके।
2. भारतीय पशु कल्याण बोर्ड द्वारा दी जाने वाली सहायता
AWBI निम्नलिखित योजनाओं के तहत पशु कल्याण संगठनों और गौशालाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करता है –
- नियमित और बचाव पशु जन्म अनुदान (Regular and Rescue Animal Grants)
- आश्रय गृह (Shelter Homes) का प्रावधान
- संकटग्रस्त पशुओं के लिए एम्बुलेंस सेवा
- आवारा कुत्तों के जन्म नियंत्रण और टीकाकरण योजना
- प्राकृतिक आपदाओं और अन्य संकटों के दौरान पशुओं के लिए राहत कार्य
AWBI उन गौशालाओं और पशु जन्म कल्याण संगठनों को निधि प्रदान करता है, जो आवारा, घायल या बीमार पशुओं को आश्रय देते हैं।-

आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए आगे की राह
1. सामुदायिक भागीदारी की आवश्यकता
आम जनता को आवारा कुत्तों को गोद लेने (Adoption) के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
एनजीओ और पशु कल्याण संगठन इस कार्य में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।
स्थानीय निवासियों और नागरिक समाज संगठनों को नसबंदी और टीकाकरण अभियानों में शामिल किया जाना चाहिए।
2. बेहतर कानूनी और प्रशासनिक ढांचा
स्थानीय निकायों को पर्याप्त धन और संसाधन प्रदान किए जाने चाहिए।
पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए निगरानी तंत्र स्थापित किया जाना चाहिए।
3. पशु जन्म क्रूरता के खिलाफ सख्त कानून
पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 (Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960) को और अधिक कठोर बनाया जाना चाहिए।
आवारा कुत्तों को मारने या उनके साथ अमानवीय व्यवहार करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
भारतीय पशु जन्म कल्याण बोर्ड द्वारा वितरित धनराशि: पिछले पाँच वर्षों की विस्तृत रिपोर्ट
भारतीय पशु जन्म कल्याण बोर्ड (AWBI) ने पिछले पाँच वर्षों में पशु कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत अनुदान वितरित किया है।
इन अनुदानों का उद्देश्य पशुओं के संरक्षण, बचाव, आपातकालीन चिकित्सा सुविधा और प्राकृतिक आपदा से प्रभावित पशुओं की सहायता करना है।
यहाँ हम 2019-20 से 2023-24 तक विभिन्न अनुदानों के तहत वितरित की गई धनराशि और लाभान्वित संस्थानों (AWOs) की संख्या का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत कर रहे हैं।
1. नियमित एवं बचाव मवेशी अनुदान
यह अनुदान उन पशुओं के कल्याण के लिए दिया जाता है जो बचाव केंद्रों में लाए जाते हैं या जिन्हें विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। पिछले पाँच वर्षों में इस अनुदान के तहत वितरित धनराशि और लाभार्थी संस्थानों की संख्या इस प्रकार रही:
2019-20: ₹1,55,64,702 वितरित किए गए, जिससे 141 संस्थाएँ लाभान्वित हुईं।
2020-21: ₹1,30,00,000 की राशि प्रदान की गई, जिसमें 182 संस्थाएँ शामिल रहीं।
2021-22: इस वर्ष अनुदान राशि ₹1,99,00,000 तक पहुँच गई, जिससे 258 संस्थानों को सहायता मिली।
2022-23: रिकॉर्ड वृद्धि के साथ ₹4,45,00,000 का वितरण हुआ और 296 संस्थाएँ लाभान्वित हुईं।
2023-24: इस वर्ष ₹4,08,20,675 की धनराशि दी गई, जिससे 273 संस्थाओं को सहायता प्राप्त हुई।
2. आश्रय अनुदान
यह अनुदान उन पशु जन्म आश्रयों को प्रदान किया जाता है जो बेघर या परित्यक्त पशुओं के लिए सुविधाएँ उपलब्ध कराते हैं। इस योजना के अंतर्गत वितरित की गई राशि निम्नानुसार रही:
2019-20: ₹2,50,00,000 की राशि 24 संस्थानों को दी गई।
2020-21: ₹1,50,00,000 अनुदान दिया गया, जिससे 15 आश्रय केंद्रों को लाभ मिला।
2021-22: इस वर्ष भी ₹1,50,00,000 की राशि 16 संस्थानों को प्रदान की गई।
2022-23: ₹70,03,535 की अनुदान राशि से केवल 7 संस्थाएँ लाभान्वित हुईं।
2023-24: इस वर्ष ₹42,22,04 की राशि वितरित की गई (संस्थानों की संख्या उपलब्ध नहीं)।
3. एम्बुलेंस अनुदान
पशुओं के लिए आपातकालीन चिकित्सा सेवा सुनिश्चित करने हेतु एम्बुलेंस अनुदान प्रदान किया जाता है। इस योजना के तहत विभिन्न वर्षों में दी गई सहायता राशि इस प्रकार रही:
2019-20: ₹26,39,500 अनुदान दिया गया, जिससे 6 संस्थाएँ लाभान्वित हुईं।
2020-21: अनुदान राशि बढ़कर ₹49,41,800 हो गई और 11 संस्थाओं ने इसका लाभ उठाया।
2021-22: ₹48,56,650 की राशि दी गई, जिससे 11 संस्थाएँ लाभान्वित हुईं।
2022-23: इस वर्ष भी लगभग समान ₹48,65,594 की राशि 11 संस्थानों को प्रदान की गई।
2023-24: इस वर्ष के लिए जानकारी उपलब्ध नहीं है।
4. प्राकृतिक आपदा अनुदान
प्राकृतिक आपदाओं के दौरान प्रभावित पशुओं के लिए सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से यह अनुदान दिया जाता है। हालांकि, यह अनुदान सभी वर्षों में नहीं दिया गया:
2019-20: इस वर्ष कोई धनराशि वितरित नहीं की गई।
2020-21: ₹2,00,000 की सहायता दी गई, जिससे 3 संस्थाएँ लाभान्वित हुईं।
2021-22: इस वर्ष कोई अनुदान जारी नहीं किया गया।
2022-23: ₹50,000 की छोटी राशि 1 संस्था को प्रदान की गई।
2023-24: इस वर्ष की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
आवारा कुत्तों के लिए धनराशि का आवंटन (2018-2024)
भारतीय पशु जन्म कल्याण बोर्ड द्वारा 2018 से 2021 के बीच आवारा कुत्तों के जन्म नियंत्रण और टीकाकरण कार्यक्रम के लिए धनराशि जारी की गई, लेकिन 2021 से 2024 तक इसमें कोई अनुदान जारी नहीं किया गया।
2018-2019: ₹24.4 लाख
2019-2020: ₹7.3 लाख
2020-2021: ₹4.03 लाख
2021-2024: कोई धनराशि नहीं
यह देखा गया कि 2021 के बाद से इस कार्यक्रम के लिए केंद्रीय अनुदान बंद कर दिया गया। अब स्थानीय निकायों और राज्य सरकारों को अपने स्तर पर इस योजना के लिए आवश्यक धनराशि उपलब्ध करानी होती है।
2. पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023 और स्थानीय निकायों की भूमिका
नए नियमों के तहत क्या बदलाव हुए?
2023 में पशु जन्म नियंत्रण (ABC) नियम लागू किए गए, जिनके तहत:
अब यह कार्यक्रम स्थानीय निकायों द्वारा या पंजीकृत पशु कल्याण संगठनों (AWOs) के माध्यम से संचालित किया जाएगा।
इस कार्यक्रम के लिए वित्तीय सहायता स्थानीय सरकारों या राज्य सरकारों से सीधे उपलब्ध कराई जाएगी।
इस बदलाव का उद्देश्य कार्यक्रम के क्रियान्वयन में अधिक पारदर्शिता और प्रभावशीलता लाना है।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजे गए निर्देश
27 मार्च 2023: सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को ABC नियमों को लागू करने का निर्देश दिया गया।
31 मार्च 2023: पशुपालन विभाग, शहरी विकास विभाग और सभी जिलों के नगर आयुक्तों को भी इस संबंध में सूचित किया गया।
11 नवंबर 2024: राज्यों के मुख्य सचिवों को ABC कार्यक्रम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक विशेष परामर्श जारी किया गया।
इन सरकारी निर्देशों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि पूरे देश में आवारा कुत्तों की आबादी नियंत्रण में रहे और रेबीज जैसी बीमारियों के प्रसार को रोका जा सके।
3. विश्व रेबीज दिवस और टीकाकरण अभियान
भारतीय पशु जन्म कल्याण बोर्ड हर साल 28 सितंबर को “विश्व रेबीज दिवस” मनाता है। इस दिन:
आवारा कुत्तों के लिए बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाए जाते हैं।
लोगों को रेबीज के खतरे और रोकथाम के तरीकों के बारे में जागरूक किया जाता है।
सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाएं सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से टीकाकरण कार्यक्रम को बढ़ावा देती हैं।
रेबीज नियंत्रण के लिए इस अभियान का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह इंसानों और जानवरों के बीच टकराव को कम करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने में सहायक होता है।
4. भारतीय पशु जन्म कल्याण बोर्ड द्वारा प्रकाशित संशोधित ABC मॉड्यूल
भारतीय पशु जन्म कल्याण बोर्ड (AWBI) ने आवारा कुत्तों की आबादी नियंत्रण, रेबीज उन्मूलन और इंसान-कुत्ते टकराव को कम करने के लिए एक संशोधित ABC मॉड्यूल प्रकाशित किया है।
इस मॉड्यूल में:
आवारा कुत्तों की नसबंदी (Sterilization) की आधुनिक तकनीकें
टीकाकरण प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने के उपाय
स्थानीय निकायों और पशु कल्याण संगठनों के लिए मार्गदर्शिका
सामुदायिक जागरूकता बढ़ाने के लिए संचार रणनीतियां
शामिल की गई हैं, ताकि इस कार्यक्रम को वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नैतिक मूल्यों के आधार पर लागू किया जा सके।
5. भविष्य की दिशा और चुनौतियां
आगे की रणनीति क्या होनी चाहिए?
स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी बढ़ाना: केंद्र सरकार से धनराशि की निर्भरता खत्म होने के बाद अब राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों को इस कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करना होगा।
टीकाकरण और नसबंदी की प्रक्रिया में तेजी लाना: विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए अधिक संसाधन और कुशल रणनीतियों की आवश्यकता होगी।
जनभागीदारी को प्रोत्साहित करना: स्थानीय समुदायों को इस कार्यक्रम में शामिल करने से समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है।
तकनीकी समाधान अपनाना: माइक्रोचिपिंग, GPS ट्रैकिंग और डिजिटल डेटा संग्रह जैसी तकनीकों के माध्यम से आवारा कुत्तों के प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
निष्कर्ष
भारत में आवारा कुत्तों की आबादी नियंत्रण और रेबीज उन्मूलन के लिए पशु जन्म नियंत्रण (ABC) और टीकाकरण कार्यक्रम महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, 2021 के बाद केंद्र सरकार द्वारा अनुदान रोकने के बाद, अब यह पूरी तरह से स्थानीय निकायों और राज्य सरकारों की जिम्मेदारी बन गया है।
ABC नियम, 2023 के लागू होने से कार्यक्रम की पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ी है, लेकिन इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्थानीय प्रशासन, पशु कल्याण संगठनों और आम नागरिकों की भागीदारी आवश्यक है।
अगर इस कार्यक्रम को सही ढंग से लागू किया जाए, तो यह न केवल आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने में मदद करेगा बल्कि रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी को खत्म करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।