नैनीताल की 10 ऐसी बातें, जो शायद ही किसी को पता हों!
St. John Church का ढांचा थोड़ा झुका हुआ है, लेकिन यह आज भी भूकंप झेलकर मजबूती से खड़ा है। 1880 के भूकंप में यही जगह लोगों के लिए आश्रय बनी थी।
1950 के दशक में कुछ पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने आसमान में अजीब रोशनी देखी थी। इसे UFO sighting माना गया था, हालांकि कोई आधिकारिक प्रमाण नहीं मिला।
कहा जाता है कि झील का पानी कभी Overflow नहीं होता, क्योंकि नीचे एक प्राकृतिक निकास (underground stream) है जो पानी को संतुलित रखती है।
टिफिन टॉप (Dorothy’s Seat) एक अंग्रेज महिला डोरोथी की याद में बनाया गया था, जिनकी मौत समुद्री तूफान में हुई थी। उनके पति ने यहां यह स्मारक बनवाया।
60 के दशक से लेकर आज तक “कटी पतंग”, “कोई मिल गया” और “स्टूडेंट ऑफ द ईयर” जैसी कई फिल्मों की शूटिंग यहां हुई है।
ब्रिटिश शासन के दौरान नैनीताल को North India की समर कैपिटल बनाया गया था क्योंकि यहां की ठंडी जलवायु लंदन जैसी लगती थी।
कुछ पुराने ब्रिटिश कालीन बंगले आज भी स्थानीय गाइड्स के “Haunted Tour” का हिस्सा हैं — खासकर रात के समय Adventure पसंद करने वालों के लिए।
स्थानीय लोगों के अनुसार झील की गहराई का सही अनुमान आज तक किसी को नहीं मिला। वैज्ञानिक माप 27 मीटर बताते हैं, पर कई जगह यह और गहरी बताई जाती है।
माना जाता है कि नैनी झील देवी सती की आँख गिरने से बनी थी। इसी वजह से इसका नाम “नैनीताल” पड़ा — नैनी = आँख + ताल = झील।