मोडेरा गांव पूरी तरह सौर ऊर्जा से चलता है, यहां बिजली के लिए किसी पारंपरिक स्रोत पर निर्भरता नहीं है।

गांव के लगभग 1000 से अधिक घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाए गए हैं।

मोडेरा का प्रसिद्ध सूर्य मंदिर पहले से ही ऊर्जा और संस्कृति का प्रतीक रहा है — अब यह गांव सौर ऊर्जा से भविष्य की दिशा दिखा रहा है।

इस गांव में अब दिन-रात, गर्मी-सर्दी में बिना रुकावट बिजली मिलती है — कोई पावर कट नहीं।

सौर ऊर्जा से चलने के कारण ग्रामीणों का बिजली बिल लगभग शून्य हो गया है, कई परिवार अतिरिक्त बिजली बेचकर आय भी कमा रहे हैं।

गांव के पास 6 मेगावाट का ग्रिड से जुड़ा सोलर प्लांट और 1 मेगावाट का बैटरी स्टोरेज सिस्टम स्थापित किया गया है।

इस प्रोजेक्ट से कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आई है — पर्यावरण के लिए एक बड़ा कदम।

यह सिर्फ सरकारी प्रोजेक्ट नहीं था, ग्रामीणों को भी योजना में सक्रिय रूप से शामिल किया गया, जिससे आत्मनिर्भरता बढ़ी।

सौर गांव बनने के बाद मोडेरा में पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है — लोग “ग्रीन मॉडल” देखने आते हैं।

मोडेरा गांव को विश्व स्तर पर भी पहचान मिली है — इसे “India’s First Net Zero Village” कहा गया।