सागरमाला योजना 2025 कैसे भारत को एक लॉजिस्टिक्स हब बनाएगी? जानिए विस्तार से!
भारत अपनी विशाल समुद्री सीमा और जलमार्गों की क्षमता के कारण एक मजबूत समुद्री अर्थव्यवस्था विकसित करने की अपार संभावनाएं रखता है। इस दिशा में, सागरमाला योजना केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय की एक प्रमुख फ्लैगशिप योजना है, जिसका उद्देश्य बंदरगाह-आधारित विकास को बढ़ावा देना है।
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Toggleयह योजना भारत की 7500 किलोमीटर लंबी तटरेखा और 14500 किलोमीटर के संभावित नौवहन योग्य जलमार्गों का उपयोग करके देश के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने की दिशा में कार्यरत है।
सागरमाला योजना की पृष्ठभूमि
भारत में समुद्री व्यापार और परिवहन को अधिक कुशल बनाने के उद्देश्य से सागरमाला योजना को 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लॉन्च किया गया था। यह योजना न केवल बंदरगाहों के आधुनिकीकरण पर केंद्रित है, बल्कि समुद्री व्यापार, परिवहन, तटीय औद्योगिकीकरण और सामुदायिक विकास के व्यापक लक्ष्य को भी पूरा करती है।
सागरमाला परियोजना का मूल उद्देश्य बंदरगाहों को स्मार्ट और सक्षम बनाकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। इसके तहत बंदरगाहों को सड़क, रेल, अंतर्देशीय जलमार्गों और तटीय शिपिंग के माध्यम से देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने की रणनीति अपनाई गई है।
सागरमाला योजना के प्रमुख उद्देश्य
सागरमाला योजना के तहत निम्नलिखित प्रमुख लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है:
1. बंदरगाहों का आधुनिकीकरण और नए बंदरगाहों का विकास
मौजूदा बंदरगाहों की क्षमता बढ़ाने के लिए उन्नत तकनीक का उपयोग
नए गहरे पानी के बंदरगाहों का निर्माण
कंटेनर टर्मिनल्स, रो-रो टर्मिनल्स और क्रूज टर्मिनल्स का विकास
2. बंदरगाहों को मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी से जोड़ना
सड़क और रेल संपर्क को मजबूत करना
अंतर्देशीय जलमार्गों और तटीय नौवहन को बढ़ावा देना
3. बंदरगाह-आधारित औद्योगिकीकरण
तटीय आर्थिक क्षेत्र (CEZ) और तटीय औद्योगिक क्लस्टर्स का निर्माण
समुद्री खाद्य प्रसंस्करण, पेट्रोकेमिकल्स, ऑटोमोबाइल और लॉजिस्टिक्स हब विकसित करना
4. तटीय सामुदायिक विकास
तटीय क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना
मत्स्य पालन, कौशल विकास और पर्यटन को बढ़ावा देना
5. पर्यावरण-संवेदनशील विकास
ग्रीन पोर्ट्स और स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग
समुद्री प्रदूषण को कम करने के लिए नीतियां लागू करना
सागरमाला योजना के तहत चल रही परियोजनाएं
सागरमाला योजना के अंतर्गत 119 परियोजनाओं को आंशिक वित्तपोषण के लिए स्वीकृति दी गई है, जिनकी कुल लागत 9,407 करोड़ रुपये है। इनमें से 72 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और बाकी परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं।
इन परियोजनाओं को पांच प्रमुख स्तंभों में वर्गीकृत किया गया है:
1. बंदरगाह आधुनिकीकरण
बंदरगाहों की क्षमता और दक्षता को बढ़ाने के लिए नए टर्मिनलों, क्रेन और कंटेनर हैंडलिंग सुविधाओं का विकास किया जा रहा है।
2. बंदरगाह संपर्क (कनेक्टिविटी) में सुधार
बंदरगाहों को रेल, सड़क और जलमार्गों से जोड़ने के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों और रेलवे नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है।
3. बंदरगाह आधारित औद्योगिकीकरण
बंदरगाहों के आसपास औद्योगिक क्लस्टर, लॉजिस्टिक्स पार्क और तटीय आर्थिक क्षेत्र (CEZs) विकसित किए जा रहे हैं, जिससे निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
4. तटीय सामुदायिक विकास
तटीय क्षेत्रों में कौशल विकास कार्यक्रम, मछली पकड़ने के बंदरगाहों का निर्माण, पर्यटन स्थलों का विकास आदि किए जा रहे हैं।
5. तटीय शिपिंग एवं अंतर्देशीय जल परिवहन
नौवहन को प्रोत्साहित करने के लिए रो-पैक्स नौका सेवाएं, क्रूज टर्मिनल और अंतर्देशीय जलमार्ग टर्मिनल बनाए जा रहे हैं।

सागरमाला योजना के तहत केरल में परियोजनाएं
केरल में 273 करोड़ रुपये की लागत से 8 प्रमुख परियोजनाएं चलाई जा रही हैं। इनमें शामिल हैं:
1. कोचीन पोर्ट पर तरल टर्मिनल का आधुनिकीकरण (20 करोड़ रुपये)
2. कोल्लम में बहुउद्देशीय तटीय घाट का निर्माण (19 करोड़ रुपये)
3. कन्नूर जिले में मछली पकड़ने के बंदरगाह का निर्माण (35 करोड़ रुपये)
4. त्रिशूर जिले में लघु मछली पकड़ने के बंदरगाह का निर्माण (30 करोड़ रुपये)
5. तटीय जिला कौशल विकास कार्यक्रम (25.02 करोड़ रुपये)
6. कोचीन बंदरगाह पर दक्षिण कोयला घाट का पुनर्निर्माण (17.70 करोड़ रुपये)
7. कोचीन बंदरगाह पर मत्स्य पालन बंदरगाह का निर्माण (113.32 करोड़ रुपये)
8. कोचीन बंदरगाह पर रो-रो सुविधाओं का विकास (12.46 करोड़ रुपये)
सागरमाला योजना के लाभ
1. लॉजिस्टिक्स लागत में कमी
यह योजना माल ढुलाई की लागत को 20% तक कम कर सकती है, जिससे भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
2. नए रोजगार के अवसर
सागरमाला परियोजना के तहत 1 करोड़ से अधिक नए रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान है।
3. तटीय औद्योगिकीकरण
बंदरगाहों के आसपास औद्योगिक क्लस्टर विकसित होने से देश की औद्योगिक क्षमता को बढ़ावा मिलेगा।
4. पर्यावरणीय लाभ
समुद्री परिवहन रेल और सड़क परिवहन की तुलना में अधिक पर्यावरण-अनुकूल है।
इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
5. ग्रामीण और तटीय विकास
सागरमाला योजना तटीय समुदायों के जीवन स्तर में सुधार करेगी और मत्स्य पालन, पर्यटन और पारंपरिक कारीगरी को बढ़ावा देगी।
चुनौतियां और समाधान
हालांकि, सागरमाला योजना को लागू करने में कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं:
1. भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय स्वीकृति
सरकार तेजी से स्वीकृति प्रक्रियाओं पर काम कर रही है।
2. राज्यों और केंद्र के बीच समन्वय की कमी
केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल के लिए समितियां बनाई गई हैं।
3. वित्तीय संसाधनों की कमी
निजी निवेश को बढ़ावा देकर इस समस्या को हल किया जा रहा है।
सागरमाला योजना पर आधारित टॉप 10 विस्तृत प्रश्न-उत्तर
प्रश्न 1: सागरमाला योजना क्या है और इसके मुख्य उद्देश्य क्या हैं?
उत्तर:
सागरमाला योजना केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय की एक प्रमुख (फ्लैगशिप) योजना है, जिसका उद्देश्य भारत के बंदरगाह-आधारित विकास को बढ़ावा देना है। यह योजना भारत की 7500 किमी लंबी तटरेखा और 14500 किमी नौवहन योग्य जलमार्गों का उपयोग करके लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने और व्यापार को बढ़ाने पर केंद्रित है।
इसके मुख्य उद्देश्य इस प्रकार हैं:
1. बंदरगाह आधुनिकीकरण – मौजूदा बंदरगाहों का उन्नयन और नए बंदरगाहों का निर्माण।
2. बंदरगाह संपर्क सुधार – बंदरगाहों को सड़क, रेल, और अंतर्देशीय जलमार्गों से जोड़ना।
3. बंदरगाह आधारित औद्योगीकरण – बंदरगाहों के पास औद्योगिक क्लस्टर विकसित करना।
4. तटीय सामुदायिक विकास – स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और बुनियादी सुविधाओं का विकास।
5. तटीय शिपिंग एवं अंतर्देशीय जल परिवहन – समुद्री और अंतर्देशीय जल परिवहन को बढ़ावा देना।
प्रश्न 2: सागरमाला योजना के अंतर्गत अब तक कितनी परियोजनाएँ पूरी हो चुकी हैं?
उत्तर:
सागरमाला योजना के तहत अब तक कुल 119 परियोजनाएँ शुरू की गई हैं, जिनकी अनुमानित लागत 9,407 करोड़ रुपये है। इनमें से 72 परियोजनाएँ पूरी हो चुकी हैं और शेष परियोजनाएँ विभिन्न चरणों में हैं।
इन परियोजनाओं में शामिल हैं:
बंदरगाह अवसंरचना विकास (Port Infrastructure Development)
तटीय घाट परियोजनाएँ (Coastal Berths Projects)
मछली पकड़ने के बंदरगाह (Fishing Harbors)
सड़क एवं रेल संपर्क परियोजनाएँ (Road & Rail Connectivity)
कौशल विकास कार्यक्रम (Skill Development)

प्रश्न 3: सागरमाला योजना के तहत परियोजनाओं को किन पाँच स्तंभों में वर्गीकृत किया गया है?
उत्तर:
सागरमाला योजना की परियोजनाओं को पाँच प्रमुख स्तंभों में विभाजित किया गया है:
1. बंदरगाह आधुनिकीकरण (Port Modernization): मौजूदा बंदरगाहों का आधुनिकीकरण और नए गहरे समुद्री बंदरगाहों का निर्माण।
2. बंदरगाह संपर्क (Port Connectivity): बंदरगाहों को सड़क, रेल और जलमार्गों से जोड़ने के लिए कनेक्टिविटी सुधार।
3. बंदरगाह आधारित औद्योगिकीकरण (Port-Led Industrialization): बंदरगाहों के निकट औद्योगिक क्लस्टर और लॉजिस्टिक्स पार्क का निर्माण।
4. तटीय सामुदायिक विकास (Coastal Community Development): मछुआरों और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए विकास परियोजनाएँ।
5. तटीय शिपिंग एवं अंतर्देशीय जल परिवहन (Coastal Shipping & Inland Water Transport): जल परिवहन को मजबूत बनाना और माल परिवहन को किफायती बनाना।
प्रश्न 4: सागरमाला योजना के अंतर्गत केरल में कौन-कौन सी प्रमुख परियोजनाएँ शुरू की गई हैं?
उत्तर:
केरल में सागरमाला योजना के तहत 8 प्रमुख परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनकी कुल लागत 273 करोड़ रुपये है। इनमें प्रमुख परियोजनाएँ निम्नलिखित हैं:
1. सीओपीटी में तटीय तरल टर्मिनल का नवीनीकरण – 20 करोड़ रुपये (पूर्ण)
2. कोल्लम में बहुउद्देशीय तटीय घाट – 19 करोड़ रुपये (पूर्ण)
3. थलाई में मछली पकड़ने के बंदरगाह का निर्माण – 35 करोड़ रुपये (पूर्ण)
4. त्रिशूर जिले में चेट्टुवा बंदरगाह – 30 करोड़ रुपये (पूर्ण)
5. तटीय जिला कौशल विकास कार्यक्रम – चरण 2 – 25.02 करोड़ रुपये (निर्माणाधीन)
6. कोचीन बंदरगाह पर दक्षिण कोयला घाट का पुनर्निर्माण – 17.7 करोड़ रुपये (पूर्ण)
7. कोचीन बंदरगाह पर मत्स्य बंदरगाह – 113.32 करोड़ रुपये (निर्माणाधीन)
8. कोचीन बंदरगाह पर आरओआरओ सुविधाओं का विकास – 12.46 करोड़ रुपये (पूर्ण)
प्रश्न 5: सागरमाला योजना भारत की अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित करेगी?
उत्तर:
सागरमाला योजना भारत की अर्थव्यवस्था को कई तरीकों से मजबूत करेगी:
1. लॉजिस्टिक्स लागत में कमी: माल परिवहन लागत घटेगी, जिससे व्यापार बढ़ेगा।
2. नौकरी के अवसर: अनुमानित 10 लाख नौकरियाँ प्रत्यक्ष और 40 लाख अप्रत्यक्ष रूप से उत्पन्न होंगी।
3. औद्योगिकीकरण को बढ़ावा: नए औद्योगिक क्लस्टर और स्मार्ट सिटी विकसित होंगी।
4. निर्यात क्षमता में वृद्धि: भारत के निर्यात को प्रतिस्पर्धी बनाया जाएगा।
5. स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा: तटीय क्षेत्रों में मछली पालन, पर्यटन और व्यापार को गति मिलेगी।
प्रश्न 6: सागरमाला योजना को लागू करने में क्या-क्या चुनौतियाँ हैं?
उत्तर:
योजना को लागू करने में कई चुनौतियाँ सामने आ रही हैं:
1. भूमि अधिग्रहण: भूमि अधिग्रहण में कानूनी और सामाजिक समस्याएँ।
2. वित्तीय संसाधनों की कमी: परियोजनाओं के लिए भारी निवेश की आवश्यकता।
3. पर्यावरणीय प्रभाव: तटीय क्षेत्रों में प्रदूषण और जैव विविधता को खतरा।
4. संरचनात्मक समस्याएँ: आधुनिक लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी।
5. राज्य सरकारों का समन्वय: केंद्र और राज्य सरकारों के बीच तालमेल की आवश्यकता।
प्रश्न 7: सागरमाला योजना के अंतर्गत किन उद्योगों को लाभ होगा?
उत्तर:
इस योजना से निम्नलिखित उद्योगों को लाभ होगा:
- शिपिंग और लॉजिस्टिक्स उद्योग
मत्स्य पालन और समुद्री खाद्य प्रसंस्करण
बंदरगाह आधारित विनिर्माण उद्योग
रसायन, पेट्रोकेमिकल और उर्वरक उद्योग
ऑटोमोबाइल और स्टील उद्योग
प्रश्न 8: सागरमाला योजना अन्य देशों की बंदरगाह नीतियों से कैसे तुलना करती है?
उत्तर:
सागरमाला योजना चीन के ‘वन बेल्ट वन रोड’ (OBOR) और सिंगापुर के पोर्ट मॉडल की तरह है। यह योजना भारतीय बंदरगाहों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का प्रयास कर रही है। हालाँकि, चीन और सिंगापुर की तुलना में भारत को इंफ्रास्ट्रक्चर और वित्तीय निवेश बढ़ाने की जरूरत है।
प्रश्न 9: भारत सरकार सागरमाला योजना के लिए फंडिंग कैसे कर रही है?
उत्तर:
योजना की फंडिंग बजट आवंटन, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) और विदेशी निवेश से की जा रही है। सरकार प्रमुख परियोजनाओं के लिए विश्व बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक से लोन भी ले रही है।
प्रश्न 10: सागरमाला योजना का भविष्य क्या है?
उत्तर:
भविष्य में सरकार इस योजना को ग्रीन पोर्ट विकास, स्मार्ट पोर्ट तकनीक और डिजिटल लॉजिस्टिक्स के साथ जोड़कर और अधिक प्रभावी बनाएगी। इसके तहत नई जलमार्ग परियोजनाएँ और तटीय आर्थिक क्षेत्र (CEZ) विकसित किए जाएंगे।
यें सभी प्रश्न-उत्तर सागरमाला योजना की पूरी जानकारी प्रदान करते है और इन्हे विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में उपयोग किया जा सकता है।–
निष्कर्ष
सागरमाला योजना भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह योजना समुद्री परिवहन को सस्ता, तेज और अधिक कुशल बनाने के साथ-साथ देश के औद्योगिक और सामुदायिक विकास में भी योगदान दे रही है।
आने वाले वर्षों में, सागरमाला योजना के तहत और अधिक परियोजनाओं के पूर्ण होने से भारत का समुद्री व्यापार वैश्विक स्तर पर और मजबूत होगा और देश की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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