India-UK Research Partnership: इम्पीरियल ग्लोबल इंडिया के साथ भारत-यूके विज्ञान सहयोग का नया युग!
परिचय: एक ऐतिहासिक कदम
विज्ञान और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में भारत और यूनाइटेड किंगडम के रिश्तों को नया आयाम देने के लिए, इम्पीरियल कॉलेज लंदन ने बेंगलुरु में एक अत्याधुनिक ‘साइंस हब’ — इम्पीरियल ग्लोबल इंडिया — की स्थापना की है।
यह न केवल दो देशों के बीच शिक्षा, अनुसंधान और प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान का केंद्र बनेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर विज्ञान की दिशा में अग्रसर एक नया अध्याय भी खोलेगा।
इम्पीरियल कॉलेज लंदन, जिसे विश्व की सर्वश्रेष्ठ तकनीकी और विज्ञान संस्थाओं में गिना जाता है, ने यह पहल भारत की तेज़ी से उभरती इनोवेशन इकॉनमी और युवाओं में छिपी हुई अनुसंधान क्षमता को ध्यान में रखते हुए की है।
बेंगलुरु, जो पहले से ही भारत का “साइंस एंड टेक्नोलॉजी कैपिटल” माना जाता है, को इस नए विज्ञान केंद्र के लिए चुना गया है।
पृष्ठभूमि: भारत और ब्रिटेन के विज्ञानिक संबंधों की जड़ें
भारत और ब्रिटेन के संबंध सिर्फ राजनीतिक या ऐतिहासिक नहीं हैं — बल्कि ये रिश्ते शिक्षा, विज्ञान और रिसर्च की गहराइयों तक फैले हुए हैं।
ऑक्सफोर्ड, कैम्ब्रिज, और इम्पीरियल जैसे विश्वविद्यालयों में हज़ारों भारतीय छात्र पढ़ चुके हैं और अब शोधकर्ता, उद्योगपति, नीति-निर्माता या प्रोफेसर के रूप में दुनिया में योगदान दे रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर, भारत के प्रतिष्ठित संस्थान जैसे IITs, IISc, AIIMS, NCBS और TIFR के साथ ब्रिटिश संस्थानों का रिसर्च सहयोग दशकों से मजबूत रहा है।
इम्पीरियल कॉलेज लंदन ने भी पिछले 5 वर्षों में भारत के 300 से अधिक शोध संस्थानों के साथ 2000 से ज्यादा जॉइंट रिसर्च पेपर प्रकाशित किए हैं।
बेंगलुरु का चुनाव: विज्ञान और तकनीक का केंद्र
बेंगलुरु को ‘India’s Silicon Valley’ यूँ ही नहीं कहा जाता। यहां पर बायोटेक्नोलॉजी, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, अंतरिक्ष अनुसंधान (ISRO) और AI जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में दुनिया की शीर्ष कंपनियाँ और शोध केंद्र मौजूद हैं। इसी कारण इम्पीरियल कॉलेज ने अपनी इस पहल के लिए बेंगलुरु को चुना — जहां उच्च स्तर के वैज्ञानिक, इनोवेटर्स और स्टार्टअप पहले से मौजूद हैं।
यह केंद्र भारतीय युवाओं के लिए एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रयोगशाला की तरह होगा, जहां वे वैश्विक विशेषज्ञों के साथ मिलकर cutting-edge तकनीकों पर काम कर सकेंगे।
इस पहल का उद्देश्य क्या है?
इस साइंस हब का मूल उद्देश्य है:
भारत और ब्रिटेन के बीच संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं शुरू करना।
उभरती हुई तकनीकों जैसे कि AI, quantum, clean energy, semiconductors आदि में इनोवेशन को प्रोत्साहित करना।
दोनों देशों के शोधकर्ताओं, छात्रों और स्टार्टअप्स को एक मंच पर लाना।
स्टूडेंट एक्सचेंज, फेलोशिप और स्कॉलरशिप प्रोग्राम्स को बढ़ावा देना।
इंडस्ट्री और एकेडेमिया के बीच दूरी को कम करना।
India-UK Research: क्यों है यह भारत के लिए महत्वपूर्ण?
भारत आज विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और वैश्विक चुनौतियों जैसे जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा संकट, स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियाँ आदि पर निर्णायक भूमिका निभा रहा है।
ऐसे में यदि भारत को विज्ञान और प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर बनना है, तो उसे वैश्विक साझेदारों की जरूरत पड़ेगी — और इम्पीरियल कॉलेज जैसे संस्थानों के साथ यह साझेदारी एक सुनहरा अवसर है।
यह साइंस हब भारतीय छात्रों, वैज्ञानिकों और स्टार्टअप्स के लिए एक “ग्लोबल लॉन्चपैड” बनेगा, जहां से वे न केवल भारतीय बल्कि वैश्विक समस्याओं के समाधान खोज सकेंगे।
Imperial Global India Bengaluru कैसे करेगा काम? संरचना, उद्देश्य और प्राथमिकताएं
1. संरचना और संगठनात्मक ढांचा
इम्पीरियल कॉलेज लंदन द्वारा स्थापित यह साइंस हब ‘Imperial Global India’ एक बहु-विषयक (multidisciplinary) अनुसंधान और नवाचार केंद्र होगा, जिसकी बुनियाद कुछ खास बातों पर आधारित होगी:
स्थानीय साझेदारी: यह हब भारतीय संस्थानों जैसे कि IISc बेंगलुरु, IITs, NCBS, और निजी उद्योगों के साथ मिलकर काम करेगा।
इनोवेशन इनक्यूबेटर: यह केंद्र उन स्टार्टअप्स और छात्रों को सहयोग देगा जो नए वैज्ञानिक विचारों और तकनीकों पर काम कर रहे हैं।
शोध प्रयोगशालाएँ: केंद्र में आधुनिक लैब्स, AI कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और उच्चस्तरीय रिसर्च उपकरण मौजूद होंगे।
शिक्षा सहयोग: India-UK Research के विश्वविद्यालयों के बीच फैकल्टी एक्सचेंज, छात्रवृत्ति और रिसर्च फेलोशिप्स को बढ़ावा मिलेगा।

2. प्राथमिक अनुसंधान क्षेत्र (Key Research Areas)
इम्पीरियल कॉलेज लंदन ने भारत की वर्तमान जरूरतों को समझते हुए कुछ विशिष्ट क्षेत्रों को रिसर्च के लिए चुना है:
a. क्लीन एनर्जी और जलवायु समाधान
भारत की ऊर्जा ज़रूरतें और जलवायु संकट को देखते हुए, यह केंद्र स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों (जैसे सौर ऊर्जा, हाइड्रोजन, बैटरी टेक्नोलॉजी) पर फोकस करेगा।
b. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग
AI का उपयोग स्वास्थ्य सेवा, स्मार्ट शहरों, कृषि और साइबर सुरक्षा में किया जाएगा। भारत में इन क्षेत्रों की आवश्यकता तेजी से बढ़ रही है।
c. क्वांटम टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर
भविष्य की तकनीकों के लिए जरूरी क्वांटम कम्प्यूटिंग और सेमीकंडक्टर रिसर्च को यहां बढ़ावा मिलेगा।
d. बायोटेक्नोलॉजी और हेल्थ रिसर्च
दवाओं का विकास, वैक्सीन, जीन एडिटिंग, और डिजिटल हेल्थ पर फोकस किया जाएगा।
e. जल संरक्षण और स्मार्ट कृषि
बदलते मौसम और जल संकट को देखते हुए, आधुनिक सिंचाई तकनीकों, जल पुनर्चक्रण और स्मार्ट फार्मिंग जैसे विषयों पर रिसर्च होगा।
3. फंडिंग मॉडल और निवेश
यह केंद्र एक हाइब्रिड फंडिंग मॉडल पर आधारित होगा:
UK सरकार और इम्पीरियल कॉलेज द्वारा मूल निवेश।
CSR और भारतीय उद्योगों से सहयोग।
भारतीय सरकार की योजना (जैसे स्टार्टअप इंडिया, आत्मनिर्भर भारत योजना) के अंतर्गत फंडिंग।
अंतरराष्ट्रीय रिसर्च ग्रांट्स और फेलोशिप्स।
यह मॉडल सुनिश्चित करेगा कि India-UK Research और इनोवेशन केवल शैक्षणिक प्रयोग नहीं रहे, बल्कि व्यावसायिक और सामाजिक रूप से भी उपयोगी बनें।
4. भारत को क्या लाभ होंगे?
a. वैज्ञानिक नवाचार को बढ़ावा
यह हब भारत के युवा वैज्ञानिकों को cutting-edge तकनीक पर काम करने का अवसर देगा।
b. रोजगार और स्टार्टअप विकास
नए शोध प्रोजेक्ट्स, स्टार्टअप्स और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से रोजगार के नए अवसर बनेंगे।
c. ग्लोबल नेटवर्किंग
भारतीय शोधकर्ता और स्टूडेंट्स को इम्पीरियल जैसे विश्वस्तरीय संस्थानों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
d. आत्मनिर्भर भारत मिशन को बल
स्वदेशी तकनीक और विज्ञान को विकसित करने में यह हब एक मजबूत कदम होगा।
5. भारत-ब्रिटेन के रिश्तों में नया अध्याय
यह पहल केवल एक विज्ञान केंद्र नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक और ज्ञान साझेदारी का प्रतीक है। जैसे भारत ब्रिटेन में योग, आयुर्वेद और IT की पहचान बना रहा है, वैसे ही ब्रिटेन भारत में cutting-edge रिसर्च की नई पहचान स्थापित कर रहा है।
इम्पीरियल कॉलेज लंदन ने बेंगलुरु में इस पहल के माध्यम से भारत को यह संदेश दिया है कि वह भारत की वैज्ञानिक क्षमताओं में विश्वास करता है, और यह साझेदारी वैश्विक समस्याओं के समाधान में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
भारत के युवाओं और इंडस्ट्री के लिए Imperial Science Hub का क्या मतलब है?
1. भारतीय युवाओं को मिलेगा विश्वस्तरीय मंच
a. रिसर्च इंटर्नशिप और ट्रेनिंग
इस केंद्र के ज़रिए भारत के छात्रों को इम्पीरियल कॉलेज लंदन के विशेषज्ञों के साथ इंटर्नशिप और ट्रेनिंग करने का मौका मिलेगा। यह अनुभव उन्हें विश्वस्तरीय अनुसंधान संस्कृति से परिचित कराएगा।
b. स्कॉलरशिप और फेलोशिप
भारतीय छात्रों को UK में पढ़ाई और रिसर्च के लिए विशेष ग्लोबल स्कॉलरशिप्स दी जाएंगी, जिनमें छात्र रहने, पढ़ाई और रिसर्च की संपूर्ण सुविधा पा सकेंगे।
c. ग्लोबल एक्सपोजर
इस केंद्र के जरिए भारतीय छात्र और युवा वैज्ञानिक यूके, यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के रिसर्च नेटवर्क से जुड़ेंगे, जिससे उनका वैश्विक दृष्टिकोण मजबूत होगा।
2. इंडस्ट्री और शैक्षणिक संस्थानों के बीच मजबूत पुल
a. टेक्नोलॉजी ट्रांसफर
इम्पीरियल ग्लोबल इंडिया सेंटर में विकसित तकनीकों को सीधे भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप्स को हस्तांतरित किया जाएगा। इससे ‘मेड इन इंडिया’ और ‘मेड फॉर द वर्ल्ड’ जैसी सोच को बल मिलेगा।
b. निजी कंपनियों की भागीदारी
Infosys, Tata, Biocon, Wipro, और जैसे अन्य तकनीकी और बायोटेक सेक्टर के बड़े नाम इस पहल के साझेदार बन सकते हैं। इससे रिसर्च टू मार्केट का सफर आसान होगा।
c. इनोवेशन-ड्रिवन इकोसिस्टम
यह केंद्र एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनेगा जहाँ शिक्षा, विज्ञान, और उद्योग मिलकर इनोवेशन को आगे बढ़ाएंगे। इससे भारत में Invention to Innovation की यात्रा को गति मिलेगी।
3. भारत में वैज्ञानिक क्रांति की दिशा में कदम
a. विज्ञान को मिलेगा सामाजिक महत्व
यह केंद्र विज्ञान को केवल प्रयोगशालाओं से निकालकर आम लोगों तक ले जाएगा। यह किसानों, छात्रों, उद्योगपतियों और आम नागरिकों तक तकनीकी समाधान पहुँचाएगा।
b. ‘Make in India’ और ‘Digital India’ को मिलेगा बल
AI, क्लीन एनर्जी, क्वांटम और हेल्थ टेक जैसे क्षेत्रों में स्वदेशी तकनीक विकसित कर भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम होगा।
c. रिसर्च में विविधता और समावेशिता
इम्पीरियल ग्लोबल इंडिया युवाओं, महिलाओं, ग्रामीण क्षेत्रों और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों से आने वाले प्रतिभावान छात्रों को शोध के अवसर देगा।
4. भविष्य की योजनाएं और विस्तार
a. भारत के अन्य शहरों में केंद्र
यह पहल केवल बेंगलुरु तक सीमित नहीं रहेगी। इम्पीरियल कॉलेज भविष्य में दिल्ली, मुंबई, पुणे, हैदराबाद और चेन्नई जैसे शहरों में भी ऐसे केंद्र खोल सकता है।
b. India-UK Research काउंसिल का गठन
भविष्य में एक साझा अनुसंधान परिषद बनाई जा सकती है जो दोनों देशों की प्राथमिकताओं के आधार पर संयुक्त परियोजनाएं बनाएगी।
c. सामाजिक प्रभाव के लिए रिसर्च
यह केंद्र केवल तकनीकी इनोवेशन पर नहीं बल्कि सामाजिक समस्याओं जैसे कि गरीबी, शिक्षा, स्वास्थ्य असमानता और पर्यावरण संकट पर भी रिसर्च करेगा।

Imperial Global India: भारत को वैश्विक विज्ञान नेतृत्व की दिशा में ले जाता एक कदम
1. विज्ञान से नीति-निर्माण तक
a. साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण
यह केंद्र भारत सरकार को स्वास्थ्य, शिक्षा, जलवायु, ऊर्जा और शहरी विकास जैसे क्षेत्रों में रिसर्च आधारित ठोस सुझाव देगा। जिससे नीतियाँ ज़मीनी हकीकत और आंकड़ों पर आधारित बनेंगी।
b. NITI Aayog और DST के साथ साझेदारी
NITI Aayog और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के साथ मिलकर यह केंद्र नीतिगत बदलावों के लिए मॉडल फ्रेमवर्क तैयार करेगा। इससे भारत की राष्ट्रीय योजनाओं को वैश्विक मानकों से जोड़ा जा सकेगा।
2. भारत को ग्लोबल साइंस सुपरपावर बनाने की दिशा में एक कदम
a. रिसर्च आउटपुट में बढ़ोत्तरी
इस केंद्र की मदद से भारत का शोध प्रकाशनों में योगदान, पेटेंट संख्या और इनोवेशन इंडेक्स में स्थान लगातार बढ़ेगा।
b. वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग में भारत की भागीदारी
इस केंद्र के ज़रिए भारत यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, जापान, अमेरिका जैसे देशों के साथ बहुपक्षीय रिसर्च समझौते कर सकेगा। इससे भारत एक वैश्विक विज्ञान सहयोग केंद्र बन सकेगा।
c. भारतीय प्रतिभा की वैश्विक पहचान
इम्पीरियल ग्लोबल इंडिया भारतीय वैज्ञानिकों, प्रोफेसरों और छात्रों को ग्लोबल साइंटिफिक लीडरशिप की ओर प्रेरित करेगा
3. शिक्षा, रोजगार और स्टार्टअप्स को नया आयाम
a. नयी जेनरेशन के लिए नई शिक्षा
यह केंद्र भारतीय विश्वविद्यालयों में रिसर्च-ओरिएंटेड पाठ्यक्रम, AI बेस्ड लर्निंग, क्वांटम सिमुलेशन और डेटा ड्रिवन पेडागॉजी को बढ़ावा देगा।
b. स्टार्टअप्स और स्पिन-ऑफ कंपनियों को बल
इससे AI, हेल्थ टेक, क्लाइमेट टेक, क्लीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में रिसर्च बेस्ड स्टार्टअप्स को विकसित होने का अवसर मिलेगा। नए रोजगार सृजित होंगे।
c. युवा वैज्ञानिकों के लिए ग्लोबल कैरियर के रास्ते
भारत के युवा वैज्ञानिकों को इम्पीरियल कॉलेज और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में पोस्ट डॉक, फेलोशिप और रिसर्च जॉब्स के ज़रिए वैश्विक अवसर मिलेंगे।
4. भारत के विज़न @2047 में योगदान
a. विज्ञान आधारित आत्मनिर्भर भारत
यह केंद्र भारत को ऐसी स्थिति में ले जाएगा जहाँ देश की वैज्ञानिक आवश्यकताएँ अपने देश में पूरी होंगी। विदेशों पर निर्भरता घटेगी।
b. “Viksit Bharat” की दिशा में विज्ञान का रोल
इम्पीरियल ग्लोबल इंडिया विज्ञान और नवाचार के माध्यम से विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगा।
c. सांस्कृतिक और बौद्धिक आदान-प्रदान
यह केंद्र केवल विज्ञान नहीं बल्कि भारत और ब्रिटेन के बीच सांस्कृतिक और बौद्धिक संबंधों को भी गहराई देगा।
निष्कर्ष: भारत-यूके सहयोग के नए युग की शुरुआत — Imperial Global India सेंटर
इम्पीरियल कॉलेज लंदन द्वारा बेंगलुरु में स्थापित Imperial Global India साइंस हब न केवल India-UK Research के बीच वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग को मजबूत करता है, बल्कि यह भारत के लिए वैश्विक अनुसंधान और नवाचार में नेतृत्व हासिल करने का एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह केंद्र भारतीय युवाओं को विश्वस्तरीय अनुसंधान के अवसर प्रदान करेगा, जिससे उनकी प्रतिभा और ज्ञान का स्तर ऊँचा होगा।
साथ ही, यह पहल भारत के उद्योगों और शिक्षा जगत के बीच एक प्रभावी पुल के रूप में कार्य करेगी, जिससे तकनीकी नवाचार को तेजी मिलेगी और देश की आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा।
भारत के “विकसित भारत 2047” के विज़न में यह केंद्र एक अभिन्न स्तंभ साबित होगा, जो विज्ञान आधारित नीतियों और वैश्विक साझेदारी के माध्यम से देश को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा।
इस प्रकार, Imperial Global India सेंटर एक प्रेरणादायक मिसाल है कि कैसे अंतरराष्ट्रीय सहयोग से हम भारत को एक वैज्ञानिक महाशक्ति और नवाचार का हब बना सकते हैं।
आने वाले वर्षों में यह केंद्र न केवल शोध और तकनीक में क्रांति लाएगा, बल्कि भारत और ब्रिटेन के बीच गहरे बौद्धिक और सांस्कृतिक संबंधों को भी मजबूत करेगा।
भारत की विज्ञान यात्रा में यह एक नया अध्याय है — जहाँ ज्ञान, शोध और नवाचार से भविष्य की दुनिया बनाई जाएगी।
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