कबाक यानो माउंट एल्ब्रस उपलब्धि: अरुणाचल प्रदेश की युवा शक्ति का प्रतीक
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Toggleअरुणाचल प्रदेश की धरती हमेशा से साहस और अदम्य इच्छाशक्ति की कहानियों के लिए जानी जाती है। इसी धरती की बेटी कबाक यानो माउंट एल्ब्रस की चोटी तक पहुंचकर पूरे देश का गौरव बढ़ा चुकी हैं। रूस और यूरोप की सबसे ऊँची पर्वत चोटी माउंट एल्ब्रस पर 16 अगस्त को तिरंगा लहराना केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि भारत की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।

कबाक यानो कौन हैं?
कबाक यानो का जन्म अरुणाचल प्रदेश के एक छोटे से गांव में हुआ। बचपन से ही उन्होंने प्रकृति, पहाड़ों और चुनौतियों को करीब से महसूस किया। उनके परिवार ने सीमित संसाधनों के बावजूद उनके सपनों को पंख दिए।
शिक्षा के दौरान ही उन्हें ट्रेकिंग और पर्वतारोहण में रुचि पैदा हुई।
धीरे-धीरे उन्होंने पेशेवर पर्वतारोहण का प्रशिक्षण लिया।
आज कबाक यानो माउंट एल्ब्रस को जीतकर यह साबित कर चुकी हैं कि इच्छाशक्ति और मेहनत से कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता।
पर्वतारोहण का सफर
कबाक यानो का सफर आसान नहीं रहा। उन्होंने शुरुआत छोटे-छोटे ट्रेक से की, फिर उत्तर-पूर्व के कठिन पर्वतीय इलाकों में प्रशिक्षण प्राप्त किया।
उन्होंने माउंट एवरेस्ट तक भी पहुंचकर अपने राज्य का नाम रोशन किया।
“सेवन समिट्स चैलेंज” के अंतर्गत उनका लक्ष्य दुनिया के सात महाद्वीपों की सबसे ऊँची चोटियों को फतह करना है।
इस मिशन की सबसे अहम कड़ी कबाक यानो माउंट एल्ब्रस पर चढ़ाई रही, जो अब इतिहास का हिस्सा बन चुकी है।
माउंट एल्ब्रस का परिचय
माउंट एल्ब्रस रूस की काकेशस पर्वत श्रृंखला में स्थित है और इसकी ऊँचाई लगभग 5,642 मीटर (18,510 फीट) है।
यह यूरोप की सबसे ऊँची चोटी है।
यह एक निष्क्रिय ज्वालामुखी है, जो लाखों साल पहले सक्रिय हुआ करता था।
पर्वतारोहियों के लिए यह चोटी अत्यधिक चुनौतीपूर्ण मानी जाती है क्योंकि यहाँ का मौसम बेहद तेजी से बदलता है।
यही कारण है कि कबाक यानो माउंट एल्ब्रस तक पहुंचना उनके अदम्य साहस का प्रमाण है।
चढ़ाई की चुनौतियाँ
किसी भी पर्वत को फतह करना केवल शारीरिक शक्ति नहीं बल्कि मानसिक दृढ़ता का भी इम्तिहान होता है।
एल्ब्रस पर तापमान कई बार -30 डिग्री तक चला जाता है।
ऑक्सीजन की कमी पर्वतारोहियों को बेहद थका देती है।
बर्फीले तूफान और ग्लेशियर की दरारें अतिरिक्त खतरा पैदा करती हैं।
इन सबके बावजूद कबाक यानो माउंट एल्ब्रस तक पहुँचीं और अपने झंडे और जज्बे को ऊँचाई पर पहुंचाया।
राज्यपाल की बधाई
अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल के.टी. परनाइक (सेवानिवृत्त) ने कबाक यानो को उनकी इस उपलब्धि पर हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।
उन्होंने कहा कि कबाक यानो माउंट एल्ब्रस पर विजय केवल एक व्यक्तिगत सफलता नहीं बल्कि राज्य और देश की युवा शक्ति की पहचान है।
समाज पर प्रभाव
कबाक यानो का यह कदम पूरे उत्तर-पूर्व भारत की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक है।
ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना उनकी मेहनत और संघर्ष का परिणाम है।
उनके अभियान से यह संदेश जाता है कि लड़कियाँ भी हर कठिनाई को पार कर सकती हैं।
कबाक यानो माउंट एल्ब्रस की सफलता खेल और साहसिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए एक नया अध्याय खोलती है।
सेवन समिट्स का सफर
कबाक यानो का लक्ष्य है कि वे सेवन समिट्स (दुनिया की सातों महाद्वीपों की सबसे ऊँची चोटियाँ) पर तिरंगा लहराएँ।
- एशिया – माउंट एवरेस्ट
- यूरोप – माउंट एल्ब्रस
- अफ्रीका – माउंट किलिमंजारो
- उत्तरी अमेरिका – डेनाली
- दक्षिणी अमेरिका – एकांकागुआ
- अंटार्कटिका – विन्सन मैसिफ
- ऑस्ट्रेलिया – कोस्च्यूस्को
इनमें से कबाक यानो माउंट एल्ब्रस और अन्य चोटियाँ जीतकर वे इस मिशन को धीरे-धीरे पूरा कर रही हैं।

महिला सशक्तिकरण का प्रतीक
आज जब दुनिया महिला सशक्तिकरण पर जोर देती है, तब कबाक यानो माउंट एल्ब्रस की उपलब्धि इसका सजीव उदाहरण है।
उन्होंने यह दिखाया कि महिलाएँ किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं।
यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन बनेगी।
खासकर अरुणाचल प्रदेश की बेटियों के लिए यह एक प्रेरणादायक घटना है।
निष्कर्ष
पर्वतारोहण केवल शारीरिक शक्ति की नहीं बल्कि मानसिक धैर्य, आत्मविश्वास और अदम्य इच्छाशक्ति की भी परीक्षा होती है। कबाक यानो माउंट एल्ब्रस की सफलता इस बात का जीवंत उदाहरण है कि कठिनाइयाँ चाहे कितनी भी गहरी क्यों न हों, दृढ़ निश्चय से उन्हें पार किया जा सकता है।
यह उपलब्धि तीन स्तरों पर विशेष महत्व रखती है:
(क) व्यक्तिगत स्तर पर
कबाक यानो के लिए यह विजय उनके सपनों और वर्षों की मेहनत का परिणाम है। एक साधारण परिवेश से निकलकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम ऊँचा किया। उनका यह सफर हमें यह सिखाता है कि अगर जुनून सच्चा हो तो कोई बाधा हमें रोक नहीं सकती।
(ख) सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर
कबाक यानो माउंट एल्ब्रस की सफलता अरुणाचल प्रदेश की युवा पीढ़ी के लिए एक सशक्त संदेश है। खासकर लड़कियों के लिए यह एक प्रेरणा है कि वे भी पुरुष प्रधान क्षेत्रों में अपना लोहा मनवा सकती हैं।
इस तरह की उपलब्धियाँ न केवल राज्य की पहचान को मजबूत करती हैं बल्कि समाज में महिलाओं की भूमिका और भी सशक्त बनाती हैं।
(ग) राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर
भारत जैसे विविधताओं से भरे देश के लिए यह गौरव का क्षण है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय युवाओं की उपस्थिति दुनिया को यह दिखाती है कि भारत केवल आईटी, विज्ञान और संस्कृति तक ही सीमित नहीं है, बल्कि साहसिक खेलों और पर्वतारोहण में भी अपनी पहचान बना रहा है। कबाक यानो माउंट एल्ब्रस की उपलब्धि भारत की युवा शक्ति और साहस का प्रतीक है।
प्रेरणा का संदेश
यह घटना हर उस युवा के लिए एक सबक है जो अपने सपनों को पाना चाहता है। कबाक यानो ने दिखाया कि चाहे संसाधन सीमित हों, परिस्थितियाँ कठिन हों या रास्ता जोखिम से भरा हो, सच्ची लगन और मेहनत से हर शिखर फतह किया जा सकता है।
उनकी इस सफलता से यह संदेश निकलता है कि –
असंभव कुछ भी नहीं है।
बड़े सपनों को पाने के लिए साहस और तैयारी ज़रूरी है।
हर कठिनाई एक अवसर है, जिसे जीतकर हम इतिहास रच सकते हैं।
भविष्य की ओर
कबाक यानो अब सेवन समिट्स चैलेंज की ओर बढ़ रही हैं। उनका लक्ष्य दुनिया के सभी महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों को जीतना है। यह यात्रा केवल उनका व्यक्तिगत सपना नहीं बल्कि पूरे भारत के लिए एक गौरवपूर्ण अध्याय होगी।
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