भारत: विश्व का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक (2020-2024)! लेकिन कब बनेगा आत्मनिर्भर?
भारत, एक उभरती हुई वैश्विक शक्ति होने के साथ-साथ, अपनी रक्षा क्षमताओं को लगातार सशक्त बना रहा है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2020-2024 के बीच विश्व का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक देश रहा, जिसका वैश्विक हथियार आयात में 8.3% हिस्सा है। यह आँकड़ा भारत की सुरक्षा जरूरतों, सैन्य आधुनिकीकरण की दिशा में बढ़ते प्रयासों, और क्षेत्रीय भू-राजनीतिक चुनौतियों को प्रतिबिंबित करता है।
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Toggleविश्व में हथियारों का आयात और भारत की स्थिति
भारत, पिछले कई दशकों से हथियारों का सबसे बड़ा आयातक रहा है। हालाँकि, इस बार यूक्रेन (8.8%) पहले स्थान पर आ गया, जो वहाँ जारी युद्ध की स्थिति का परिणाम है। भारत अभी भी रूस, फ्रांस और इज़राइल से भारी मात्रा में हथियारों का आयात करता है, जबकि अमेरिका, जर्मनी और पोलैंड यूक्रेन को हथियार प्रदान करने वाले मुख्य देश हैं।
इसके अलावा, कतर और सऊदी अरब (6.8%), पाकिस्तान (4.6%), जापान (3.9%), ऑस्ट्रेलिया (3.5%) और अमेरिका (3.1%) भी प्रमुख हथियार आयातकों की सूची में शामिल हैं। यह डेटा वैश्विक हथियार व्यापार के बढ़ते प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा रणनीतियों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
भारत के हथियार आयात की प्रमुख वजहें
भारत का रक्षा क्षेत्र अत्यधिक व्यापक और रणनीतिक है। एक विशाल भूमि सीमा, समुद्री सुरक्षा आवश्यकताओं और बदलते वैश्विक परिदृश्य के कारण, भारत को अपनी सैन्य क्षमताओं को निरंतर बढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है। निम्नलिखित कुछ महत्वपूर्ण कारण हैं जिनकी वजह से भारत हथियारों का सबसे बड़ा आयातक बना हुआ है:
1. चीन और पाकिस्तान से खतरा
भारत के दो पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान, लंबे समय से सुरक्षा के लिए चुनौती बने हुए हैं।
चीन: भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर विवाद समय-समय पर बढ़ता रहता है। 2020 में गलवान घाटी संघर्ष के बाद, भारत ने अपनी सेना के आधुनिकीकरण और हथियारों की खरीद को तेजी से बढ़ाया।
पाकिस्तान: पाकिस्तान के साथ लगातार सीमा पर संघर्ष की स्थिति बनी रहती है, खासकर जम्मू-कश्मीर में। पाकिस्तान ने अपने सैन्य बलों को आधुनिक बनाने के लिए चीन और तुर्की से कई हथियार खरीदे हैं, जिससे भारत के लिए अपनी क्षमताओं को उन्नत करना जरूरी हो गया है।
2. आधुनिकीकरण की दिशा में भारत का प्रयास
भारत की “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” पहल के बावजूद, रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता पूरी तरह से हासिल नहीं हो पाई है। भारत को अभी भी कई उन्नत हथियार प्रणालियाँ, जैसे कि लड़ाकू विमान, मिसाइल सिस्टम, पनडुब्बियाँ और एयर डिफेंस सिस्टम, अन्य देशों से खरीदनी पड़ती हैं।
3. स्थानीय रक्षा उत्पादन में चुनौतियाँ
भारत ने कई रक्षा उत्पादों को घरेलू स्तर पर विकसित करने का प्रयास किया है, लेकिन तकनीकी जटिलताओं, अनुसंधान और विकास में देरी, तथा उत्पादन की धीमी गति के कारण, अभी भी कई महत्वपूर्ण रक्षा उपकरण आयात करने पड़ते हैं।
4. अंतरराष्ट्रीय सामरिक साझेदारी
भारत अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए विभिन्न देशों के साथ रक्षा समझौतों और साझेदारियों को बढ़ावा दे रहा है। रूस, फ्रांस, अमेरिका, इज़राइल और अन्य देशों के साथ भारत के रणनीतिक संबंध मजबूत हुए हैं, जिससे हथियारों का आयात लगातार जारी है।

भारत के प्रमुख हथियार आपूर्तिकर्ता
India दुनिया के कई देशों से आधुनिक हथियार और रक्षा उपकरण खरीदता है। इसके प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हैं:
1. रूस
रूस भारत का सबसे पुराना और सबसे विश्वसनीय रक्षा आपूर्तिकर्ता रहा है।
S-400 ट्रायम्फ मिसाइल सिस्टम: यह भारत की वायु रक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए रूस से खरीदा गया है।
सुखोई और मिग लड़ाकू विमान: भारतीय वायुसेना में रूस से खरीदे गए कई युद्धक विमान सेवा में हैं।
टी-90 और टी-72 टैंक: भारतीय सेना में रूसी टैंकों की एक बड़ी संख्या है।
2. फ्रांस
फ्रांस हाल के वर्षों में भारत का एक महत्वपूर्ण रक्षा साझेदार बनकर उभरा है।
राफेल लड़ाकू विमान: भारत ने फ्रांस से 36 राफेल जेट खरीदे, जिससे वायुसेना की शक्ति बढ़ी।
स्कॉर्पीन पनडुब्बियाँ: भारतीय नौसेना के लिए फ्रांस से पनडुब्बियों का आयात किया गया है।
3. इज़राइल
इज़राइल, भारत को कई आधुनिक रक्षा तकनीकों और हथियार प्रणालियों की आपूर्ति करता है।
ड्रोन और मिसाइल सिस्टम: भारतीय सेना में इज़रायली ड्रोन और स्पाइक एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल शामिल हैं।
रडार और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम: भारत, इज़राइल से उन्नत रडार और निगरानी प्रणालियाँ खरीदता है।
4. संयुक्त राज्य अमेरिका
भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग हाल के वर्षों में काफी बढ़ा है।
C-17 ग्लोबमास्टर और C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान: ये सैन्य परिवहन विमान अमेरिका से खरीदे गए हैं।
MH-60 रोमियो हेलिकॉप्टर और अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर: भारतीय सेना और नौसेना को अमेरिका से कई आधुनिक हेलिकॉप्टर मिले हैं।
भारत की रक्षा नीति और आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाए गए कदम
भारत ने अपने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए कई पहल शुरू की हैं।
1. मेक इन इंडिया और रक्षा उत्पादन
सरकार ने स्वदेशी रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएँ शुरू की हैं।
निजी क्षेत्र और विदेशी कंपनियों को भारतीय रक्षा क्षेत्र में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
तेजस हल्का लड़ाकू विमान (LCA), अर्जुन टैंक और अग्नि मिसाइल जैसी स्वदेशी परियोजनाएँ प्रगति पर हैं।
2. रक्षा अनुसंधान और विकास
DRDO (Defence Research and Development Organisation) को अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों के विकास के लिए सशक्त बनाया गया है।
हाइपरसोनिक मिसाइल, क्वांटम संचार और एआई-आधारित युद्ध प्रणालियों पर कार्य किया जा रहा है।
3. आत्मनिर्भर भारत और आयात पर निर्भरता में कमी
सरकार ने 101 रक्षा उपकरणों की एक सूची जारी की है, जिन्हें अब घरेलू उद्योग से ही खरीदा जाएगा।
रक्षा उत्पादन और निर्यात संवर्धन नीति 2020 के तहत भारत, रक्षा निर्यात को भी बढ़ावा देने का प्रयास कर रहा है।
India के हथियार आयात से जुड़े टॉप 10 सवाल और उनके विस्तृत उत्तर
India के रक्षा क्षेत्र और हथियारों के आयात से संबंधित कुछ प्रमुख प्रश्न अक्सर लोग सर्च करते हैं। यहाँ उनके विस्तृत उत्तर दिए गए हैं:

1. India दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक क्यों है?
उत्तर: India , अपनी विशाल सीमाओं और सुरक्षा चुनौतियों के कारण हथियारों का सबसे बड़ा आयातक रहा है। प्रमुख कारण:
चीन और पाकिस्तान से खतरा: चीन के साथ सीमा विवाद और पाकिस्तान के साथ कश्मीर को लेकर संघर्ष।
रक्षा आधुनिकीकरण: India अपनी सेना, वायुसेना और नौसेना को आधुनिक बनाने के लिए उन्नत हथियारों की खरीद करता है।
स्थानीय उत्पादन में चुनौतियाँ: ‘मेक इन इंडिया’ पहल के बावजूद, जटिल हथियार प्रणालियों का स्वदेशी उत्पादन पूरी तरह से संभव नहीं हो पाया है।
रणनीतिक साझेदारी: अमेरिका, रूस, फ्रांस, इज़राइल जैसे देशों के साथ रक्षा सहयोग के कारण भारत को आधुनिक हथियार मिलते हैं।
2. India सबसे ज्यादा हथियार किस देश से खरीदता है?
उत्तर: India के प्रमुख हथियार आपूर्तिकर्ता निम्नलिखित हैं:
1. रूस: India की 40% से अधिक सैन्य जरूरतें रूस से पूरी होती हैं।
सुखोई और मिग लड़ाकू विमान
S-400 मिसाइल सिस्टम
T-90 टैंक
2. फ्रांस:
राफेल लड़ाकू विमान
स्कॉर्पीन पनडुब्बियाँ
3. इज़राइल:
ड्रोन टेक्नोलॉजी
एंटी-टैंक मिसाइलें
4. संयुक्त राज्य अमेरिका:
अपाचे और चिनूक हेलिकॉप्टर
C-17 और C-130J विमान
3. क्या India हथियारों के मामले में आत्मनिर्भर हो सकता है?
उत्तर: India आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कई कदम उठा रहा है:
मेक इन इंडिया: India में हथियार निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
DRDO का अनुसंधान: India अब अपने खुद के फाइटर जेट (तेजस), मिसाइल (अग्नि, ब्रह्मोस) और टैंक (अर्जुन) विकसित कर रहा है।
निर्यात पर जोर: India अब हथियारों का निर्यात भी बढ़ा रहा है और 2030 तक 5 बिलियन डॉलर का रक्षा निर्यात लक्ष्य रखा है।
हालांकि, हाई-टेक हथियार प्रणालियों जैसे स्टील्थ फाइटर जेट और एयरक्राफ्ट कैरियर के लिए अभी भी भारत को अन्य देशों पर निर्भर रहना पड़ता है।
4. India के सबसे महंगे हथियार सौदे कौन से हैं?
उत्तर: India ने पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े रक्षा सौदे किए हैं:
1. राफेल फाइटर जेट डील (₹59,000 करोड़) – फ्रांस से 36 राफेल जेट खरीदे गए।
2. S-400 मिसाइल सिस्टम (₹35,000 करोड़) – रूस से India की वायु रक्षा को मजबूत करने के लिए।
3. INS विक्रांत (₹23,000 करोड़) – India का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत।
4. MH-60 रोमियो हेलिकॉप्टर (₹16,000 करोड़) – अमेरिका से 24 हेलिकॉप्टर खरीदे गए।
5. तेजस MK-1A फाइटर जेट (₹48,000 करोड़) – 83 तेजस विमान HAL से खरीदे गए।
5. India को हथियारों का आयात कम करने के लिए क्या करना चाहिए?
उत्तर: India को निम्नलिखित रणनीतियों पर काम करना चाहिए:
स्वदेशी अनुसंधान और उत्पादन को बढ़ावा देना।
रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों को निवेश के लिए प्रेरित करना।
रक्षा उत्पादों के निर्यात को बढ़ाना, जिससे विदेशी मुद्रा भी प्राप्त हो।
अत्याधुनिक हथियार बनाने के लिए वैश्विक कंपनियों के साथ साझेदारी करना।
अगर India इन पहलुओं पर ध्यान देता है, तो 2040 तक वह हथियारों के मामले में आत्मनिर्भर बन सकता है।
6. India का रक्षा बजट कितना है और यह हथियारों पर कितना खर्च करता है?
उत्तर: 2024-25 में India का रक्षा बजट: ₹6.2 लाख करोड़ (लगभग 75 बिलियन डॉलर)।
हथियारों की खरीद पर खर्च: कुल रक्षा बजट का लगभग 30-35% आयातित हथियारों पर खर्च होता है।
स्वदेशी उत्पादन: India ने रक्षा बजट का 68% हिस्सा स्वदेशी हथियारों पर खर्च करने की योजना बनाई है।
7. India किन हथियारों का निर्यात करता है?
उत्तर: India अब कई रक्षा उपकरणों का निर्यात कर रहा है:
ब्रह्मोस मिसाइल: फिलीपींस को निर्यात किया गया।
तेजस फाइटर जेट: मलेशिया, इंडोनेशिया और अर्जेंटीना में रुचि दिखाई गई।
अकाश मिसाइल सिस्टम: वियतनाम और अन्य देशों को निर्यात की संभावना।
सर्विलांस ड्रोन: कई देशों को भारत से ड्रोन मिलने की उम्मीद।
भारत 2027 तक ₹1.75 लाख करोड़ (25 बिलियन डॉलर) के रक्षा निर्यात का लक्ष्य रख रहा है।
8. क्या भारत को हथियारों के आयात पर निर्भर रहना चाहिए?
उत्तर: भारत को पूर्ण रूप से हथियार आयात पर निर्भर नहीं रहना चाहिए क्योंकि:
विदेशी मुद्रा का नुकसान: हर साल अरबों डॉलर विदेशी कंपनियों को भुगतान किए जाते हैं।
रणनीतिक जोखिम: किसी भी युद्ध या संकट के समय विदेशी आपूर्ति बाधित हो सकती है।
तकनीकी आत्मनिर्भरता: यदि India खुद हथियार बनाता है, तो उसका तकनीकी कौशल भी बढ़ेगा।
हालांकि, कुछ विशेष तकनीकों (जैसे स्टील्थ फाइटर जेट, अत्याधुनिक मिसाइल सिस्टम) के लिए India को कुछ समय तक आयात करना पड़ेगा।
9. India की सेना को किस प्रकार के नए हथियारों की जरूरत है?
उत्तर: India को निम्नलिखित नई हथियार प्रणालियों की जरूरत है:
1. 5वीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट – रूस और अमेरिका की तरह।
2. हाइपरसोनिक मिसाइल सिस्टम – चीन और रूस इस पर आगे हैं।
3. अत्याधुनिक पनडुब्बियाँ और विमानवाहक पोत – समुद्री सुरक्षा के लिए।
4. साइबर और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर टेक्नोलॉजी – भविष्य के युद्धों के लिए जरूरी।
India DRDO और HAL के माध्यम से इन परियोजनाओं पर काम कर रहा है।
10. क्या India भविष्य में हथियार निर्यातक बन सकता है?
उत्तर: हाँ, India हथियार निर्यातक बनने की ओर बढ़ रहा है।
2023 में India ने ₹16,000 करोड़ से अधिक का रक्षा निर्यात किया।
2027 तक India 25 बिलियन डॉलर का रक्षा निर्यात करना चाहता है।
ब्रह्मोस, तेजस, अकाश, पिनाका जैसे स्वदेशी हथियारों की माँग बढ़ रही है।
अगर India आत्मनिर्भरता पर ध्यान देता है, तो वह 2035 तक एक बड़ा हथियार निर्यातक बन सकता है और वैश्विक रक्षा बाजार में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
निष्कर्ष
India का हथियार आयात उसकी रणनीतिक जरूरतों और सुरक्षा चिंताओं को दर्शाता है। हालांकि सरकार स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है, फिर भी कई महत्वपूर्ण रक्षा प्रणालियों के लिए अन्य देशों पर निर्भरता बनी हुई है।
आत्मनिर्भर India अभियान के तहत, India भविष्य में रक्षा आयात में कमी लाकर एक वैश्विक रक्षा निर्यातक बनने की दिशा में अग्रसर है। यदि India अपने अनुसंधान, विकास और उत्पादन क्षमताओं को तेज गति से बढ़ाता है, तो आने वाले वर्षों में वह रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकता है और हथियार आयात करने के बजाय, अन्य देशों को निर्यात करने वाला देश बन सकता है।
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