संस्कृति के आयाम

संस्कृति के आयाम: भारतीय संस्कृति, कला और साहित्य की सम्पूर्ण झलक

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संस्कृति के आयाम: इतिहास, कला और परंपरा पर गहन अध्ययन

प्रस्तावना

भारत एक ऐसा देश है जिसकी पहचान उसकी संस्कृति के आयाम से होती है। भारतीय संस्कृति न केवल अपने ऐतिहासिक वैभव के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसकी जड़ें इतनी गहरी हैं कि यह पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत रही है। इस संस्कृति की व्यापकता, विविधता और गहराई को समझने के लिए कई विद्वानों ने प्रयास किए।

इन्हीं प्रयासों का परिणाम है डॉ. मनोरमा मिश्रा द्वारा लिखित “संस्कृति के आयाम” पुस्तक, जिसे नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया ने प्रकाशित किया है।

संस्कृति के आयाम
संस्कृति के आयाम: भारतीय संस्कृति, कला और साहित्य की सम्पूर्ण झलक

यह पुस्तक भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति, दर्शन, कला, साहित्य, परंपराएँ और जीवन मूल्यों का विस्तृत विवेचन करती है।

पुस्तक का परिचय

नाम: संस्कृति के आयाम

लेखिका: डॉ. मनोरमा मिश्रा

प्रकाशक: National Book Trust, India

प्रकाशन वर्ष: 2023

पृष्ठ संख्या: लगभग 150

प्रथम संस्करण: हाँ

भाषा: हिंदी

संस्कृति के आयाम पुस्तक भारतीय समाज और जीवन शैली के उन पहलुओं को सामने लाती है जो हमारी पहचान, हमारी जड़ों और हमारे आदर्शों को स्पष्ट करते हैं।

लेखक परिचय – डॉ. मनोरमा मिश्रा

संस्कृति के आयाम की लेखिका डॉ. मनोरमा मिश्रा भारतीय संस्कृति, समाज और परंपरा की गहरी समझ रखने वाली विदुषी हैं। उन्होंने इस पुस्तक में लगभग 295 ग्रंथों का अध्ययन कर सामग्री तैयार की है। यही कारण है कि यह पुस्तक न केवल गहराई लिए हुए है बल्कि प्रामाणिक भी है।

विमोचन और महत्व

जनवरी 2024 में इस पुस्तक का विमोचन जनरल वी.के. सिंह (सेवानिवृत्त) द्वारा किया गया। उन्होंने इसे “गागर में सागर” की उपमा दी। उनके अनुसार, संस्कृति के आयाम पुस्तक भारतीय संस्कृति, संस्कार और लोकमंगल के मूल तत्वों को संक्षेप में प्रस्तुत करती है।

पुस्तक की विषय-वस्तु और संरचना

1. भारतीय संस्कृति की परिभाषा और स्वरूप

इस खंड में बताया गया है कि संस्कृति केवल परंपराओं का संग्रह नहीं है बल्कि यह जीवन जीने की पद्धति है। संस्कृति के आयाम हमें यह सिखाते हैं कि भारतीय समाज किस प्रकार आध्यात्मिकता, नैतिकता और सामाजिक समरसता पर आधारित है।

2. भारतीय ज्ञान परंपरा

पुस्तक में वेद, उपनिषद, गीता, रामायण और महाभारत जैसी रचनाओं के योगदान को प्रस्तुत किया गया है। संस्कृति के आयाम यह स्पष्ट करते हैं कि भारत की ज्ञान परंपरा केवल धार्मिक नहीं बल्कि वैज्ञानिक और तर्कसंगत भी रही है।

3. प्राचीन संस्कृति का विकास

वैदिक काल की परंपराएँ

बौद्ध और जैन संस्कृति का योगदान

मौर्य और गुप्त काल का सांस्कृतिक उत्कर्ष

4. मध्यकालीन संस्कृति

इसमें भक्ति आंदोलन, सूफी संतों का योगदान, मंदिर स्थापत्य, लोककला और साहित्य की समृद्ध परंपरा का विवेचन है। संस्कृति के आयाम पुस्तक यह दर्शाती है कि कैसे इस काल में भारतीय संस्कृति में सहिष्णुता और भाईचारे का विकास हुआ।

5. आधुनिक काल में सांस्कृतिक पुनर्जागरण

सामाजिक सुधार आंदोलनों का प्रभाव

शिक्षा और आधुनिक विचारों का प्रसार

स्वतंत्रता संग्राम और सांस्कृतिक पुनर्जागरण

6. वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति

संस्कृति के आयाम यह भी दिखाते हैं कि भारतीय संस्कृति ने किस प्रकार योग, आयुर्वेद, संगीत, नृत्य और दर्शन के माध्यम से पूरी दुनिया को प्रभावित किया।

पुस्तक की विशेषताएँ

1. शोधपूर्ण दृष्टिकोण – पुस्तक लगभग 295 ग्रंथों पर आधारित है।

2. सरल भाषा – इसे हर वर्ग का पाठक आसानी से समझ सकता है।

3. प्रामाणिक स्रोत – ऐतिहासिक और सांस्कृतिक तथ्य विश्वसनीय स्रोतों से लिए गए हैं।

4. विविध विषयों का समावेश – धर्म, दर्शन, कला, साहित्य, संगीत, स्थापत्य, जीवन मूल्य आदि।

क्यों पढ़ें “संस्कृति के आयाम”?

भारतीय संस्कृति की गहराई से समझ विकसित करने के लिए।

भारतीयता और राष्ट्रीय पहचान को जानने का अवसर।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारतीय संस्कृति के महत्व को समझने के लिए।

संस्कृति के आयाम से मिलने वाले सबक
  1. धर्म और अध्यात्म का संतुलन

  2. समानता और सहिष्णुता का संदेश

  3. कला और साहित्य की महत्ता

  4. वैश्विक स्तर पर भारतीय पहचान

संस्कृति के आयाम
संस्कृति के आयाम: भारतीय संस्कृति, कला और साहित्य की सम्पूर्ण झलक

FAQs – संस्कृति के आयाम

Q1. “संस्कृति के आयाम” पुस्तक किसने लिखी है?

इस पुस्तक की लेखिका डॉ. मनोरमा मिश्रा हैं। उन्होंने लगभग 295 ग्रंथों का अध्ययन कर इसे तैयार किया है।

Q2. “संस्कृति के आयाम” पुस्तक का प्रकाशन कब और किसके द्वारा हुआ?

यह पुस्तक वर्ष 2023 में प्रकाशित हुई है और इसे नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया (NBT) ने प्रकाशित किया है।

Q3. इस पुस्तक का विमोचन किसके द्वारा किया गया था?

जनरल वी.के. सिंह (सेवानिवृत्त) ने जनवरी 2024 में इस पुस्तक का विमोचन किया।

Q4. “संस्कृति के आयाम” पुस्तक में कुल कितने पृष्ठ हैं?

इसमें लगभग 150 पृष्ठ हैं, जो सरल और संक्षिप्त रूप में भारतीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को प्रस्तुत करते हैं।

Q5. यह पुस्तक किन-किन विषयों को कवर करती है?

यह पुस्तक भारतीय ज्ञान परंपरा, दर्शन, धर्म, कला, साहित्य, स्थापत्य, संगीत, सामाजिक सुधार आंदोलन और वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति के प्रभाव जैसे विषयों को कवर करती है।

Q6. “संस्कृति के आयाम” पुस्तक किस भाषा में उपलब्ध है?

यह पुस्तक हिंदी भाषा में प्रकाशित हुई है।

Q7. क्या यह पुस्तक सामान्य पाठकों के लिए भी उपयोगी है?

हाँ, यह केवल विद्यार्थियों के लिए ही नहीं बल्कि सामान्य पाठकों के लिए भी भारतीय संस्कृति की गहराई से परिचय कराती है।

Q8. इस पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?

इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह भारतीय संस्कृति के आयाम को शोधपूर्ण और सरल भाषा में प्रस्तुत करती है, जिससे पाठक गहराई से जुड़ाव महसूस करता है।

निष्कर्ष – संस्कृति के आयाम

संस्कृति के आयाम केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का दर्पण है। इस पुस्तक के माध्यम से हमें यह समझने का अवसर मिलता है कि भारत की जड़ें कितनी गहरी हैं और यह संस्कृति कितनी बहुआयामी है। डॉ. मनोरमा मिश्रा ने अपने गहन अध्ययन और 295 ग्रंथों के आधार पर भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध पहलुओं को सरल, स्पष्ट और शोधपूर्ण भाषा में प्रस्तुत किया है।

इस पुस्तक का सबसे बड़ा योगदान यह है कि यह पाठकों को यह अहसास कराती है कि भारतीय संस्कृति सिर्फ अतीत की कहानी नहीं है, बल्कि आज और भविष्य की भी राह दिखाती है। संस्कृति के आयाम हमें सिखाते हैं कि जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक सुख-सुविधाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि नैतिकता, सहिष्णुता, करुणा और मानवता भी समान रूप से आवश्यक हैं।

इस पुस्तक से मिलने वाले महत्वपूर्ण संदेश

1. आध्यात्मिक दृष्टिकोण: भारतीय संस्कृति में धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की कला है।

2. सामाजिक समरसता: जाति, पंथ और क्षेत्रीय भेदभाव से ऊपर उठकर एकता और भाईचारे का संदेश।

3. वैश्विक पहचान: योग, आयुर्वेद, संगीत और साहित्य के माध्यम से भारतीय संस्कृति का विश्व में योगदान।

4. शोध और अध्ययन की प्रेरणा: संस्कृति के आयाम यह दर्शाती है कि भारतीय ज्ञान परंपरा को नए दृष्टिकोण से समझना कितना आवश्यक है।

आधुनिक संदर्भ में प्रासंगिकता

आज के दौर में जब पूरी दुनिया उपभोक्तावाद और भौतिकता की ओर बढ़ रही है, तब संस्कृति के आयाम हमें यह याद दिलाती है कि संतुलन और सहअस्तित्व ही वास्तविक प्रगति का मार्ग है। यह पुस्तक केवल भारत की नहीं, बल्कि पूरी मानवता की साझा धरोहर को सामने लाती है।

अंतिम विचार

यदि आप भारतीय संस्कृति की गहराई, उसके विकास, और उसकी वैश्विक प्रासंगिकता को समझना चाहते हैं, तो संस्कृति के आयाम आपके लिए एक अनिवार्य पुस्तक है। यह न केवल विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए उपयोगी है, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए भी मूल्यवान है जो अपनी जड़ों को जानना चाहता है।


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Sanjeev

Hello! Welcome To About me My name is Sanjeev Kumar Sanya. I have completed my BCA and MCA degrees in education. My keen interest in technology and the digital world inspired me to start this website, “Aajvani.com.”

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