सुनामी: 2025 में कहां आई, क्या असर हुआ, और क्या सीखा?
परिचय: क्या है सुनामी?
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Toggleसुनामी एक जापानी शब्द है जिसका अर्थ होता है “बंदरगाह की लहरें”। यह समुद्र के नीचे भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट या भूस्खलन के कारण उत्पन्न एक विशाल लहर होती है जो तटीय क्षेत्रों में भारी तबाही मचा सकती है। यह प्राकृतिक आपदा इतनी शक्तिशाली होती है कि कुछ ही मिनटों में हजारों जिंदगियाँ समाप्त कर सकती है।

सुनामी कैसे आती है?
सुनामी मुख्य रूप से समुद्र के अंदर की टेक्टोनिक प्लेट्स की हलचलों से उत्पन्न होती है। जब समुद्र तल में अचानक ऊँचाई या नीचाई आती है, तो विशाल मात्रा में पानी ऊपर की ओर उठता है, जो शक्तिशाली लहरों के रूप में समुद्र की ओर दौड़ता है।
प्रमुख कारण:
- भूकंप (Earthquake)
- ज्वालामुखी विस्फोट (Volcanic Eruption)
- पानी के नीचे भूस्खलन (Submarine Landslide)
- उल्का पिंडों का समुद्र में गिरना (Meteorite Impact)
सुनामी की वैज्ञानिक प्रक्रिया
सुनामी बनने की प्रक्रिया को 4 चरणों में बाँटा जा सकता है:
1️⃣ उत्पत्ति (Generation)
समुद्र के नीचे प्लेटों के खिसकने से अचानक ऊर्जा निकलती है।
2️⃣ प्रसार (Propagation)
ऊर्जा से उत्पन्न लहरें हर दिशा में फैलती हैं। समुद्र के अंदर यह बहुत तेजी से चलती हैं — लगभग 800 किमी/घंटा तक।
3️⃣ संपीड़न (Compression near shore)
तट के पास आते ही गहराई कम होने लगती है जिससे लहरों की ऊँचाई बहुत बढ़ जाती है।
4️⃣ प्रहार (Impact)
सुनामी की लहरें ज़मीन से टकराकर सबकुछ बहा ले जाती हैं।
🔷 सुनामी के लक्षण: पहचान कैसे करें?
- समुद्र अचानक पीछे हटना
- ज़मीन कांपना या भूकंप का आभास
- समुद्र से अजीब आवाज़ें आना
- जानवरों का तटीय क्षेत्रों से पलायन
🔷 सुनामी के प्रभाव
सुनामी के प्रभाव अत्यंत भयानक होते हैं:
जनहानि
हजारों लोगों की जान कुछ मिनटों में जा सकती है।
पर्यावरणीय क्षति
खारे पानी की वजह से भूमि बंजर हो जाती है।
सम्पत्ति का नुकसान
इमारतें, सड़कें, पुल सब कुछ बह जाते हैं।
बीमारियाँ
जलजनित रोग जैसे हैजा, डेंगू आदि फैलते हैं।
🔷 सुनामी की प्रमुख घटनाएं
2004 भारतीय महासागर की सुनामी
तारीख: 26 दिसंबर 2004
भूकंप की तीव्रता: 9.1
देश प्रभावित: भारत, इंडोनेशिया, श्रीलंका, थाईलैंड
मृत्यु: 2,30,000+ लोग
इसे अब तक की सबसे विनाशकारी सुनामी में गिना जाता है।
2011 जापान की सुनामी
तारीख: 11 मार्च 2011
भूकंप की तीव्रता: 9.0
परमाणु संकट: फुकुशिमा प्लांट प्रभावित
मृत्यु: 15,000+
🔷 भारत में सुनामी की संभावना
भारत तीन तरफ से समुद्र से घिरा हुआ है।
विशेष रूप से अंडमान-निकोबार, तमिलनाडु, ओडिशा, और आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्र सुनामी के उच्च जोखिम वाले ज़ोन माने जाते हैं।
🔷 सुनामी की रोकथाम और तैयारी
सुनामी को रोका नहीं जा सकता, लेकिन प्रभाव को कम किया जा सकता है।
पूर्व चेतावनी प्रणाली (Tsunami Warning System)
सेटेलाइट, ब्यूॉय सेंसर और भूकंप मॉनिटरिंग से समय रहते अलर्ट मिलते हैं।
जागरूकता और अभ्यास
स्कूल, ऑफिसों और गाँवों में tsunami ड्रिल कराना चाहिए।
तटीय बफर जोन
मैंग्रोव पौधों और कृत्रिम दीवारों से tsunami की लहरें कमजोर की जा सकती हैं।

🔷 भारत सरकार द्वारा किए गए प्रयास
Indian National Centre for Ocean Information Services (INCOIS) की स्थापना
Tsunami Early Warning Centre (TEWC) हैदराबाद में स्थित
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा दिशा-निर्देश जारी
🔷 tsunami से बचाव के उपाय
- ऊँचाई वाले स्थानों की ओर भागें
- समुद्र के पास ना रुकें
- रेडियो या मोबाइल के जरिए अलर्ट सुनते रहें
- नाविक समुद्र की गहराई में चले जाएं
- आपातकालीन किट साथ रखें
🔷 सुनामी और जलवायु परिवर्तन
हालांकि सुनामी मुख्यतः भूगर्भीय कारणों से होती है, लेकिन जलवायु परिवर्तन के चलते समुद्र स्तर में वृद्धि हो रही है, जिससे भविष्य में सुनामी का प्रभाव और अधिक खतरनाक हो सकता है।
🔷 tsunami से संबंधित रोचक तथ्य
tsunamiकी लहरें कभी-कभी 100 फीट से भी ऊँची होती हैं।
समुद्र में यह इतनी तेज होती हैं कि इन्हें जहाजों से महसूस नहीं किया जा सकता।
जापान में सबसे अधिक tsunami आती हैं।
नवीनतम tsunami अपडेट – भूमध्य से प्रशांत तक
मुख्य घटना
दिनांक: 30 जुलाई 2025 को, रूस के कमचटका प्रायद्वीप के पूर्वी तट से लगभग 8.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया (शैलो डेप्थ ~19.3 कि.मी।)
इसे इस क्षेत्र में 1952 के बाद का सबसे ताकतवर भूकंप बताया गया है .
सुनामी की लहरें
रूस की कुरिल द्वीपसमूह और कमचटका तटों पर 4 मीटर तक ऊँची लहरें आ चुकी हैं, जिससे स्थानीय नुकसान और चोट़ें हुई हैं .
जापान, विशेष रूप से होक्काइडो और अन्य तटीय नगरों में छोटी लहरें (30–40 सेमी) दर्ज की गईं, लेकिन बड़े खतरों से सचेत रहने को कहा गया है .
चेतावनियाँ और बचाव
कई देशों में tsunami वॉर्निंग/एडवाइजरी जारी हुई:
जापान: 133 नगर पालिकाओं में 9 लाख से अधिक लोगों को खाली करने का अलर्ट
संयुक्त राज्य अमेरिका: हवाई, अलास्का, कैलिफोर्निया, ओरेगन, वाशिंगटन तटवर्ती क्षेत्रों में चेतावनी-घंटी बजे, हवाई में तत्काल खतरों का सामना करना पड़ा
न्यूजीलैंड, कनाडा, फिलीपींस, इंडोनेशिया सहित प्रशांत क्षेत्र में भी अलर्ट जारी किए गए
भारत में स्थिति: कोई खतरा नहीं
INCOIS (Indian National Centre for Ocean Information Services) ने स्पष्ट किया है कि इस भूकंप के संबंध में भारत या हिंद महासागर क्षेत्र को कोई tsunami खतरा नहीं है .
भारतीय तटवर्ती क्षेत्रों पर कोई अलर्ट नहीं है और स्थिति पूरी तरह से सुरक्षित बताई गई है .
भारतीय नागरिकों के लिए सलाह (विदेश में)
संयुक्त राज्य अमेरिका स्थित भारतीय नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे:
स्थानीय आपात प्रबंधन एजेंसियों और अमेरिकी tsunami चेतावनी प्रणालियों को सक्रिय रूप से फॉलो करें
tsunami अलर्ट आने पर तुरंत ऊँचे स्थलों पर चले जाएँ
तटवर्ती क्षेत्रों से दूर रहें
निष्कर्ष: tsunami – सतर्कता ही सुरक्षा है
सुनामी एक अत्यंत विनाशकारी प्राकृतिक आपदा है जो समुद्र के नीचे अचानक हुई भूगर्भीय हलचलों से उत्पन्न होती है। इसका प्रभाव इतना शक्तिशाली होता है कि यह कुछ ही मिनटों में तटीय क्षेत्रों को तबाह कर सकती है।
हाल की घटनाएं, जैसे जुलाई 2025 में रूस के कमचटका तट पर आए 8.8 तीव्रता के भूकंप से उत्पन्न tsunami, यह दर्शाती हैं कि यह खतरा अभी भी जीवित है और वैश्विक स्तर पर सतर्कता की आवश्यकता है।
हालाँकि, भारत जैसे देशों ने समय रहते INCOIS और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के माध्यम से tsunami चेतावनी प्रणाली को विकसित किया है, जिससे जनहानि को कम किया जा सकता है।
विश्व के तटीय देशों को चाहिए कि वे पूर्व चेतावनी प्रणाली, जागरूकता अभियान और आपातकालीन बचाव योजनाओं को हमेशा सक्रिय रखें।
याद रखें:
प्राकृतिक आपदाओं को रोका नहीं जा सकता, लेकिन जागरूकता और तैयारी से उसके प्रभाव को ज़रूर कम किया जा सकता है।
इसलिए, हमें चाहिए कि हम tsunami जैसी आपदाओं से सतर्क रहें, वैज्ञानिक सूचनाओं पर विश्वास करें, और समय रहते आवश्यक कदम उठाएँ — यही असली सुरक्षा है।
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