Anasakti Ashram: आत्मा की शांति और गांधीजी के विचारों की जीवंत अनुभूति!
प्रस्तावना: प्रकृति, शांति और इतिहास का संगम
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Toggleआशा, शांति और आत्मनिरीक्षण की यात्रा पर निकलते समय, कभी-कभी एक जगह ऐसी मिल जाती है जो आपकी आत्मा को छू लेती है और इतिहास की गूँज सुनाती है। Anasakti Ashram (अक्सर “गांधी आश्रम” के नाम से जाना जाता है) भी ऐसी ही जगह है। कौसानी की हरी-भरी वादियों में स्थित यह आश्रम, महात्मा गांधी द्वारा 1929 में अनासक्ति योग पर चिंतन और लेखनस्थल के रूप में 14 दिन बिताने की वजह से विशेष महत्व रखता है ।

गांधीजी ने इसे “भारत का स्विट्जरलैंड” कहा क्योंकि यहाँ के हिमालय दर्शन और प्राकृतिक सौंदर्य ने उन्हें मंत्रमुग्ध कर दिया । आज यह आश्रम न सिर्फ एक स्मृति स्थल है, बल्कि अध्ययन‑अनुसंधान केंद्र, ध्यानस्थल और आध्यात्मिक शरण भी है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और नामकरण
1. 1929 में गांधीजी का आगमन
– जून 1929 में, महात्मा गांधी हिमालय की ताज़गी और शांति को महसूस करने हेतु कौसानी आए थे। इसमें दो दिन का प्रारंभिक समय था, लेकिन सौंदर्य से प्रभावित होकर उन्होंने 14 दिन यहाँ बिताए ।
– यहाँ उन्होंने “अनासक्ति योग” पर आधारित गीता‑अनासक्ति‑योग की रचना पूरी की—जिस कारण आश्रम का नामकरण ‘अनासक्ति आश्रम’ हुआ ।
2. स्थापना और सरला बेन का योगदान
– भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की अग्रिम महिला सरला बेन ने इस आश्रम की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।
– बाद में यह बंगले के रूप में उपयोग होता था, जिसे तत्कालीन यूपी सीएम सुचेता कृपलानी ने उत्तर प्रदेश गांधी स्मारक निधि को हस्तांतरित किया ।
वास्तुकला एवं फैसिलिटीज़
संरचनात्मक सौंदर्य और व्यवस्था
– एक साधारण, सफेद दीवारों और लाल-छत वाली इमारत जो हिमालय की गोद में सीधी सादगी के साथ खड़ी है।
– आश्रम में सात-बारह कमरे उपलब्ध हैं, जहाँ शोधार्थी और साधक ठहर सकते हैं ।
– एक लायब्रेरी जिसमें गांधीजी की पुस्तकों का समुचित संग्रह उपलब्ध है ।
– खुला लाउंज, बैठने वाली बालकनी और मंदिर जैसी प्रार्थना कक्ष—यहां प्रतिदिन सुबह एवं शाम ध्यान-प्रार्थना आयोजित होती है ।
संग्रहालय और दीवारें
– दीवारों पर गांधीजी के सूक्तियाँ और पत्र, जो उनके दृष्टिकोणों को जीवंत अनुभव कराते हैं ।
– संग्रहालय में गांधीजी की तस्वीरें, लिखावट और उनके प्रयुक्त कुछ सामान प्रदर्शित हैं ।
– एक छोटी बुकशॉप भी है जहाँ गांधी से जुड़ी पुस्तकें मिलती हैं ।
आध्यात्मिक और शैक्षिक गतिविधियां
– दैनिक प्रार्थना: सुबह और शाम नियमित रूप से आयोजित होती है, जहाँ आम आगंतुक भी सम्मिलित हो सकते हैं ।
– अध्ययन‑अनुसंधान: यह गांधी दर्शन और अनासक्ति योग के अध्ययन के लिए एक केंद्र है ।
– ध्यान और आत्मनिरीक्षण: शांति से घिरी बुकलाइस एम्बियंस में ध्यान-प्रार्थना का आनंद लिया जा सकता है।
प्राकृतिक छटा और हिमालय दर्शन
सूर्यास्त और सूर्योदय के दृश्य
– सुबह के प्रथम प्रकाश में हिमालयी चोटियाँ—नंदा देवी, त्रिशूल, पंचाचुली आदि—सोने जैसी चमक लिए दिखाई देती हैं ।
– शाम के सुनहरे सुरजास्त में घाटी और आसमान का मधुर नखल मिलता है, जिसे अक्सर आप “स्विट्जरलैंड ऑफ़ इंडिया” कहते Gandhi जी ने खुद इस दृश्य को खुलकर सराहा ।
परिवेश और आर ambiance
– हिमालय का स्वच्छ वायु और शांत प्रकृति का वातावरण यहाँ की खास विशेषता है ।
– पक्षियों का कलरव, ताजी हवा और सुस्त प्रवाह मानो आत्मा को विश्राम प्रदान करता है।
सुविधाएँ और यात्रा मार्ग
विषय विवरण
ठहरने की व्यवस्था लगभग 24 कमरे, साधारण लेकिन आत्मिक आवास
पुस्तकलाय और रसोई स्वयं सहायता रसोई और अध्ययन हेतु पुस्तकालय
प्रार्थना सभा सुबह-सुबह और शाम को दैनिक प्रार्थना
प्रवेश शुल्क नि:शुल्क या कम शुल्क, ऑनलाइन या पत्र-आधारित आरक्षण संभव
समय सुबह 06:00–07:00 AM, शाम 06:00–07:00 PM (स्थानीय बदलाव संभव)
यातायात मार्ग
– बस: कौसानी बस स्टैंड से लगभग 1 किमी पैदल यात्रा ।
– रेलवे: निकटतम स्टेशन: काठगोदाम (135 किमी) ।
– हवाई अड्डा: देहरादून (जॉली ग्रांट) ~170 किमी, पंतनगर ~171 किमी ।
आसपास के आकर्षण
1. सुमित्रानंदन पंत संग्रहालय – कवि की जीवनियाँ और साहित्य दर्शन
2. लक्ष्मी आश्रम – महिला सशक्तिकरण और शिक्षा का केंद्र
3. श्री सोमेश्वर महादेव मंदिर – धार्मिक तीर्थस्थल
- रुद्रधानी जलप्रपात और महादेव मंदिर, कौसानी चाय बागान, स्टारस्केप्स वेधशाला ।
यात्रा सुझाव और नजर रखने योग्य बातें
बेस्ट सीजन: मार्च से जून तथा सितंबर से नवंबर तक मौसम अनुकूल व दृश्य-उत्तम ।
परिधान: ठंड में गर्म कपड़े आवश्यक, दिन में हल्के और शाम को थंडा महसूस होता है।
साझेदारी: फोन या मेल द्वारा पहले बुकिंग बेहतर—आपके दस्तक से बिना एडवांस ₹450/रात भुगतान संभव ।
प्रार्थना में सम्मिलन: सुबह‑शाम विद्यालयीन रूप से आयोजित होता है, आगंतुकों को आमंत्रित किया जाता है ।
गंदे व्यवहार से बचें: मद्य, मांस आदि भावनापूर्ण गतिविधियों से परहेज़ रखना होता है ।
Anasakti Ashram का सार – जीवन को देखने का गांधीवादी दृष्टिकोण
“अनासक्ति” शब्द का अर्थ है – किसी भी चीज़ से बांधकर न रहना, फिर चाहे वह व्यक्ति हो, वस्तु हो या विचार।
गांधीजी के अनुसार:
“कर्म करते रहना, लेकिन फल की अपेक्षा नहीं करना – यही अनासक्ति है।”
यह दर्शन भगवद गीता से निकला हुआ है और गांधीजी की आत्मिक प्रगति का आधार बना। उन्होंने अनासक्ति योग को केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति का भी औजार माना।
Anasakti Ashram में ठहरने का अनुभव – एक दिनचर्या का वर्णन
यहाँ ठहरना सिर्फ आवास लेना नहीं होता, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुशासन से जुड़ना होता है। आइए देखें कि एक साधक या आगंतुक का पूरा दिन कैसा बीतता है:
सुबह 5:30 AM – सूर्योदय और हिमालय दर्शन
– जैसे ही सूरज की पहली किरण हिमालय की बर्फीली चोटियों पर पड़ती है, आपको एक अलौकिक अहसास होता है।
– बालकनी में बैठकर “त्रिशूल”, “नंदा देवी” और “पंचाचुली” की चोटियाँ स्वर्णिम हो जाती हैं।
सुबह 6:00 AM – सामूहिक प्रार्थना
– प्रार्थना कक्ष में सभी आगंतुक एकत्रित होकर बापू के पसंदीदा भजनों (“वैष्णव जन तो…”) और शांति मंत्रों के साथ दिन की शुरुआत करते हैं।
सुबह 7:00 AM – चाय और आत्ममंथन
– आश्रम की रसोई से साधारण नींबू-शहद या तुलसी की चाय मिलती है।
– इसके बाद कुछ समय योग या ध्यान के लिए रखा जा सकता है।
सुबह 9:00 AM – पुस्तकालय अध्ययन
– यदि आप शोधार्थी हैं, तो गाँधी साहित्य, गीता, उपनिषद, और स्वराज संबंधी दुर्लभ पुस्तकों का अध्ययन कर सकते हैं।
– पुस्तकालय में गांधीजी के हस्तलिखित पत्रों की प्रतियां भी उपलब्ध हैं।
दोपहर 1:00 PM – भोजन
– साधारण सात्विक भोजन जिसमें दलिया, खिचड़ी, मौसमी सब्ज़ी और छाछ दी जाती है।
– सभी आगंतुक भोजन कक्ष में एक साथ बैठकर शांत वातावरण में भोजन करते हैं।
शाम 4:00 PM – ध्यान या परिसर भ्रमण
– आप Anasakti Ashram परिसर में टहल सकते हैं या गांधीजी के निवास कक्ष, प्रार्थना स्थल, या बगीचे का अवलोकन कर सकते हैं।
शाम 6:00 PM – संध्या प्रार्थना
– यह दिन का सबसे शांतिपूर्ण क्षण होता है। धीमे भजनों के साथ वातावरण में शांति की अनुभूति होती है।
रात 8:00 PM – विश्राम
– कोई टीवी, मोबाइल, शोरगुल नहीं – सिर्फ आत्मचिंतन और विश्राम।
स्थानीय ग्रामीण संस्कृति से संपर्क
Anasakti Ashram में रहते हुए, आप आस-पास के गांवों से भी जुड़ सकते हैं:
स्थानीय पहाड़ी लोकगीतों का आनंद
कौसानी के हस्तशिल्प – ऊनी वस्त्र, हस्तनिर्मित चाय, लकड़ी की कलाकृतियाँ
ग्राम भ्रमण (Village Walks) – जहाँ आप उत्तराखंडी संस्कृति को करीब से देख सकते हैं।
यह अनुभव सिर्फ पर्यटन नहीं, एक सामाजिक व सांस्कृतिक अध्ययन बन जाता है।
विशेष कार्यक्रम और शिविर
हर वर्ष यहाँ कुछ विशिष्ट कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं:
कार्यक्रम का नाम विवरण
गांधी जयंती (2 अक्टूबर) विशेष प्रार्थना, भाषण, भजन, और बच्चों के लिए प्रतियोगिताएँ
अनासक्ति शिविर 3 से 5 दिन का योग-ध्यान, गांधी दर्शन और ग्रामीण विकास पर चर्चा
अध्ययन-अनुभव शिविर शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए गाइडेड अध्ययन सत्र
यदि आप NGO या शैक्षणिक संस्था से हैं, तो ग्रुप बुकिंग कर विशेष शिविर का आयोजन संभव है।

डिजिटल सुविधा और आधुनिक आवश्यकता
हालाँकि आश्रम मुख्य रूप से “डिजिटल डिटॉक्स” के उद्देश्य से बना है, फिर भी कुछ मूलभूत सुविधाएँ हैं:
Wi-Fi – सीमित उपयोग हेतु
चार्जिंग पॉइंट्स – सभी कमरों में
बुकिंग / फॉर्म्स ऑनलाइन – ऑफिशियल साइट के माध्यम से
फोटोग्राफी अनुमति – बिना फ्लैश और केवल बाहरी परिसर में
Anasakti Ashram का आध्यात्मिक प्रभाव – जीवन में बदलाव की प्रेरणा
Anasakti Ashram केवल इतिहास या भवन नहीं, यह एक आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत है। यहाँ आकर कई लोगों के जीवन में गहरा बदलाव हुआ है। आइए जानते हैं कैसे:
1. सामाजिक कार्यों की ओर प्रेरणा
– यहाँ रहकर बहुत से युवाओं को रचनात्मक सेवा की प्रेरणा मिली—जैसे ग्रामीण शिक्षा, स्वदेशी वस्त्र निर्माण, जैविक खेती आदि।
– गांधीजी का “सादा जीवन, उच्च विचार” इस स्थान पर सिर्फ पढ़ा नहीं, जीया जाता है।
2. सहनशीलता और अहिंसा का अभ्यास
– यहाँ की जीवनशैली में शारीरिक श्रम, स्वच्छता, साझा भोजन, और अहिंसक व्यवहार को महत्व दिया जाता है।
– यह विचार व्यक्ति को मानवीयता के मूल में ले जाता है, जहाँ ‘मैं’ नहीं ‘हम’ होता है।
गांधीजी के विचार जो दीवारों पर लिखे हैं – वे क्या सिखाते हैं?
Anasakti Ashram की दीवारें बोलती हैं, कुछ ऐसे सुविचारों के माध्यम से जो गांधीजी ने कहे थे:
“स्वतंत्रता बाहरी नहीं, आत्मा की अवस्था है।”
“अनासक्ति का अर्थ है – सेवा करते समय फल की अपेक्षा न रखना।”
“खुद को बदलो, दुनिया बदल जाएगी।”
“सच्चा धर्म वह है जो हमें भीतर से शांत बनाए।”
इन विचारों को हर दिन देखना और जीना, हमारे व्यवहार में परिवर्तन लाता है।
गीता और अनासक्ति – गांधीजी का दृष्टिकोण
गांधीजी ने अनासक्ति योग पर श्रीमद्भगवद्गीता के आधार पर एक अद्भुत पुस्तक लिखी थी—जिसे यहीं कौसानी में पूर्ण किया गया।
उनकी मान्यता थी:
“गीता हमें कर्म करने को कहती है, लेकिन बिना आसक्ति के। यही हमारा जीवन दर्शन बनना चाहिए।”
मुख्य बातें जो गांधीजी ने गीता से सीखी:
कर्तव्य करना धर्म है
फल की चिंता छोड़ना मुक्ति है
आत्मा अजर-अमर है, उसे कोई हानि नहीं
सेवा ही सच्चा योग है
कौसानी और Anasakti Ashram – एक साथ मिलकर संपूर्ण अनुभव
यदि आप Anasakti Ashram आ रहे हैं, तो आप कौसानी टाउन को भी जानेंगे, जो खुद में:
प्रकृति प्रेमियों के लिए Mini Switzerland है
साहित्य प्रेमियों के लिए सुमित्रानंदन पंत की जन्मभूमि है
ध्यान चाहने वालों के लिए सुपर शांत स्थल है
चाय प्रेमियों के लिए कौसानी टी एस्टेट्स हैं—जहाँ आप Organic Tea टेस्ट कर सकते हैं
निष्कर्ष: Anasakti Ashram – जहाँ गांधीजी के विचार आज भी जीवित हैं
Anasakti Ashram , कौसानी न केवल एक पर्यटन स्थल है, बल्कि यह आत्मा की यात्रा का एक पड़ाव है। यह वह स्थान है जहाँ:
महात्मा गांधी ने गीता के ‘अनासक्ति योग’ को केवल समझा नहीं, स्वयं जिया।
हिमालय की गोद में शांति, साधना और स्वराज का दर्शन समाहित है।
दीवारें बोलती हैं, और हर कोना इतिहास की कहानी कहता है।
आधुनिक जीवन की भागदौड़ से दूर, एक सच्चे ‘डिजिटल डिटॉक्स’ और आत्म-निर्माण का अवसर मिलता है।
यहाँ का हर दिन आपको भीतर से निखारता है, सोच को दिशा देता है, और सादगी में शक्ति का अनुभव कराता है। गांधीजी का यह वाक्य कि “अनासक्ति सेवा का प्राण है” – यहाँ आकर सही मायनों में समझ आता है।
Frequently Asked Questions (FAQs) – Anasakti Ashram , कौसानी
Q1. Anasakti Ashram कहाँ स्थित है?
उत्तर: Anasakti Ashram उत्तराखंड राज्य के बागेश्वर ज़िले में स्थित कौसानी नामक हिल स्टेशन पर स्थित है। यह समुद्र तल से लगभग 1890 मीटर की ऊँचाई पर है और हिमालय की प्रसिद्ध चोटियों जैसे नंदा देवी, त्रिशूल और पंचाचुली का अद्भुत दृश्य प्रदान करता है।
Q2.Anasakti Ashram का नाम ‘अनासक्ति’ क्यों है?
उत्तर: महात्मा गांधी ने 1929 में कौसानी में रहते हुए श्रीमद्भगवद्गीता पर आधारित ‘अनासक्ति योग’ पर एक पुस्तक लिखी थी। उन्होंने सेवा, त्याग और बिना फल की इच्छा के कर्म की जो व्याख्या की, वही ‘अनासक्ति’ कहलाती है। उसी आधार पर इस आश्रम का नाम रखा गया।
Q3. क्या Anasakti Ashram में ठहरने की सुविधा है?
उत्तर: हाँ, Anasakti Ashram में आगंतुकों और शोधार्थियों के लिए साधारण लेकिन शांतिपूर्ण कमरे उपलब्ध हैं। इनमें लगभग 20-24 कमरे होते हैं। पहले से बुकिंग करना बेहतर होता है।
Q4. क्या Anasakti Ashram में भोजन की व्यवस्था है?
उत्तर: जी हाँ, आश्रम में स्वयं सहायता रसोई (Self-cooking kitchen) और सामूहिक भोजन की सुविधा होती है। भोजन सात्विक, शुद्ध और साधारण होता है – जैसे खिचड़ी, रोटी, सब्ज़ी, दाल आदि।
Q5. Anasakti Ashram में प्रतिदिन प्रार्थना होती है क्या?
उत्तर: हाँ, प्रतिदिन सुबह और शाम प्रार्थना सभा आयोजित होती है, जिसमें गांधीजी के प्रिय भजन गाए जाते हैं और आगंतुकों को भी शामिल होने का अवसर मिलता है।
Q6. Anasakti Ashram की यात्रा के लिए सबसे उपयुक्त समय कौन सा है?
उत्तर: Anasakti Ashram की यात्रा के लिए मार्च से जून और सितंबर से नवंबर का समय सबसे उपयुक्त है। इस दौरान मौसम साफ होता है और हिमालयी दृश्यों का आनंद लिया जा सकता है।
Q7. क्या यहाँ Wi-Fi या इंटरनेट सुविधा है?
उत्तर: हाँ, सीमित रूप में Wi-Fi की सुविधा उपलब्ध है। लेकिन आश्रम में डिजिटल डिटॉक्स को प्रोत्साहन दिया जाता है, इसलिए इंटरनेट का अत्यधिक प्रयोग discouraged है।
Q8. Anasakti Ashram जाने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन कौन-सा है?
उत्तर: सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम (Haldwani के पास) है, जो कौसानी से लगभग 135 किलोमीटर दूर है।
Q9. क्या Anasakti Ashram में फोटोग्राफी की अनुमति है?
उत्तर: बाहरी परिसर में सीमित फोटोग्राफी की अनुमति है। आश्रम के अंदरूनी हिस्सों और प्रार्थना कक्ष में फोटोग्राफी निषिद्ध होती है, जिससे वहाँ की पवित्रता बनी रहे।
Q10. क्या परिवार के साथ यहाँ आना उचित है?
उत्तर: बिल्कुल। यह स्थान पूरी तरह शांत, सुरक्षित और पारिवारिक है। यहाँ बच्चे भी प्रकृति और गांधीजी के विचारों से प्रेरित हो सकते हैं।
Q11. Anasakti Ashram में कितने दिन रुक सकते हैं?
उत्तर: आमतौर पर 2 से 7 दिन का प्रवास उपयुक्त माना जाता है। अध्ययन, साधना या शोध हेतु आने वाले व्यक्ति विशेष अनुमति से अधिक दिन भी रह सकते हैं।
Q12. क्या विदेशी नागरिकों को यहाँ ठहरने की अनुमति है?
उत्तर: हाँ, लेकिन उन्हें पहले से अनुमति लेनी होती है और एक वैध पहचान पत्र (पासपोर्ट/वीसा) प्रस्तुत करना होता है।
Q13. क्या यहाँ समूह बुकिंग की जा सकती है?
उत्तर: हाँ, NGOs, स्कूल, कॉलेज या शोध समूहों के लिए विशेष बुकिंग की सुविधा है। इसके लिए पहले से संपर्क कर अनुमति प्राप्त करनी होती है।
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