AYUSH Scheme in UP: 100-बेड वाले वेलनेस सेंटर से मिलेगी मुफ्त प्राकृतिक चिकित्सा!
प्रस्तावना: जब परंपरा और आधुनिकता का मेल होता है
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Toggleस्वास्थ्य केवल शरीर की बीमारी का इलाज नहीं, बल्कि मन, आत्मा और समाज की समग्र उन्नति का दर्पण होता है। जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह घोषणा की कि हर जिले में 100-बेड का AYUSH हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर स्थापित किया जाएगा, तब यह केवल एक चिकित्सा पहल नहीं थी — यह एक संस्कृतिक पुनर्जागरण की शुरुआत थी।

AYUSH का परिचय: आयुर्वेद से आत्मा तक
AYUSH शब्द भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का प्रतिनिधित्व करता है:
A – आयुर्वेद
Y – योग
U – यूनानी
S – सिद्ध
H – होम्योपैथी
ये न सिर्फ़ बीमारियों का उपचार करते हैं, बल्कि व्यक्ति को मानसिक और आत्मिक रूप से भी स्वस्थ बनाते हैं।
क्यों ज़रूरी है यह पहल?
बदलती जीवनशैली, बढ़ती बीमारियाँ
आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में:
तनाव, उच्च रक्तचाप, मधुमेह जैसी बीमारियाँ बढ़ रही हैं।
लोग एलोपैथिक दवाओं के साइड इफेक्ट से परेशान हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएँ सुलभ नहीं हैं।
AYUSH पद्धति इन सभी समस्याओं का समाधान देती है — बिना दुष्प्रभाव, सहज, और सस्ती।
ग्रामीण भारत के लिए नई उम्मीद
इस परियोजना से:
ग्रामीण जनता को स्थानीय स्तर पर आयुर्वेदिक और प्राकृतिक चिकित्सा मिलेगी।
स्वास्थ्य के साथ-साथ रोज़गार, कृषि और शिक्षा का भी विस्तार होगा।
इन 100-बेड सेंटर में क्या होगा विशेष?
बहुआयामी सेवाएँ
आयुर्वेदिक इलाज (पंचकर्म, बस्ती, वमन आदि)
योग और प्राणायाम सत्र
प्राकृतिक चिकित्सा (नेचुरोपैथी)
होम्योपैथिक क्लीनिक
यूनानी चिकित्सा परामर्श
मानसिक स्वास्थ्य के लिए ध्यान केंद्र
आधुनिक सुविधाओं से लैस
डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड
हाई-क्वालिटी आयुर्वेदिक औषधालय
प्रशिक्षित डॉक्टर और योगाचार्य
आयुर्वेदिक डाइट किचन
ट्रेनिंग और रिसर्च विंग
शिक्षा और अनुसंधान को मिलेगा बल
मुख्यमंत्री योगी जी ने स्पष्ट किया कि यह केवल सेवा नहीं, बल्कि शोध और शिक्षा का भी केंद्र होगा। इससे जुड़े लाभ:
आयुष विश्वविद्यालयों से जुड़ाव
स्टूडेंट्स को क्लिनिकल एक्सपोज़र
मेडिकल रिसर्च को बढ़ावा
मेडिसिनल प्लांट्स की खेती और प्रयोग
किसानों और युवाओं के लिए अवसर
औषधीय पौधों की खेती
तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा जैसे पौधों की खेती को बढ़ावा
किसानों को उचित मूल्य
जैविक खेती की ओर प्रोत्साहन
युवाओं के लिए रोजगार
योग ट्रेनर
पंचकर्म तकनीशियन
मेडिकल असिस्टेंट
रिसेप्शन/प्रशासनिक स्टाफ
आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल
यह योजना आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम है:
स्वदेशी औषधियों का उत्पादन और उपयोग
लोक चिकित्सा का वैज्ञानिककरण
भारतीय ज्ञान परंपरा का पुनरुद्धार
समाज पर संभावित असर
प्रभाव विवरण
स्वास्थ्य सस्ती, प्रभावशाली और सुलभ चिकित्सा
अर्थव्यवस्था किसानों और युवाओं के लिए नए अवसर
शिक्षा आयुष छात्रों को प्रयोगात्मक शिक्षा
संस्कृति योग, ध्यान, और आयुर्वेद को सामाजिक जीवन में जगह
चुनौतियाँ क्या होंगी?
प्रशिक्षित स्टाफ की कमी
हल: सरकारी ट्रेनिंग संस्थान, PPP मॉडल से निजी सहभागिता।
गुणवत्ता नियंत्रण
हल: सेंट्रल आयुष गाइडलाइंस, रेटिंग प्रणाली।
जनजागरूकता की कमी
हल: जनसंपर्क अभियान, स्कूलों में हेल्थ एडुकेशन।
भविष्य की दिशा: उत्तर प्रदेश से भारत तक
इस मॉडल को पूरे देश में अपनाया जा सकता है:
हर राज्य में आयुष क्लस्टर
मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा
WHO मानकों के अनुरूप प्रमाणन
बजट और वित्तीय निवेश: सरकारी प्रतिबद्धता का प्रमाण
कुल बजट अनुमान
उत्तर प्रदेश सरकार ने हर 100-बेड वाले AYUSH केंद्र के लिए औसतन ₹50–75 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान लगाया है।
75 जिलों के लिए कुल प्रारंभिक खर्च ₹5000 करोड़ के आसपास अनुमानित।
धन के स्रोत
राज्य योजना निधि
केंद्र सरकार के AYUSH मिशन (NAM) से सहायता
विश्व बैंक और ADB जैसे संस्थानों से स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए ऋण व अनुदान।
बजट में प्राथमिकताएं
श्रेणी अनुमानित खर्च (प्रति केंद्र)
भूमि और भवन ₹20 करोड़
चिकित्सा उपकरण ₹10 करोड़
मानव संसाधन ₹15 करोड़
हर्बल बागवानी और रिसर्च लैब ₹5 करोड़
AYUSH पद्धतियों की विशेषताएं और लाभ
पंचकर्म
शरीर को विषमुक्त करने की 5 प्रक्रियाएँ (वमन, विरेचन, बस्ती, नस्य, रक्तमोक्षण)।
डायबिटीज, गठिया, थकान, तनाव जैसे रोगों में अत्यंत लाभकारी।
क्षारसूत्र विधि
पाइल्स, फिस्टुला जैसी बीमारियों में सर्जरी के बिना शुद्धिकरण।
यूपी में इसे अब मेडिकल कॉलेजों में भी सम्मिलित किया जा रहा है।
योग और ध्यान
मानसिक स्वास्थ्य, थायरॉइड, ब्लड प्रेशर, अवसाद में लाभ।
सरकारी स्कूलों और दफ्तरों में नियमित योग कार्यक्रम प्रस्तावित।
यूनानी एवं होम्योपैथी
यूनानी प्रणाली के सिद्धांतों में शरीर का “मिज़ाज” (temperament) संतुलन।
होम्योपैथी में “like cures like” सिद्धांत से रोगों का मूल उपचार।
वेलनेस सेंटर्स का डिज़ाइन और सेवाएँ
डिज़ाइन विशेषताएं
ईको-फ्रेंडली निर्माण, हर्बल गार्डन, योग हॉल, पंचकर्म खंड।
पुरुष–महिला मरीजों के लिए अलग-अलग पथ्य विभाग।
मुख्य सेवाएं
सेवा विवरण
ओपीडी 6 प्रकार की चिकित्सा पद्धतियाँ
IPD (100 बिस्तर) पंचकर्म, नाड़ी परीक्षण, पथ्य
लैब प्राकृतिक परीक्षण, निदान प्रणाली
योग थैरेपी प्रतिदिन सुबह/शाम
स्वास्थ्य परामर्श आहार, मानसिक स्वास्थ्य
औषध भंडार आयुष मान्य दवाइयाँ
स्वास्थ्य सुधार में संभावित परिवर्तन
Non-communicable diseases में राहत
BP, Diabetes, Obesity में प्राकृतिक चिकित्सा का प्रभाव वैज्ञानिक रूप से सिद्ध।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आयुष OPD में इलाज कराने वाले 30% रोगी एलोपैथी से आयुष की ओर शिफ्ट हो रहे हैं।
Preventive Healthcare को बढ़ावा
रोग से पहले बचाव की संस्कृति विकसित करना।
स्कूलों में ‘स्वस्थ बालक–स्वस्थ भारत’ योजना के तहत योग कक्षाएं।
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांति
पंचायत स्तर तक मोबाइल AYUSH वैन प्रस्तावित।
हर ब्लॉक में एक छोटा पंचायत AYUSH क्लिनिक।
सामाजिक जागरूकता अभियान
जागरूकता रथ और अभियान
जिलों में “AYUSH जागरूकता रथ” निकाले जाएंगे जो ग्रामीणों को पंचकर्म, योग, औषधीय पौधों की जानकारी देंगे।
स्कूल–कॉलेज स्तर पर कार्यक्रम
“AYUSH क्लब” की शुरुआत से छात्र-छात्राओं को योग व आयुर्वेद से जोड़ना।
NATUROTHON जैसे रन और हेल्थ चैलेंजेस।
सोशल मीडिया व जन संचार
ट्विटर, फेसबुक, इंस्टा जैसे प्लेटफॉर्म पर #AyushForUP ट्रेंड।
आयुष चिकित्सकों और प्रभावित रोगियों के अनुभव वीडियो में दिखाए जाएंगे।
स्वास्थ्य पर्यटन और उत्तर प्रदेश की नई पहचान
हेल्थ टूरिज्म के लिए केंद्र बनाना
गोरखपुर, वाराणसी, अयोध्या जैसे शहरों को आयुष आधारित मेडिकल टूरिज्म के हब में बदला जाएगा।
NRI व विदेशी नागरिक जो एलोपैथी से निराश हैं, उनके लिए नई उम्मीद।
विदेशों से निवेश और आकर्षण
Germany, Japan, USA जैसे देशों में आयुर्वेदिक उत्पादों की डिमांड।
राज्य सरकार अंतरराष्ट्रीय सेमिनारों में भाग लेकर यूपी की ताकत को प्रस्तुत कर रही है।
भविष्य की योजनाएं
योजना समयसीमा
हर ज़िले में 100-बेड सेंटर 2026 तक पूर्ण
हर मंडल में एक Integrative AYUSH College 2027 तक
हर ब्लॉक में 25-बेड वेलनेस क्लिनिक 2028 तक
किसान सहयोग से औषधीय खेती सतत योजना
Naturopathy Research Center 2026 से

विभिन्न हितधारकों की भूमिका (Stakeholders’ Role)
राज्य सरकार की भूमिका
योगी सरकार परियोजना की रीढ़ है — ज़मीन, फंडिंग, नीति निर्माण, स्टाफिंग व निगरानी।
मेडिकल एजुकेशन विभाग के साथ समन्वय कर सामूहिक संसाधन उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है।
केंद्र सरकार और आयुष मंत्रालय
राष्ट्रीय आयुष मिशन (NAM) के तहत तकनीकी गाइडलाइन और बजट सहयोग।
केंद्र ने AI-based Diagnostic Tools और डिजिटल उपचार रिकॉर्ड सिस्टम की भी योजना बनाई है।
विश्वविद्यालय और शैक्षणिक संस्थान
महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान विशेषज्ञ तैयार करेंगे।
विश्वविद्यालय शोध, क्लीनिकल ट्रायल्स और प्रोटोकॉल निर्माण में सहयोग करेगा।
निजी क्षेत्र और CSR
पतंजलि, डाबर, वैद्यनाथ जैसी कंपनियाँ औषध सप्लाई व रिसर्च में योगदान दे सकती हैं।
बड़े कॉर्पोरेट्स के CSR फंड से हर्बल गार्डन, वेलनेस पार्क और उपकरण की आपूर्ति संभव।
टेक्नोलॉजी और नवाचार (Innovation in AYUSH Healthcare)
डिजिटल हेल्थ इंटीग्रेशन
AYUSH Health ID कार्ड के माध्यम से मरीजों की डिजिटल फाइल बनेगी।
ई-OPD, टेली-AYUSH परामर्श और स्वास्थ्य एप्लीकेशन से सेवा सहज होगी।
हेल्थकेयर एप्स और पोर्टल्स
‘e-Ayush UP App’ के जरिए बुकिंग, चिकित्सक चयन, दवा ट्रैकिंग संभव होगा।
पोर्टल पर रोगियों की रिकवरी रिपोर्ट और योग वीडियो भी उपलब्ध होंगे।
AYUSH अनुसंधान में AI/ML का इस्तेमाल
रोगी के नाड़ी परीक्षण, लक्षण पहचान और हर्बल उपचार की AI सहायता से प्रोफाइलिंग।
नई दवाओं की खोज हेतु आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रिसर्च।
ग्रामीण भारत में प्रभाव: AYUSH के जरिए स्वास्थ्य समानता
प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार
अभी तक जहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) सीमित हैं, वहां अब AYUSH क्लिनिक विकल्प बनेंगे।
गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों व बच्चों को घरेलू औषधियों और पोषण सलाह मिलेगी।
परंपरागत ज्ञान का पुनर्जीवन
दादी-नानी के नुस्खे अब मान्यता प्राप्त विधि से क्लिनिक में शामिल होंगे।
स्थानीय वैद्य और जनजातीय हर्बलिस्ट को सम्मान और प्रशिक्षण दिया जाएगा।
आत्मनिर्भर भारत का ग्रामीण संस्करण
गांवों में हर्बल खेती, वेलनेस टूरिज्म और स्वदेशी उपचार के माध्यम से स्वावलंबन।
महिलाओं को आयुष स्व-सहायता समूहों से जोड़ने की योजना।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति
वैश्विक स्वास्थ्य मंचों पर प्रस्तुति
WHO और UN जैसे मंचों पर भारत की Ayush Diplomacy मजबूत हुई है।
“WHO Global Centre for Traditional Medicine” गुजरात में पहले ही स्थापित हो चुका है, अब UP इससे जुड़ेगा।
योग-आयुर्वेद को ब्रांड बनाना
जैसे केरल आयुर्वेदिक पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है, वैसे ही वाराणसी–गोरखपुर बेल्ट को आयुष पर्यटन हब बनाना।
योग दिवस और इंटरनेशनल आयुर्वेद सेमिनार यूपी में आयोजित होंगे।
जनभागीदारी और भविष्य की संरचना
जनभागीदारी के मॉडल
पंचायती राज संस्थाएं, NGOs, और शिक्षक–आशा कार्यकर्ता मिलकर आयुष साक्षरता अभियान चलाएंगे।
हर्बल गार्डन को पब्लिक गार्डन की तरह आमजन के लिए खोला जाएगा।
नीति और निगरानी तंत्र
हर ज़िले में ‘AYUSH स्वास्थ्य निगरानी समिति’ का गठन होगा।
डेटा आधारित मॉनिटरिंग: मरीज की संतुष्टि, उपचार समय, दवा की उपलब्धता ट्रैक की जाएगी।
उत्तर प्रदेश के लिए यह क्यों ऐतिहासिक निर्णय है?
स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और पर्यटन – चारों स्तंभों को एकसाथ छूने वाला अभूतपूर्व प्रयास।
योगी सरकार का यह कदम सिर्फ एक स्वास्थ्य परियोजना नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण और सामुदायिक उत्थान की शुरुआत है।
यह मॉडल आगे चलकर देश के अन्य राज्यों के लिए उदाहरण बन सकता है।
100-बेड AYUSH स्वास्थ्य एवं वेलनेस सेंटर: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. 100-बेड वाले AYUSH हेल्थ वेलनेस सेंटर्स का उद्देश्य क्या है?
उत्तर:
इसका उद्देश्य परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों जैसे आयुर्वेद, योग, सिद्ध, यूनानी, होम्योपैथी और प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से समग्र और किफायती स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करना है। यह आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली का पूरक है, जिससे लोगों को बिना साइड इफेक्ट वाले उपचार मिल सकें।
Q2. यह योजना उत्तर प्रदेश के किन जिलों में लागू होगी?
उत्तर:
यह योजना उत्तर प्रदेश के हर जिले में लागू की जा रही है। यानी सभी 75 जिलों में एक-एक 100-बेड का AYUSH हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर स्थापित होगा।
Q3. इन सेंटरों में कौन-कौन सी चिकित्सा पद्धतियाँ उपलब्ध होंगी?
उत्तर:
इन हेल्थ सेंटरों में निम्नलिखित चिकित्सा पद्धतियाँ उपलब्ध होंगी:
आयुर्वेद
योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा
यूनानी चिकित्सा
सिद्ध चिकित्सा
होम्योपैथी
Q4. पंचकर्म और क्षारसूत्र क्या है, और ये किसके लिए उपयोगी हैं?
उत्तर:
पंचकर्म: शरीर को विषमुक्त करने की 5 प्रक्रियाएँ हैं, जैसे वमन, विरेचन, बस्ती, नस्य, रक्तमोक्षण। यह थकान, मधुमेह, हाई BP, गठिया जैसी बीमारियों में सहायक है।
क्षारसूत्र: यह एक विशिष्ट आयुर्वेदिक विधि है जो बवासीर, भगंदर, नासूर जैसी बीमारियों का बिना सर्जरी इलाज करती है।
Q5. क्या इन सेंटरों में इलाज मुफ्त होगा?
उत्तर:
सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, अधिकांश सेवाएं निःशुल्क या अत्यंत रियायती दरों पर प्रदान की जाएंगी। विशेष सेवाओं जैसे पंचकर्म थैरेपी के लिए नाममात्र शुल्क लिया जा सकता है।
Q6. क्या इन सेंटरों में योग और ध्यान की भी व्यवस्था होगी?
उत्तर:
हाँ, प्रत्येक AYUSH वेलनेस सेंटर में योग कक्षाएं, ध्यान (Meditation) सत्र और योग परामर्श उपलब्ध होगा। सुबह-शाम नियमित सत्रों की व्यवस्था की जाएगी।
Q7. इन केंद्रों का संचालन कौन करेगा?
उत्तर:
संचालन उत्तर प्रदेश सरकार के AYUSH विभाग द्वारा किया जाएगा।
साथ ही, स्थानीय प्रशासन, AYUSH यूनिवर्सिटी और निजी विशेषज्ञ भी इसमें सहयोग करेंगे।
Q8. इन सेंटर्स में कौन-कौन कर्मचारी होंगे?
उत्तर:
प्रत्येक केंद्र में होंगे:
आयुर्वेद चिकित्सक
योग प्रशिक्षक
पंचकर्म तकनीशियन
फार्मासिस्ट
लैब टेक्नीशियन
नर्सिंग स्टाफ
परामर्शदाता व प्रशासनिक कर्मचारी
Q9. क्या इन सेंटरों में आधुनिक जांच और निदान की सुविधा भी होगी?
उत्तर:
हाँ, इनमें आधुनिक डायग्नोस्टिक लैब, ब्लड टेस्ट, BP, ECG, शारीरिक जांच, इत्यादि की सुविधा होगी। साथ ही, नाड़ी परीक्षण और औषधीय परामर्श जैसी पारंपरिक जांच विधियाँ भी उपलब्ध रहेंगी।
Q10. यह योजना कब तक पूरी तरह लागू हो जाएगी?
उत्तर:
सरकार ने लक्ष्य रखा है कि यह योजना 2026 के अंत तक पूरी तरह कार्यान्वित हो जाएगी। फिलहाल इसका निर्माण कार्य, भर्ती और उपकरण क्रय जैसे कार्य तीव्र गति से चल रहे हैं।
Q11. क्या यह योजना रोजगार भी पैदा करेगी?
उत्तर:
हाँ, इस योजना से हजारों नए रोजगार सृजित होंगे – चिकित्सक, टेक्नीशियन, योग प्रशिक्षक, हर्बल गार्डन कर्मी आदि। साथ ही, औषधीय खेती और स्थानीय निर्माण कार्यों से ग्रामीण स्तर पर भी रोजगार बढ़ेगा।
Q12. क्या आम लोग इन सेंटर्स से हर्बल उपचार की जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं?
उत्तर:
बिलकुल! इन सेंटर्स में हर्बल गार्डन, डेमो किचन, और औषधीय पौधों की जानकारी देने वाले सेक्शन होंगे। ग्रामीणों और छात्रों को औषधीय पौधों के उपयोग की जानकारी भी दी जाएगी।
निष्कर्ष (Conclusion)
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सभी जिलों में 100-बेड AYUSH स्वास्थ्य एवं वेलनेस सेंटर्स की स्थापना का निर्णय एक ऐतिहासिक, दूरदर्शी और जनहितैषी पहल है। यह केवल एक स्वास्थ्य परियोजना नहीं है, बल्कि यह समाज के हर वर्ग तक सस्ती, सुलभ और संपूर्ण चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने का संकल्प है।
आज जब पूरी दुनिया जीवनशैली जनित रोगों (Lifestyle Diseases), मानसिक तनाव, और दवाओं के दुष्प्रभाव से जूझ रही है, ऐसे समय में योग, आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और प्राकृतिक चिकित्सा जैसे भारत के पारंपरिक विज्ञान आशा की नई किरण बनकर उभरे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह प्रयास भारत की इसी सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने का एक साहसी कदम है।
इन केंद्रों से न केवल लाखों लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिलेगी, बल्कि लाखों युवाओं को रोजगार, किसानों को औषधीय खेती का अवसर, और समाज को “रोग से पहले रोकथाम” की शिक्षा मिलेगी।
उत्तर प्रदेश अब “Ayush Pradesh” की ओर बढ़ रहा है — जहां स्वास्थ्य आधुनिक नहीं, आधुनिक और पारंपरिक दोनों का समन्वय होगा। इस पहल से न केवल राज्य में स्वास्थ्य सुधार की नींव मजबूत होगी, बल्कि यह भारत के अन्य राज्यों के लिए भी एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत करेगा।
➡️ यह कदम आत्मनिर्भर भारत, स्वस्थ भारत, और संस्कृति आधारित विकास की ओर एक सुनियोजित और सशक्त यात्रा है।
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