CP Radhakrishnan NDA Vice President Candidate: जगदीप धनखड़ के बाद संसद को मिलेगा नया चेहरा
प्रस्तावना (Introduction)
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Toggleभारतीय राजनीति में उपराष्ट्रपति का पद संवैधानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पद केवल राज्यसभा के सभापति तक सीमित नहीं है, बल्कि संसद की कार्यवाही को संतुलित और निष्पक्ष बनाए रखने का भी प्रतीक है। हाल ही में जब उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफ़ा दिया, तब पूरे देश की निगाहें इस पद के नए उम्मीदवार पर टिक गईं। इसी पृष्ठभूमि में CP Radhakrishnan NDA vice president candidate के रूप में घोषित किए गए।

यह घोषणा केवल एक व्यक्ति की नियुक्ति नहीं, बल्कि NDA की व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। इसमें हम क्रमबद्ध तरीके से समझेंगे कि कैसे धनखड़ के इस्तीफ़े के बाद राजनीतिक घटनाक्रम बदला, किस तरह NDA ने अपने उम्मीदवार का चयन किया, और क्यों CP Radhakrishnan NDA vice president candidate के रूप में NDA का चेहरा बने।
जगदीप धनखड़ का इस्तीफ़ा और पृष्ठभूमि
इस्तीफ़े का कारण
21 जुलाई 2025 को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अचानक अपने पद से इस्तीफ़ा दिया। उनका कहना था कि स्वास्थ्य कारणों और डॉक्टरों की सलाह के चलते वे लंबे समय तक संसद के कामकाज को संभाल नहीं पाएंगे।
संवैधानिक स्थिति
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 67 और 68 के अनुसार, यदि उपराष्ट्रपति का पद रिक्त हो जाता है तो छह माह के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य है। इसलिए चुनाव आयोग ने 9 सितंबर 2025 को नया चुनाव कराने का निर्णय लिया।
राजनीतिक प्रभाव
धनखड़ के इस्तीफ़े ने विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों को चौंका दिया। यह पहली बार था जब उपराष्ट्रपति ने कार्यकाल के बीच इस्तीफ़ा दिया। इसके बाद से ही राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई और हर कोई यह जानना चाहता था कि नया चेहरा कौन होगा।
NDA द्वारा घोषणा की प्रक्रिया
भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक
17 अगस्त 2025 को भारतीय जनता पार्टी की संसदीय बोर्ड की अहम बैठक हुई। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा मौजूद थे। यहीं पर तय किया गया कि CP Radhakrishnan NDA vice president candidate होंगे।
मीडिया के सामने घोषणा
बैठक के तुरंत बाद पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई गई। जे.पी. नड्डा ने घोषणा करते हुए कहा कि “राधाकृष्णन जी संगठन के पुराने कार्यकर्ता, दो बार सांसद और कई राज्यों के राज्यपाल रह चुके हैं। उनका अनुभव और ईमानदार छवि उन्हें इस पद के लिए उपयुक्त बनाती है।”
सहयोगी दलों की सहमति
घोषणा से पहले NDA के सहयोगी दलों से भी चर्चा की गई। शिरोमणि अकाली दल, शिवसेना (शिंदे गुट), जेडीयू, एलजेपी और उत्तर-पूर्व के दलों ने सर्वसम्मति से समर्थन दिया।
CP Radhakrishnan का जीवन परिचय
शुरुआती जीवन और शिक्षा
CP Radhakrishnan, जिनका पूरा नाम चंद्रपुरम पोनुसामी राधाकृष्णन है, का जन्म 20 अक्टूबर 1957 को तमिलनाडु के तिरुप्पुर ज़िले में हुआ। उन्होंने बी.बी.ए की पढ़ाई वी.ओ. चिदंबरम कॉलेज से की। पढ़ाई के दौरान वे टेबल टेनिस के राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी रहे।
RSS और भाजपा से जुड़ाव
17 वर्ष की आयु से ही राधाकृष्णन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े और बाद में भारतीय जनसंघ तथा भाजपा के सक्रिय सदस्य बने। उनकी संगठनात्मक क्षमता और अनुशासन ने उन्हें जल्दी ही राजनीति में पहचान दिलाई।
सांसद के रूप में करियर
1998 और 1999 में वे कोयंबटूर से भाजपा सांसद चुने गए। संसद में उन्होंने वस्त्र उद्योग, वित्त और सार्वजनिक उपक्रमों से जुड़ी समितियों में काम किया।
राज्यपाल के रूप में कार्यकाल
2023: झारखंड के राज्यपाल बने।
2024: तेलंगाना के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार और पुडुचेरी के उपराज्यपाल रहे।
2024: महाराष्ट्र के राज्यपाल नियुक्त हुए।
उनका यह प्रशासनिक अनुभव उन्हें संवैधानिक पदों पर संतुलन और गंभीरता से काम करने में सक्षम बनाता है।
NDA की रणनीति
दक्षिण भारत पर फोकस
NDA जानता है कि दक्षिण भारत में भाजपा की पकड़ अपेक्षाकृत कमज़ोर है। तमिलनाडु से आने वाले CP Radhakrishnan NDA vice president candidate बनने से पार्टी को क्षेत्रीय संतुलन साधने में मदद मिलेगी।
RSS से जुड़ाव
चूंकि वे लंबे समय तक RSS से जुड़े रहे हैं, इसलिए संगठन में उनकी गहरी पैठ है। इससे भाजपा को आंतरिक मजबूती मिलती है।
ईमानदार और सादगीपूर्ण छवि
राधाकृष्णन की छवि एक सादगीपूर्ण और ईमानदार नेता की है। प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी प्रशंसा करते हुए कहा कि वे “dedication, humility और intellect” के प्रतीक हैं।
विपक्ष की रणनीति
INDIA Bloc ने तुरंत अपनी बैठक बुलाई। विपक्षी दलों ने विचार किया कि वे एक संयुक्त उम्मीदवार उतारेंगे। हालांकि NDA के बहुमत के कारण उनकी स्थिति मज़बूत नहीं है। इसीलिए विपक्ष या तो चुनाव लड़कर प्रतीकात्मक संदेश देना चाहता है या फिर सहमति से चुनाव करवाने का विकल्प तलाश रहा है।
चुनावी समीकरण
NDA की स्थिति
लोकसभा और राज्यसभा मिलाकर NDA के पास लगभग 422 सांसद हैं। यह संख्या उपराष्ट्रपति चुनाव में उन्हें स्पष्ट बहुमत दिलाती है।
विपक्ष की स्थिति
INDIA Bloc के पास लगभग 250 सांसद हैं। यह संख्या पर्याप्त नहीं है। इसलिए NDA का पलड़ा भारी है।
संभावित परिणाम
स्पष्ट है कि CP Radhakrishnan NDA vice president candidate के रूप में भारी बहुमत से जीत हासिल करेंगे।

उपराष्ट्रपति पद की संवैधानिक भूमिका
राज्यसभा के सभापति के रूप में कार्य करना।
सदन में अनुशासन और तटस्थता बनाए रखना।
राष्ट्रपति के अनुपस्थिति में कार्यभार संभालना।
संसद और कार्यपालिका के बीच संतुलन साधना।
CP Radhakrishnan की ताकत और चुनौतियाँ
ताकतें
- संगठनात्मक अनुभव
दक्षिण भारतीय पहचान
RSS से जुड़ाव
ईमानदार और सरल छवि
चुनौतियाँ
- तमिलनाडु में भाजपा का कम आधार
विपक्ष की एकता की कोशिशें
संवैधानिक पद पर राजनीतिक दबाव
भविष्य की संभावनाएँ
यदि वे उपराष्ट्रपति चुने जाते हैं, तो:
दक्षिण भारत में भाजपा की पकड़ मज़बूत होगी।
राज्यसभा में कार्यवाही सुचारू ढंग से चलेगी।
विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों में संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
NDA को संगठनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तर पर मजबूती मिलेगी।
समग्र विश्लेषण
धनखड़ के इस्तीफ़े से शुरू हुआ यह घटनाक्रम अब अपने निर्णायक मोड़ पर है। NDA ने जिस तरह से सर्वसम्मति बनाकर CP Radhakrishnan NDA vice president candidate चुना, वह दर्शाता है कि पार्टी भविष्य की राजनीति में संतुलन साधने की दिशा में है। विपक्ष भले ही चुनाव लड़े, लेकिन संख्या बल NDA के पास है।
निष्कर्ष
NDA द्वारा CP Radhakrishnan NDA vice president candidate की घोषणा भारतीय राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है। Jagdeep Dhankhar के इस्तीफ़े के बाद यह कदम न केवल संवैधानिक ज़रूरत थी, बल्कि यह राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद रणनीतिक माना जा रहा है।
CP Radhakrishnan का व्यक्तित्व, उनकी सादगी, संगठनात्मक अनुभव और RSS से गहरा जुड़ाव उन्हें NDA के लिए एक आदर्श उम्मीदवार बनाता है।
उनकी नियुक्ति से दक्षिण भारत में भाजपा का प्रभाव मज़बूत होने की संभावना है, क्योंकि वे तमिलनाडु जैसे क्षेत्र से आते हैं जहाँ पार्टी अभी भी अपनी पकड़ को मजबूत बनाने की कोशिश कर रही है।
संसद में NDA की संख्या बल को देखते हुए यह लगभग तय माना जा रहा है कि वे उपराष्ट्रपति चुनाव में आसानी से जीत दर्ज करेंगे।
CP Radhakrishnan NDA vice president candidate के रूप में न केवल राज्यसभा सभापति की भूमिका निभाएंगे बल्कि आने वाले वर्षों में वे सरकार और विपक्ष के बीच संतुलन साधने का भी काम करेंगे।
उनका कार्यकाल भारतीय लोकतंत्र की मजबूती, तटस्थता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
कुल मिलाकर, NDA की यह रणनीति राजनीतिक रूप से दूरगामी असर डालेगी और भारतीय राजनीति में CP Radhakrishnan का नाम एक नई पहचान बनाएगा।
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