Gender budgeting कैसे बदल रहा है भारत की नीति और नियति?
प्रस्तावना:
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Toggleवर्तमान समय में भारत सामाजिक और आर्थिक समानता की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है। महिलाओं की भागीदारी और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों में “Gender budgeting” एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभरी है।
इसी संदर्भ में, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने हाल ही में जेंडर बजटिंग पर पहला राष्ट्रीय परामर्श सम्मेलन आयोजित किया, जिसने इस विषय पर नए विचारों और दृष्टिकोणों के द्वार खोले।

क्या है Gender budgeting?
Gender budgeting का तात्पर्य है – बजट निर्माण की प्रक्रिया में महिलाओं की आवश्यकताओं और उनके कल्याण को प्राथमिकता देना। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी सरकारी योजनाओं और नीतियों में महिलाओं को समान अवसर और संसाधन मिलें।
Gender budgeting सम्मेलन की प्रमुख झलकियाँ
1. ऐतिहासिक पहल:
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित यह पहला राष्ट्रीय स्तर का परामर्श सम्मेलन था, जिसका उद्देश्य Gender budgeting की प्रक्रियाओं को मजबूती देना और विभिन्न क्षेत्रों में इसके कार्यान्वयन को और प्रभावी बनाना था।
2. Gender budgeting नॉलेज हब पोर्टल का शुभारंभ:
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने इस अवसर पर ‘जेंडर बजटिंग नॉलेज हब‘ पोर्टल लॉन्च किया। यह पोर्टल जानकारी साझा करने, प्रशिक्षण देने और अच्छे अभ्यासों को बढ़ावा देने के लिए एक डिजिटल मंच प्रदान करेगा।
Gender budgeting सम्मेलन का उद्देश्य
इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य था:
Gender budgeting प्रक्रियाओं को मजबूत करने के उपायों पर विचार-विमर्श करना।
विभिन्न मंत्रालयों, राज्यों, और संस्थानों के अनुभवों को साझा करना।
जेंडर बजटिंग के सफल मॉडलों को देशभर में लागू करने की रणनीति तैयार करना।
मंत्री का संदेश: महिलाओं में निवेश, भारत का भविष्य
श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने अपने भाषण में कहा:
“जब हम महिलाओं में निवेश करते हैं, तो हम केवल संसाधन आवंटित नहीं करते, बल्कि हम एक अधिक न्यायसंगत, सशक्त और विकसित भारत का निर्माण करते हैं।“
उनके अनुसार, महिला सशक्तिकरण केवल सामाजिक उत्तरदायित्व नहीं बल्कि आर्थिक और राष्ट्रीय विकास की कुंजी भी है।
जेंडर बजट में 11 वर्षों की प्रगति
श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने यह भी बताया कि:
2014-15 में जेंडर बजट का आवंटन था 0.98 लाख करोड़ रुपये।
2025-26 तक यह बढ़कर 4.49 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
यह साढ़े चार गुना वृद्धि भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
भागीदारी: मंत्रालय, राज्य और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं
Gender budgeting सम्मेलन में 40 केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों और 19 राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, संयुक्त राष्ट्र की महिलाएं, एडीबी के प्रतिनिधि, और राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं के विशेषज्ञों ने भाग लिया।
इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत में जेंडर बजटिंग को केवल नीति के रूप में नहीं, बल्कि एक साझा राष्ट्रीय लक्ष्य के रूप में देखा जा रहा है।
‘Gender budgeting नॉलेज हब’ पोर्टल के लाभ
डेटा एक्सेस:
महिला संबंधित बजट आंकड़ों और रिपोर्ट्स की आसान उपलब्धता।
प्रशिक्षण एवं कार्यशालाएँ:
ऑनलाइन कोर्स, वेबिनार, केस स्टडी और रिसर्च से संबंधित प्रशिक्षण सामग्री।
नीति निर्माताओं के लिए मार्गदर्शन:
राज्यों और केंद्र के लिए बजट निर्माण में जेंडर परिप्रेक्ष्य जोड़ने हेतु गाइडलाइंस।
भारत में Gender budgeting की वर्तमान स्थिति
भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में है जहाँ संविधानिक रूप से महिला अधिकारों की सुरक्षा और प्रोत्साहन के लिए बजट प्रावधान मौजूद हैं। 2005-06 से Gender budgeting की अवधारणा को औपचारिक रूप से अपनाया गया, और तब से यह एक संस्थागत प्रक्रिया बन गई है।
चुनौतियाँ और समाधान
प्रमुख चुनौतियाँ:
विभिन्न मंत्रालयों में समन्वय की कमी।
राज्यों में बजट निगरानी की कमजोर प्रणाली।
स्थानीय निकायों में जागरूकता की कमी।
संभावित समाधान:
क्षमता निर्माण कार्यक्रम।
डिजिटल टूल्स का उपयोग।
पंचायती राज संस्थाओं को जेंडर बजटिंग से जोड़ना।
भविष्य की दिशा
नीति का एकीकरण:
सभी मंत्रालयों और योजनाओं में जेंडर समानता को मूलधारा में लाना।
स्थानीयकरण:
ग्राम पंचायत से लेकर जिला स्तर तक बजटिंग प्रक्रियाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना।
वैश्विक भागीदारी:
संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग बढ़ाना।
अंतर्राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में Gender budgeting: भारत कहाँ खड़ा है?
दुनिया के कई देश जैसे ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, और कनाडा पहले ही Gender budgeting को अपनी वित्तीय योजनाओं का हिस्सा बना चुके हैं। भारत ने 2005-06 में इसे अपनाया और तब से अब तक कई सुधार किए हैं।
लेकिन भारत ने हाल के वर्षों में जिस तरह बजट आवंटन में वृद्धि की है और इसे एक डिजिटल पोर्टल के माध्यम से जनता तक लाया है, वह इसे एक ग्लोबल लीडर बनने की दिशा में अग्रसर करता है।
देश का नाम Gender budgeting की शुरुआत विशेष पहल
भारत 2005-06 नॉलेज हब पोर्टल
ऑस्ट्रेलिया 1984 Women’s Budget Statement
दक्षिण अफ्रीका 1996 Gender-responsive budgeting workshops
फ्रांस 2000 Gender impact assessment
राज्य सरकारों की भूमिका: ग्राउंड लेवल पर क्रांति
कुछ राज्य सरकारों ने Gender budgeting के कार्यान्वयन में मिसाल कायम की है:
केरल: स्थानीय निकायों को जेंडर ऑडिट की जिम्मेदारी दी गई है।
महाराष्ट्र: महिला पंचायत सदस्यों को बजट प्रक्रिया में प्रशिक्षित किया गया है।
राजस्थान: शिक्षा और स्वास्थ्य योजनाओं में जेंडर परफॉर्मेंस इंडिकेटर जोड़े गए हैं।
यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन सकते हैं।
क्यों आवश्यक है Gender budgeting?
1. लैंगिक असमानता दूर करने हेतु:
भारत में अभी भी महिलाओं की आर्थिक भागीदारी पुरुषों की तुलना में बहुत कम है। Gender budgeting महिलाओं की आजीविका, स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा से संबंधित योजनाओं में निवेश को सुनिश्चित करती है।
2. सतत विकास लक्ष्यों (SDG) को प्राप्त करने हेतु:
विशेष रूप से SDG 5: Gender Equality के अंतर्गत जेंडर बजटिंग एक प्रमुख उपकरण बनता है।
3. समावेशी विकास के लिए:
सभी वर्गों – विशेषकर गरीब, ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों की महिलाओं – को विकास की मुख्यधारा में लाना।
‘Gender budgeting नॉलेज हब’ की विशेषताएँ
इस पोर्टल में निम्नलिखित सुविधाएँ उपलब्ध होंगी:
Training Modules:
ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म
सर्टिफिकेट कोर्स
Resource Library:
Case Studies
Reports
Research Papers
Discussion Forum:
विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के बीच संवाद
Monitoring Dashboard:
रियल टाइम डेटा ट्रैकिंग
स्कोर कार्ड आधारित मूल्यांकन
Gender budgeting और महिलाओं का सामाजिक सशक्तिकरण
जेंडर बजट का प्रभाव केवल आर्थिक नहीं होता – यह सामाजिक सशक्तिकरण का भी माध्यम बनता है:
क्षेत्र प्रभाव
शिक्षा अधिक छात्राओं का स्कूल में नामांकन
स्वास्थ्य मातृ मृत्यु दर में कमी
सुरक्षा महिला हेल्पलाइन सेवाओं में सुधार
आजीविका महिला स्वयं सहायता समूहों को ऋण में वृद्धि
नीति सुझाव: सरकार को क्या करना चाहिए?
1. बजट पूर्व परामर्श:
महिलाओं की जरूरतों को समझने के लिए बजट से पहले संवाद करना।
2. पंचायत स्तर पर प्रशिक्षण:
स्थानीय निकायों को सक्षम बनाना ताकि वे जेंडर बजट तैयार कर सकें।
3. निजी क्षेत्र की भागीदारी:
CSR फंड का उपयोग जेंडर बजटिंग प्रोजेक्ट्स में करना।
युवाओं और छात्रों की भूमिका
Gender budgeting को केवल सरकार की जिम्मेदारी मानना उचित नहीं है। युवाओं को चाहिए कि वे:
Gender budgeting को पढ़ें और समझें।
समाज में लैंगिक समानता की मांग करें।
स्थानीय योजनाओं में भागीदारी करें।
यह UPSC, PSC, UGC-NET, SSC जैसे प्रतियोगी परीक्षाओं के छात्रों के लिए महत्वपूर्ण सामयिक विषय भी है।
मीडिया और तकनीक की भूमिका
डिजिटल इंडिया अभियान के तहत Gender budgeting को और अधिक पारदर्शी व प्रभावी बनाया जा सकता है:
सोशल मीडिया पर जागरूकता अभियान
ऐप आधारित मॉनिटरिंग
इन्फोग्राफिक्स और एनिमेशन से समझाना
भारत सरकार की अन्य महिला केंद्रित योजनाएँ जो जेंडर बजटिंग से जुड़ी हैं
Gender budgeting को असरदार बनाने के लिए केंद्र सरकार ने कई योजनाओं और कार्यक्रमों को लागू किया है, जो सीधे महिलाओं के जीवन को बेहतर बनाने पर केंद्रित हैं।
1. बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ (BBBP)
उद्देश्य: बालिकाओं के लिंगानुपात में सुधार और शिक्षा को बढ़ावा देना
Gender budgeting से जुड़ाव: फंड आवंटन और ट्रैकिंग के लिए जेंडर बजट के तहत वर्गीकृत
2. प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY)
गर्भवती महिलाओं के लिए वित्तीय सहायता
स्वास्थ्य और पोषण पर केंद्रित
3. महिला हेल्पलाइन (181)
संकट में महिलाओं के लिए 24×7 सहायता सेवा
जेंडर बजट में प्रत्यक्ष योगदान
4. स्वाधार गृह योजना
बेसहारा, परित्यक्ता या संकटग्रस्त महिलाओं के लिए आश्रय
सामाजिक पुनर्वास पर केंद्रित
5. उज्ज्वला योजना
ग्रामीण महिलाओं को रसोई गैस कनेक्शन प्रदान करना
महिलाओं के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव
संसद और नीति निर्माताओं की भूमिका
भारतीय संसद में Gender budgeting को लेकर कई बार चर्चा हुई है। सांसदों ने सुझाव दिए हैं कि:
बजट पेश करते समय महिला केंद्रित योजनाओं का विशेष उल्लेख होना चाहिए।
हर साल Gender Budget Statement (Statement 20 & 21) को और अधिक विस्तृत किया जाए।
महिलाओं की मौजूदगी और भागीदारी बजट निर्माण प्रक्रिया में होनी चाहिए।
आंकड़ों की जुबानी: प्रभाव और विश्लेषण
वर्ष जेंडर बजट (₹ लाख करोड़) कुल बजट में प्रतिशत
2014-15 0.98 4.5%
2019-20 1.31 4.7%
2022-23 2.23 4.9%
2025-26* 4.49 (प्रस्तावित) 5.1% (अनुमानित)
विश्लेषण: धीरे-धीरे जेंडर बजटिंग की हिस्सेदारी बढ़ रही है, लेकिन इसे और तेज़ गति देने की ज़रूरत है।

डिजिटल युग में Gender budgeting
तकनीकी पहल:
1. Gender Budget Tracker:
राज्यों द्वारा जारी की जाने वाली परियोजनाओं का डेटा
योजनाओं की Geo-tagging
2. Mobile Apps:
महिलाएं शिकायत दर्ज कर सकती हैं, बजट उपयोग देख सकती हैं
3. AI और डेटा एनालिटिक्स:
यह निर्धारित कर सकता है कि किस क्षेत्र में महिलाओं की ज़रूरतें अधिक हैं और फंड कहाँ बढ़ाना चाहिए
नागरिकों के लिए सुझाव: आप क्या कर सकते हैं?
अपने क्षेत्र में चल रही महिला केंद्रित योजनाओं की जानकारी लें
लोकल पंचायत या नगर निगम के बजट दस्तावेजों में महिला योजनाओं की मांग करें
सोशल मीडिया पर जागरूकता अभियान चलाएँ
महिला प्रतिनिधियों को सपोर्ट करें
महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़ें
निष्कर्ष: एक न्यायसंगत और समावेशी भारत की ओर
Gender budgeting केवल एक लेखा-जोखा नहीं, बल्कि एक दृष्टिकोण है — जो भारत के विकास को समानता, न्याय और समावेशन की नींव पर टिकाता है। यह सुनिश्चित करता है कि महिलाओं को समाज के हर क्षेत्र में वह स्थान और अवसर मिलें जिसके वे पूर्णतः योग्य हैं।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा ‘Gender budgeting पर राष्ट्रीय परामर्श सम्मेलन’ और ‘जेंडर बजटिंग नॉलेज हब पोर्टल’ का शुभारंभ एक ऐतिहासिक पहल है, जो इस विचार को व्यवहार में बदलने की दिशा में बड़ा कदम है।
श्रीमती अन्नपूर्णा देवी का यह कथन बिल्कुल उपयुक्त है कि:
“जब हम महिलाओं में निवेश करते हैं, तो हम केवल संसाधन आवंटित नहीं करते, बल्कि एक अधिक न्यायसंगत, सशक्त और विकसित भारत की नींव रखते हैं।”
भारत में पिछले 11 वर्षों में जेंडर बजटिंग में जो चार गुना से अधिक की वृद्धि हुई है, वह सरकार की प्रतिबद्धता और दिशा को स्पष्ट करती है।
लेकिन सिर्फ आंकड़ों से बदलाव नहीं आता — नीतियों को ज़मीनी स्तर तक पहुँचाना, समाज की भागीदारी, और स्थानीय संस्थाओं की सक्रियता ही वास्तविक परिवर्तन लाती है।
अब समय आ गया है कि:
जेंडर बजटिंग को हर राज्य, हर ज़िले, और हर पंचायत तक पहुँचाया जाए।
शिक्षकों, छात्रों, नीति निर्माताओं और आम नागरिकों की भूमिका को केंद्र में लाया जाए।
महिलाओं को नीति निर्माण और बजट योजना में भागीदार बनाया जाए — प्राप्तकर्ता नहीं, सहभागी।
Gender budgeting भारत को सिर्फ आर्थिक रूप से नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से भी मजबूत और समावेशी राष्ट्र बनाएगी।
FAQs: जेंडर बजटिंग से जुड़े सामान्य प्रश्न
Q1: जेंडर बजटिंग क्या है?
उत्तर:
जेंडर बजटिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें बजट निर्माण, नीति-निर्धारण और योजना कार्यान्वयन के दौरान महिलाओं और पुरुषों की विशेष ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए संसाधनों का आवंटन किया जाता है। इसका उद्देश्य महिलाओं को बराबरी के अवसर और लाभ देना है।
Q2: भारत में जेंडर बजटिंग की शुरुआत कब हुई?
उत्तर:
भारत में जेंडर बजटिंग की औपचारिक शुरुआत वर्ष 2005-06 के बजट में हुई थी, जब पहली बार “Gender Budget Statement” (अनुच्छेद 20 और 21) पेश किया गया।
Q3: जेंडर बजटिंग क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
क्योंकि भारत में अब भी महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और रोजगार के क्षेत्र में समान अवसर नहीं मिलते। जेंडर बजटिंग इन असमानताओं को दूर कर महिलाओं की सशक्त भागीदारी सुनिश्चित करती है।
Q4: क्या जेंडर बजट केवल महिलाओं के लिए होता है?
उत्तर:
मुख्यतः हाँ, लेकिन इसका उद्देश्य केवल महिलाओं को लाभ देना नहीं बल्कि समाज में लैंगिक संतुलन बनाना है। इसमें लड़कियों, किशोरियों, बुजुर्ग महिलाओं और ट्रांसजेंडर समुदाय को भी शामिल किया जाता है।
Q5: ‘जेंडर बजटिंग नॉलेज हब पोर्टल’ क्या है?
उत्तर:
यह महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया एक डिजिटल पोर्टल है, जो जेंडर बजटिंग पर जानकारी, प्रशिक्षण सामग्री, डेटा, केस स्टडी और नीति दस्तावेज़ प्रदान करता है। इसका उद्देश्य राज्यों, मंत्रालयों और नागरिकों को जेंडर बजटिंग की प्रक्रिया में सहयोग देना है।
Q6: भारत में जेंडर बजट का प्रतिशत कितना है?
उत्तर:
वर्ष 2025-26 के प्रस्तावित बजट के अनुसार, जेंडर बजट 4.49 लाख करोड़ रुपये है, जो कुल केंद्रीय बजट का लगभग 5% है।
Q7: किन-किन योजनाओं को जेंडर बजट के अंतर्गत रखा गया है?
उत्तर:
प्रमुख योजनाएँ जैसे:
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना
स्वाधार गृह
महिला हेल्पलाइन (181)
उज्ज्वला योजना
सभी जेंडर बजट के अंतर्गत आती हैं।
Q8: क्या राज्य सरकारें भी जेंडर बजटिंग करती हैं?
उत्तर:
हाँ, कई राज्य सरकारों ने भी जेंडर बजटिंग अपनाई है जैसे केरल, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु आदि। यह राज्यों के अपने बजट में महिलाओं की जरूरतों को प्राथमिकता देने का प्रयास है।
Q9: क्या यह UPSC/SSC परीक्षा के लिए उपयोगी है?
उत्तर:
बिलकुल! जेंडर बजटिंग UPSC, State PSCs, SSC, UGC-NET जैसी परीक्षाओं में GS-II, GS-III, और Essay पेपर के लिए बेहद महत्वपूर्ण विषय है। इसके अलावा यह एक समसामयिक विषय (Current Affairs) के रूप में भी पूछा जा सकता है।
Q10: जेंडर बजटिंग को सफल बनाने के लिए हमें क्या करना चाहिए?
उत्तर:
बजट पारदर्शिता पर ज़ोर देना
स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण देना
महिलाओं की नीति निर्माण में भागीदारी बढ़ाना
निगरानी तंत्र (Monitoring system) को सशक्त बनाना
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