IGI एयरपोर्ट पर बर्ड स्ट्राइक: क्या दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला बदलाव लाएगा?
हवाई यात्रा आज के दौर में परिवहन का सबसे तेज़ और सुरक्षित माध्यम माना जाता है। प्रतिदिन लाखों यात्री विश्वभर में विमानों के माध्यम से सफर करते हैं। लेकिन जब हम हवाई सुरक्षा की बात करते हैं, तो उसमें कई तरह की चुनौतियाँ आती हैं। उनमें से एक बेहद महत्वपूर्ण और चिंताजनक समस्या है—बर्ड स्ट्राइक यानी पक्षियों का विमान से टकराना।
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Toggleदिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI Airport) पर यह समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को नोटिस जारी किया है ताकि हवाईअड्डे के आसपास पक्षियों के टकराने की घटनाओं को रोका जा सके। यह केवल एक सुरक्षा का मामला नहीं है, बल्कि विमानन उद्योग और यात्रियों की जान-माल की रक्षा का भी विषय है।
यहाँ पर हम बर्ड स्ट्राइक की समस्या को विस्तार से समझने का प्रयास करेंगे तथा इसके पीछे छिपे कारणों की गहराई के साथ विवेचना करेगे और इस समस्या के समाधान के लिए आवश्यक कदमों पर भी प्रकाश डालेगे।
बर्ड स्ट्राइक क्या है और यह क्यों खतरनाक है?
बर्ड स्ट्राइक वह स्थिति होती है जब कोई विमान उड़ान के दौरान किसी पक्षी या पक्षियों के झुंड से टकरा जाता है। यह घटना सबसे अधिक टेक-ऑफ (उड़ान भरते समय) और लैंडिंग (उतरते समय) होती है, क्योंकि इन समयों में विमान की ऊंचाई कम होती है और पक्षियों के टकराने की संभावना अधिक रहती है।
बर्ड स्ट्राइक के मुख्य खतरे:
1. इंजन फेल हो सकता है: अगर कोई पक्षी सीधे विमान के इंजन में चला जाए, तो इंजन खराब हो सकता है और विमान दुर्घटनाग्रस्त हो सकता है।
2. कॉकपिट पर असर: कई मामलों में पक्षी विमान के विंडशील्ड (कांच) से टकरा जाते हैं, जिससे पायलट का नियंत्रण प्रभावित हो सकता है।
3. विमान के अन्य हिस्सों को नुकसान: अगर कोई पक्षी पंखों, फ्यूल टैंक, सेंसर या अन्य अहम हिस्सों से टकराता है, तो विमान की स्थिरता और सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
4. आर्थिक नुकसान: हर साल बर्ड स्ट्राइक के कारण लाखों डॉलर का नुकसान होता है, जिसमें विमान की मरम्मत और उड़ान में देरी शामिल होती है।
IGI हवाई अड्डे पर बर्ड स्ट्राइक की घटनाएँ क्यों बढ़ रही हैं?
दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भारत का सबसे व्यस्ततम हवाई अड्डा है। यहां हर दिन सैकड़ों विमान उड़ान भरते हैं और हजारों यात्री सफर करते हैं। ऐसे में बर्ड स्ट्राइक की घटनाओं का बढ़ना एक गंभीर मुद्दा है।
मुख्य कारण:
1. हवाई अड्डे के आसपास कचरा और गंदगी
हवाई अड्डे के आसपास कई इलाकों में कचरा डंपिंग की समस्या बनी हुई है। कचरा और खाद्य अवशेष पक्षियों को आकर्षित करते हैं, जिससे वे हवाई क्षेत्र में अधिक संख्या में मंडराते हैं।
2. अवैध बूचड़खाने और मांस की दुकानें
दिल्ली में हवाई अड्डे के आसपास कई अवैध बूचड़खाने और मांस की दुकानें हैं। यह स्थान पक्षियों के लिए भोजन का एक प्रमुख स्रोत बनते हैं। विशेषकर गिद्ध, कौवे और चील जैसे पक्षी इन इलाकों में अधिक संख्या में पाए जाते हैं।
3. खुले नाले और जलाशय
दिल्ली में कई खुले नाले और जलाशय हवाई अड्डे के आसपास मौजूद हैं, जिनमें गंदा पानी और खाद्य अपशिष्ट होता है। यह भी बर्ड स्ट्राइक की संभावना को बढ़ाने वाला एक अहम कारण है।
4. अनियंत्रित शहरीकरण और हरियाली की कमी
तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण पक्षियों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं। मजबूरी में वे भोजन और पानी की तलाश में हवाई अड्डे के आसपास चले आते हैं।
5. मौसम और मानसून का प्रभाव
विशेष रूप से बरसात के मौसम में बर्ड स्ट्राइक की घटनाएं बढ़ जाती हैं, क्योंकि कीट-पतंगे और अन्य छोटे जीवों की संख्या बढ़ने से पक्षियों की गतिविधियाँ भी बढ़ जाती हैं।

दिल्ली उच्च न्यायालय की कार्रवाई और क्या बदलाव आ सकते हैं?
दिल्ली उच्च न्यायालय ने IGI हवाई अड्डे पर बढ़ती बर्ड स्ट्राइक की घटनाओं पर गंभीर रुख अपनाते हुए हवाई अड्डा प्राधिकरण, नगर निगम और नागरिक उड्डयन मंत्रालय को नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में यह निर्देश दिए गए हैं कि बर्ड स्ट्राइक की घटनाओं को कम करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं।
संभावित बदलाव और उपाय:
- हवाई अड्डे के आसपास अवैध बूचड़खानों को हटाना।
सही तरीके से कचरा प्रबंधन सुनिश्चित करना ताकि पक्षी भोजन की तलाश में वहां न आएं।
बर्ड कंट्रोल सिस्टम (Bird Detection Radar) को अपनाना, जो पक्षियों की गतिविधियों का पता लगाकर विमानों को सचेत कर सके।
सख्त निगरानी और पेट्रोलिंग को बढ़ाना, जिससे हवाई अड्डे के क्षेत्र में पक्षियों की गतिविधि पर नजर रखी जा सके।
अन्य देशों में कैसे नियंत्रित किया जाता है बर्ड स्ट्राइक?
दुनिया के कई बड़े हवाई अड्डों ने बर्ड स्ट्राइक से निपटने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए हैं।
1. न्यूयॉर्क के JFK एयरपोर्ट का मॉडल
JFK हवाई अड्डे ने ‘बायोडायवर्सिटी मैनेजमेंट सिस्टम’ अपनाया है, जिसमें बर्ड कंट्रोल ड्रोन, लेजर डिटेक्शन और बर्ड रिपेलेंट टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाता है।
2. दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट का मॉडल
दुबई एयरपोर्ट ने साउंड वेव टेक्नोलॉजी और फायरक्रैकर्स का इस्तेमाल किया है, जिससे पक्षियों को रनवे के आसपास आने से रोका जाता है।
3. लंदन हीथ्रो एयरपोर्ट का मॉडल
यहां विशेष प्रशिक्षित बाज़ पक्षियों (Falcons) का उपयोग किया जाता है, जो अन्य छोटे पक्षियों को हवाई अड्डे से दूर रखते हैं।
भारत में क्या किया जा सकता है?
भारत में बर्ड स्ट्राइक की घटनाओं को कम करने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:
1. बर्ड कंट्रोल टीम की तैनाती: नियमित रूप से हवाई अड्डे के चारों ओर निगरानी की जाए।
2. ‘बर्ड अवॉइडेंस मॉडल’ लागू किया जाए: जिससे पक्षियों को नियंत्रित किया जा सके।
3. ड्रोन और लेजर तकनीक: विमानों के टेक-ऑफ और लैंडिंग के समय पक्षियों को दूर रखने के लिए।
4. जन जागरूकता अभियान: स्थानीय लोगों को यह समझाना कि हवाई अड्डे के आसपास गंदगी फैलाने से क्या खतरे हो सकते हैं।
बर्ड स्ट्राइक से जुड़े प्रमुख हादसे और उनकी भयावहता
बर्ड स्ट्राइक की घटनाएँ केवल मामूली क्षति तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि कई बार ये बड़े हादसों का कारण भी बनती हैं। इतिहास में कई ऐसी घटनाएँ हुई हैं, जिनमें पक्षियों से टकराने के कारण विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गए या इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी।
1. सुली हडसन नदी चमत्कार (2009)
15 जनवरी 2009 को US Airways Flight 1549 न्यूयॉर्क के लॉगार्डिया एयरपोर्ट से उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद कनाडा गीज़ (Canada Geese) पक्षियों के झुंड से टकरा गया। इस टकराव के कारण दोनों इंजन फेल हो गए। पायलट कैप्टन चेसली “सुली” सुलबर्गर ने असाधारण सूझ-बूझ का परिचय देते हुए विमान को हडसन नदी में सफलतापूर्वक लैंड कराया और सभी 155 यात्रियों की जान बच गई।
2. भारतीय वायुसेना के विमान हादसे
भारतीय वायुसेना (IAF) के कई विमानों को भी बर्ड स्ट्राइक के कारण नुकसान झेलना पड़ा है।
2019 में मिग-21 लड़ाकू विमान राजस्थान में बर्ड स्ट्राइक के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।
2017 में भी IAF का एक जगुआर विमान पक्षी से टकराने के कारण इंजन फेल होने से क्रैश हो गया था।
3. नेपाल एयरलाइंस फ्लाइट 555 (2017)
नेपाल एयरलाइंस की फ्लाइट 555 जब लैंडिंग कर रही थी, तब पक्षियों से टकराने के कारण विमान रनवे से फिसल गया, जिससे कई यात्री घायल हो गए।

4. स्पाइसजेट और इंडिगो की बर्ड स्ट्राइक घटनाएँ
हाल ही में भारत में कई प्रमुख एयरलाइंस को बर्ड स्ट्राइक की समस्या से जूझना पड़ा है।
2022 में, स्पाइसजेट की एक उड़ान पक्षी से टकराने के बाद इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी।
इंडिगो की फ्लाइट 6E-2134 को टेक-ऑफ के दौरान बर्ड स्ट्राइक के कारण रोकना पड़ा।
बर्ड स्ट्राइक को रोकने के लिए भारत में उठाए गए कदम
1. भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) की पहल
AAI ने देशभर के प्रमुख हवाई अड्डों पर बर्ड हिट रोकने के लिए कई उपाय किए हैं:
बर्ड कंट्रोल यूनिट (BCU) की तैनाती, जो विशेष सायरन और अल्ट्रासोनिक उपकरणों का उपयोग कर पक्षियों को हवाई क्षेत्र से दूर रखती है।
गश्त और सर्विलांस बढ़ाया गया ताकि रनवे के आसपास पक्षियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।
2. हाई-टेक समाधान अपनाने की दिशा में प्रयास
ड्रोन आधारित बर्ड मॉनिटरिंग: AI-सक्षम ड्रोन के जरिए पक्षियों की उपस्थिति को मॉनिटर किया जा रहा है।
बायो-अकौस्टिक तकनीक: ऐसी ध्वनियाँ जो पक्षियों को अप्रिय लगती हैं, उन्हें प्रसारित किया जाता है ताकि वे हवाई क्षेत्र से दूर रहें।
लेजर टेक्नोलॉजी: यूरोप और अमेरिका की तरह भारत में भी लेजर बीम का उपयोग किया जा रहा है, जिससे पक्षियों को रनवे से दूर भगाया जा सके।
3. कचरा प्रबंधन पर जोर
हवाई अड्डों के 10 किलोमीटर के दायरे में कचरा डंपिंग स्थलों को हटाने का प्रयास किया जा रहा है।
स्थानीय प्रशासन और नगर निगम को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे हवाई अड्डे के आसपास अवैध कचरा फेंकने पर जुर्माना लगाएँ।
4. ट्रेनिंग और जागरूकता अभियान
पायलटों को बर्ड स्ट्राइक से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
एयरपोर्ट कर्मचारियों और नागरिकों को भी जागरूक किया जा रहा है कि वे हवाई अड्डे के आसपास पक्षियों के आकर्षण के संभावित कारणों को कम करें।
क्या बर्ड स्ट्राइक की समस्या को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है?
हालांकि बर्ड स्ट्राइक की समस्या को पूरी तरह समाप्त करना लगभग असंभव है, लेकिन इसे न्यूनतम स्तर तक जरूर लाया जा सकता है। दुनिया भर में अलग-अलग देशों ने जो मॉडल अपनाए हैं, वे हमें सिखाते हैं कि प्राकृतिक और तकनीकी समाधानों का संतुलन ही इस समस्या को हल करने का सबसे कारगर तरीका हो सकता है।
क्या भारत में कठोर कानून लागू किए जाने चाहिए?
कई विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को भी अमेरिका और यूरोप की तरह सख्त बर्ड कंट्रोल कानून लागू करने चाहिए।
हवाई अड्डे के आसपास अवैध स्लॉटर हाउस (बूचड़खानों) और खुले कचरा डंपिंग ग्राउंड पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
हवाई अड्डे के 15 किलोमीटर के दायरे में खुले जलाशयों और गंदे नालों की सफाई होनी चाहिए ताकि पक्षी वहां आकर्षित न हों।
क्या आधुनिक तकनीक ही एकमात्र समाधान है?
ड्रोन, लेजर और साउंड वेव जैसी तकनीकें बहुत हद तक मददगार साबित हो सकती हैं, लेकिन ये पूर्ण समाधान नहीं हैं।
इसके साथ ही प्राकृतिक समाधान जैसे कि प्रशिक्षित बाज़ पक्षियों का उपयोग भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
हवाई अड्डों के पास पेड़ों की विशेष प्रजातियों का रोपण किया जाना चाहिए, जिससे वे पक्षियों के लिए अनाकर्षक बन सकें।
निष्कर्ष: सुरक्षित हवाई यात्रा के लिए ठोस कदम जरूरी
बर्ड स्ट्राइक की समस्या सिर्फ विमानन कंपनियों और हवाई अड्डा प्राधिकरण की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह एक सामूहिक प्रयास की मांग करता है। जब तक नागरिक, प्रशासन, वैज्ञानिक और सरकार मिलकर काम नहीं करेंगे, तब तक इस समस्या का पूर्ण समाधान नहीं हो पाएगा।
दिल्ली हाई कोर्ट की कार्रवाई निश्चित रूप से एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसे केवल कानूनी आदेश तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। वास्तविक बदलाव लाने के लिए नीतिगत सुधार, तकनीकी नवाचार और नागरिक सहभागिता तीनों की जरूरत है।
अगर सही समय पर सख्त कदम उठाए गए, तो हम न केवल बर्ड स्ट्राइक की घटनाओं को कम कर सकते हैं, बल्कि हवाई यात्रा को और अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बना सकते हैं।
आखिरकार, विमान की सुरक्षा केवल यात्रियों की ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सुरक्षा से जुड़ी होती है।
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