India-EU Naval Exercise 2025: हिंद महासागर में सहयोग और सुरक्षा बढ़ावा
परिचय
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Toggleभारतीय नौसेना और यूरोपीय संघ (EU) की नौसेनाएं 1 से 3 जून 2025 के बीच हिंद महासागर के रणनीतिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण संयुक्त अभ्यास आयोजित करने जा रही हैं।
यह कदम दोनों पक्षों के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। हिंद महासागर क्षेत्र आज वैश्विक समुद्री व्यापार और सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण बन चुका है।
ऐसे में भारत और यूरोपीय संघ का यह संयुक्त अभ्यास समुद्री क्षेत्र की स्थिरता और शांति सुनिश्चित करने की दिशा में एक ठोस पहल है।
क्यों है यह अभ्यास अहम?
हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा की चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। समुद्री डकैती, आतंकवाद, और गैरकानूनी मछली पकड़ने जैसे खतरों के बीच, भारत और यूरोपीय संघ का यह अभ्यास समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने, क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने, और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है।
भारत और यूरोपीय संघ दोनों ही ऐसे क्षेत्रीय और वैश्विक हित साझा करते हैं जिनमें समुद्री सुरक्षा और कूटनीतिक सहयोग की अहम भूमिका होती है।
इसलिए यह अभ्यास न केवल नौसेना के स्तर पर सहयोग को बढ़ाएगा, बल्कि दोनों के बीच राजनीतिक और रणनीतिक रिश्तों को भी मजबूत करेगा।
अभ्यास की मुख्य गतिविधियां
इस तीन दिवसीय अभ्यास में कई तरह की गतिविधियां शामिल होंगी जिनका उद्देश्य समुद्री सुरक्षा संचालन में दक्षता बढ़ाना और दोनों नौसेनाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है। प्रमुख गतिविधियां हैं:
सामरिक युद्धाभ्यास: समुद्री युद्ध की रणनीतियों का अभ्यास, जिसमें जहाजों की तैनाती, हमले और बचाव की तकनीकें शामिल होंगी।
संयुक्त समुद्री निगरानी: समुद्री क्षेत्रों की निगरानी और सुरक्षा के लिए दोनों नौसेनाओं के जहाज और विमान मिलकर काम करेंगे।
कमान निर्देश और संचार अभ्यास: आपसी संवाद और सूचना आदान-प्रदान को बेहतर बनाने के लिए संचार प्रोटोकॉल का अभ्यास।
कर्मी विनिमय और क्रॉस-डेक विज़िट: विभिन्न जहाजों पर नौसेना कर्मियों का आदान-प्रदान ताकि दोनों पक्षों के अनुभव साझा हो सकें।
आपदा राहत और मानवीय सहायता अभ्यास: समुद्री क्षेत्र में आपदा प्रबंधन और मानवीय सहायता प्रदान करने की संयुक्त क्षमता का परीक्षण।
पिछले सहयोग की झलक
भारत और यूरोपीय संघ के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग नई बात नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों पक्षों ने कई बार मिलकर समुद्री सुरक्षा मिशनों का आयोजन किया है।
अक्टूबर 2023 में, दोनों ने पश्चिम अफ्रीका के तट के पास गिनी की खाड़ी में सफलतापूर्वक संयुक्त नौसैनिक अभ्यास किया था, जिसमें दोनों पक्षों के जहाजों और विमानों ने भाग लिया था।
इसके अलावा, भारत और यूरोपीय संघ के बीच समुद्री सुरक्षा डायलॉग भी नियमित रूप से होता रहा है, जिससे दोनों पक्ष समुद्री सुरक्षा रणनीतियों और आतंकवाद व समुद्री अपराधों के खिलाफ नीतियां साझा करते रहे हैं।
इन प्रयासों ने हिंद महासागर क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा को मजबूत किया है।

समुद्री सुरक्षा में भारत और ईयू का साझा दृष्टिकोण
भारत और यूरोपीय संघ दोनों ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक खुली, स्वतंत्र, और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था के पक्षधर हैं।
वे क्षेत्रीय शांति, समुद्री स्वतंत्रता, और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के पालन को अत्यंत महत्व देते हैं। दोनों पक्ष मानते हैं कि समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा के बिना आर्थिक विकास और क्षेत्रीय स्थिरता असंभव है।
यह संयुक्त अभ्यास इसी साझा दृष्टिकोण को मूर्त रूप देता है और दोनों पक्षों को समुद्री सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने की प्रेरणा देता है।
रणनीतिक महत्व
हिंद महासागर विश्व के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है, जो तेल और अन्य व्यापारिक वस्तुओं के लिए महत्वपूर्ण है। भारत और यूरोपीय संघ दोनों के लिए यह क्षेत्र रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होने पर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है।
इसलिए भारत और यूरोपीय संघ के बीच यह संयुक्त अभ्यास क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने, समुद्री अपराधों को रोकने, और समुद्री सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस अभ्यास के बाद दोनों पक्षों के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग और भी गहरा होगा, जो भविष्य में नए सुरक्षा ढांचों के निर्माण का आधार बनेगा।
भारतीय नौसेना की भूमिका
भारतीय नौसेना ने हमेशा हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा और शांति बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह अभ्यास भारत की समुद्री सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है, जिसमें क्षेत्रीय भागीदारों के साथ सहयोग को प्राथमिकता दी जाती है।
भारतीय नौसेना अपने आधुनिक युद्धपोत, विमान, और समुद्री निगरानी तकनीकों के साथ इस अभ्यास में सक्रिय रूप से भाग लेगी।
भारत की नौसेना की विशेषज्ञता और क्षेत्रीय ज्ञान इस अभ्यास को सफल बनाने में अहम होगा। साथ ही, यह अभ्यास भारतीय नौसेना को अपनी क्षमताओं को और उन्नत करने का अवसर भी देगा।
यूरोपीय संघ की नौसेनाओं का योगदान
यूरोपीय संघ के सदस्य देशों की नौसेनाएं, जिनमें फ्रांस, इटली, स्पेन, और यूनाइटेड किंगडम प्रमुख हैं, भी इस अभ्यास में शामिल होंगी। ये देश हिंद महासागर में अपनी समुद्री उपस्थिति बढ़ा रहे हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा में योगदान देना चाहते हैं।
ईयू की नौसेनाओं की आधुनिक तकनीक और समुद्री संचालन का अनुभव इस अभ्यास को समृद्ध करेगा। साथ ही, यह यूरोपीय देशों के लिए भी हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करने का मौका है।
भविष्य के संभावित सहयोग
इस अभ्यास के सफल आयोजन के बाद भारत और यूरोपीय संघ के बीच समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग और गहरा होने की उम्मीद है। दोनों पक्ष:
नियमित संयुक्त अभ्यास करेंगे, जिससे संचालन की क्षमता बढ़ेगी।
साझा समुद्री डाटा और खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान बढ़ाएंगे।
समुद्री आपदा प्रबंधन और मानवीय सहायता में सहयोग करेंगे।
नवीनतम समुद्री सुरक्षा तकनीकों और प्रशिक्षण में अनुभव साझा करेंगे।
यह सभी पहल समुद्री सुरक्षा को और मजबूती प्रदान करेंगी और हिंद महासागर क्षेत्र को एक सुरक्षित और स्थिर समुद्री मार्ग बनाएंगी।
हिंद महासागर का रणनीतिक महत्व और सुरक्षा चुनौतियाँ
हिंद महासागर क्यों है महत्वपूर्ण?
हिंद महासागर विश्व के समुद्री व्यापार का एक प्रमुख मार्ग है। यहाँ से विश्व का लगभग 40 प्रतिशत समुद्री व्यापार और 75 प्रतिशत ऊर्जा का समुद्री मार्ग होकर गुजरता है।
भारत के लिए यह महासागर उसकी आर्थिक सुरक्षा, समुद्री सीमाओं की रक्षा और वैश्विक सामरिक महत्व की वजह से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
वहीं, यूरोपीय संघ के लिए हिंद महासागर व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा और अपनी वैश्विक उपस्थिति बनाए रखने के लिहाज से यह क्षेत्र अहम है।
सुरक्षा चुनौतियाँ
हाल के वर्षों में हिंद महासागर क्षेत्र में कई सुरक्षा चुनौतियां उभरी हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
समुद्री डकैती (Piracy): सोमालिया के तट के पास समुद्री डकैती की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। यह वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बड़ा खतरा है।
अवैध मछली पकड़ना और समुद्री संसाधनों का दोहन: क्षेत्रीय देशों के समुद्री संसाधनों का दोहन गैरकानूनी मछली पकड़ने के कारण हो रहा है।
समुद्री आतंकवाद और तस्करी: हथियार, नशीली दवाओं, और मानव तस्करी का समुद्री मार्गों से अवैध संचालन एक गंभीर समस्या है।
क्षेत्रीय तनाव: हिंद महासागर के आसपास के देशों के बीच सीमांत विवाद और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा भी सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रही है।
इन्हीं चुनौतियों का सामना करने के लिए भारत और यूरोपीय संघ का यह संयुक्त अभ्यास बेहद आवश्यक है। यह समुद्री सुरक्षा ढांचे को सुदृढ़ करेगा और सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित करेगा।
India-EU Naval Exercise की तकनीकी और सामरिक पहलू
India-EU Naval Exercise में शामिल तकनीकें और उपकरण
India-EU Naval Exercise में अत्याधुनिक समुद्री युद्धपोत, पनडुब्बियां, लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर शामिल होंगे।
भारत की तरफ से INS कोलकाता, INS सुमेधा जैसे युद्धपोत, और ईयू की तरफ से फ्रांस की फ्रिगेट, स्पेन और इटली के युद्धपोत, शामिल हो सकते हैं।
समन्वित संचालन
India-EU Naval Exercise का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है विभिन्न देशों के जहाजों का एक साथ संचालन करना। यह अभ्यास कमांड और कंट्रोल सिस्टम की दक्षता बढ़ाता है, जिससे युद्ध या संकट की स्थिति में तेज निर्णय लेने में मदद मिलती है।
समुद्री डोमेन जागरूकता
समुद्री डोमेन जागरूकता (Maritime Domain Awareness – MDA) India-EU Naval Exercise का एक अनिवार्य हिस्सा होगा। इसमें समुद्री क्षेत्रों की निगरानी, संभावित खतरों की पहचान, और त्वरित प्रतिक्रिया के लिए सूचना साझा करना शामिल है।
India-EU Naval Exercise के सामाजिक और आर्थिक पहलू
समुद्री सुरक्षा और वैश्विक व्यापार
हिंद महासागर का समुद्री मार्ग दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए जीवन रेखा की तरह है। भारत और ईयू का India-EU Naval Exercise समुद्री मार्गों को सुरक्षित बनाकर वैश्विक व्यापार में बाधा न आने देने का प्रयास है।
क्षेत्रीय देशों के साथ सहयोग
India-EU Naval Exercise से निकली सफलताएं क्षेत्रीय देशों के साथ साझा की जाएंगी, जिससे हिंद महासागर में समग्र सुरक्षा तंत्र मजबूत होगा। India-EU Naval Exercise भारत और यूरोपीय संघ के साथ-साथ क्षेत्रीय सहयोग की भी नींव रखेगा।
भारत-ईयू समुद्री सहयोग: एक लंबी यात्रा
कूटनीतिक पहल
भारत और यूरोपीय संघ के बीच समुद्री सुरक्षा संबंध कई सालों से प्रगाढ़ होते आ रहे हैं। दोनों पक्ष समुद्री आतंकवाद, समुद्री डकैती और गैरकानूनी मछली पकड़ने के खिलाफ सहयोग पर निरंतर काम कर रहे हैं।
India-EU Naval Exercise के जरिए वे एक-दूसरे के नौसैनिक संचालन में और दक्षता लाना चाहते हैं।
पिछले संयुक्त अभ्यास
2021 और 2023 में भारत और कुछ यूरोपीय देशों ने पहले भी समुद्री अभ्यास किए हैं। इन अभ्यासों में दोनों पक्षों ने समुद्री तट सुरक्षा, खोज और बचाव अभियानों, और युद्ध कौशल का आदान-प्रदान किया था।
बढ़ता रणनीतिक गठबंधन
हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती चीनी उपस्थिति को देखते हुए भारत और यूरोपीय संघ का यह सहयोग एक सामरिक कदम भी माना जा रहा है।
India-EU Naval Exercise भारत के ‘सागर’ (Security and Growth for All in the Region) पहल के अनुरूप है और ईयू की भारत-प्रशांत रणनीति के साथ मेल खाता है।
समुद्री आतंकवाद और समुद्री सुरक्षा: दोनों पक्षों की रणनीति
आतंकवाद और समुद्री अपराध की चुनौतियां
हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री आतंकवाद और तस्करी की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है। आतंकवादी समूह समुद्री मार्गों का इस्तेमाल हथियारों, विस्फोटकों, और लोगों को तस्करी करने के लिए कर रहे हैं। ऐसे में इस क्षेत्र की सुरक्षा अत्यंत जरूरी हो जाती है।
India-EU Naval Exercise में निवारण उपाय
India-EU Naval Exercise के दौरान आतंकवाद और समुद्री अपराधों से निपटने के लिए विशेष रणनीतियों का अभ्यास किया जाएगा। इसमें समुद्री तलाशी अभियान, घातक हमलों का सामना करना, और समुद्री सीमा नियंत्रण शामिल होगा।

मानवता और आपदा राहत में नौसेना की भूमिका
मानवीय सहायता और आपदा राहत
हिंद महासागर क्षेत्र प्राकृतिक आपदाओं जैसे सुनामी, चक्रवात, और बाढ़ के लिए संवेदनशील है। भारत और यूरोपीय संघ की नौसेनाएं इस क्षेत्र में मानवीय सहायता और आपदा राहत में भी सहयोग करती हैं।
India-EU Naval Exercise के दौरान राहत कार्यों का अभ्यास
India-EU Naval Exercise में मानवीय सहायता, राहत वितरण, और संकट प्रबंधन की प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण भी शामिल होगा। यह अभ्यास नौसेनाओं की तत्परता और आपसी समन्वय को मजबूत करेगा।
निष्कर्ष: India-EU Naval Exercise
भारत और यूरोपीय संघ की नौसेनाओं द्वारा 1 से 3 जून 2025 तक हिंद महासागर में आयोजित यह संयुक्त अभ्यास समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह न केवल दोनों पक्षों के बीच रणनीतिक और तकनीकी सहयोग को मजबूत करेगा, बल्कि समुद्री डकैती, आतंकवाद, और अन्य सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए भी सामूहिक तैयारियों को बढ़ावा देगा।
हिंद महासागर की वैश्विक व्यापार और ऊर्जा मार्गों की सुरक्षा के लिहाज से इस अभ्यास की भूमिका अत्यंत अहम है।
इसके जरिए भारत और यूरोपीय संघ समुद्री सुरक्षा में साझेदारी को नया आयाम देंगे, जो क्षेत्रीय देशों के लिए भी एक प्रेरणा स्रोत बनेगा।
India-EU Naval Exercise से निकली सफलताएं आने वाले समय में हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और समृद्धि के लिए एक मजबूत नींव साबित होंगी।
यह अभ्यास वैश्विक समुद्री नियमों और मुक्त, खुली समुद्री सीमाओं के प्रति दोनों पक्षों की प्रतिबद्धता का प्रतीक भी है।
इस प्रकार, India-EU Naval Exercise न केवल वर्तमान चुनौतियों का सामना करने में सक्षम होगी, बल्कि भविष्य की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था को भी बेहतर और सुरक्षित बनाएगी।
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