Maratha Military Landscapes of India: भारत की सैन्य विरासत को मिली वैश्विक पहचान!
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Toggle“Maratha Military Landscapes of India” को हाल ही में भारत के 44वें UNESCO World Heritage Site के रूप में मान्यता मिली है। यह केवल एक गौरव की बात नहीं, बल्कि भारत की सैन्य, स्थापत्य और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिलने का प्रतीक है। यह घोषणा 2025 में हुई और इसके साथ ही भारत ने वैश्विक धरोहरों की सूची में एक नया कीर्तिमान रच दिया।

यहां हम जानेंगे कि Maratha Military Landscapes of India क्या हैं, ये क्यों विशेष हैं, किन-किन किलों को इसमें शामिल किया गया है, इसका ऐतिहासिक और सामरिक महत्व क्या है, और यह भारत के लिए क्यों एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
Maratha Military Landscapes of India क्या है?
Maratha Military Landscapes of India वास्तव में केवल एक किला नहीं, बल्कि 12 ऐसे दुर्गों का समुच्चय है जो मराठा साम्राज्य की सैन्य कुशलता, वास्तुकला, भौगोलिक चातुर्य और रणनीतिक सोच का प्रमाण हैं। इन सभी किलों का निर्माण और विस्तार 17वीं से 19वीं शताब्दी के बीच हुआ।
इनमें पहाड़ी किले, समुद्री किले, द्वीपों पर बसे किले और मैदानों में स्थित किले शामिल हैं। यह विविधता ही इन्हें विशेष बनाती है। यह सभी संरचनाएँ Maratha Military Landscapes of India का अहम हिस्सा हैं, जो यह दर्शाती हैं कि मराठाओं ने अलग-अलग भू-आकृतिक परिस्थितियों में सैन्य संरचनाएँ विकसित की थीं।
UNESCO में शामिल होने का महत्व
जब कोई धरोहर UNESCO की सूची में आती है, तो इसका मतलब है कि वह स्थान न केवल राष्ट्रीय, बल्कि वैश्विक दृष्टि से अमूल्य है।
Maratha Military Landscapes of India को शामिल किया जाना न केवल मराठा साम्राज्य की सैन्य विरासत को मान्यता देना है, बल्कि भारत की स्थापत्य परंपरा, क्षेत्रीय विविधता, और रणनीतिक सोच को भी उजागर करता है।
यह भारत की पहचान को और मजबूत बनाता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए इतिहास को संरक्षित करता है।
किन किलों को शामिल किया गया है?
Maratha Military Landscapes of India में जिन 12 प्रमुख किलों को शामिल किया गया है, वे हैं:
- शिवनेरी – शिवाजी महाराज का जन्मस्थान
- रायगड़ – हिंदवी स्वराज्य की राजधानी
- प्रतापगढ़ – शिवाजी-अफज़लखान युद्ध का साक्षी
- लोहगढ़ – एक अभेद्य पहाड़ी दुर्ग
- पन्हाला – सामरिक दृष्टि से उत्तम
- राजगढ़ – शिवाजी की आरंभिक राजधानी
- सिंधुदुर्ग – समुद्र में बना किला
- सुवर्णदुर्ग – नौसैनिक निगरानी किला
- विजयदुर्ग – पश्चिमी तट का रक्षक
- खंडेरी – द्वीपीय किला
- साल्हेर – मुगलों से जीता गया पहला पहाड़ी किला
- गिंजी (Gingee) – तमिलनाडु में स्थित एक असाधारण किला
इन सभी स्थलों को Maratha Military Landscapes of India के एकल परिदृश्य (serial nomination) के रूप में UNESCO ने स्वीकृत किया।
Maratha Military Landscapes of India का इतिहास
मराठा साम्राज्य की नींव छत्रपति शिवाजी महाराज ने रखी थी, जो केवल एक वीर योद्धा नहीं बल्कि एक असाधारण सैन्य रणनीतिकार भी थे। उन्होंने पहाड़ी क्षेत्रों, समुद्री सीमाओं और व्यापारिक मार्गों की रक्षा के लिए जिन किलों का निर्माण या पुनर्निर्माण किया, वे बाद में Maratha Military Landscapes of India का हिस्सा बने।
ये किले युद्ध के समय आश्रय, रणनीतिक योजना और आपूर्ति का केंद्र बने। शिवाजी महाराज की गुरिल्ला युद्धनीति (guerrilla warfare), ‘हिंदवी स्वराज्य’ की स्थापना और किलों की सुरक्षा नीति, सब कुछ इन किलों में समाहित था।
भौगोलिक विविधता: वास्तुकला और रणनीति का संगम
Maratha Military Landscapes of India की सबसे बड़ी खूबी इसकी भौगोलिक विविधता है:
Hill Forts: जैसे शिवनेरी, राजगढ़, रायगढ़, साल्हेर
Coastal Forts: जैसे विजयदुर्ग, सिंधुदुर्ग
Island Forts: जैसे खंडेरी, सुवर्णदुर्ग
Forest-Hill Forts: जैसे प्रतापगढ़
Southern Stronghold: गिंजी फोर्ट, तमिलनाडु
हर एक किला उस क्षेत्र की जलवायु, भूगोल और रणनीति के अनुसार बनाया गया है। यही विविधता उन्हें विशिष्ट बनाती है।
UNESCO में चयन की प्रक्रिया
Maratha Military Landscapes of India को UNESCO World Heritage Site में शामिल करवाने की प्रक्रिया बहुत ही लंबी, तकनीकी और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित होती है। इस प्रक्रिया की शुरुआत भारत सरकार द्वारा 2023 के अंत में की गई थी जब इसे Tentative List में डाला गया था।
इसके बाद निम्नलिखित चरणों को पार किया गया:
1. Nomination Dossier की तैयारी:
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने एक विस्तृत नामांकन रिपोर्ट तैयार की, जिसमें 12 किलों की वास्तुकला, रणनीतिक उपयोग, ऐतिहासिक महत्व, वर्तमान स्थिति और संरक्षण योजनाओं का विवरण था।
2. ICOMOS मूल्यांकन:
International Council on Monuments and Sites (ICOMOS) ने इन स्थलों का भौतिक सर्वेक्षण किया और इन्हें उनके Cultural Criteria (iv) और (vi) पर जांचा।
3. UNESCO समिति की बैठक:
UNESCO की 47वीं समिति की बैठक जुलाई 2025 में पेरिस में आयोजित हुई, जिसमें सर्वसम्मति से Maratha Military Landscapes of India को विश्व धरोहर घोषित किया गया।
यह न केवल एक प्रशासनिक सफलता थी, बल्कि भारत की सैन्य और सांस्कृतिक समझ को वैश्विक मंच पर मान्यता भी थी।
भारत सरकार और राज्य सरकार की भूमिका
Maratha Military Landscapes of India को UNESCO में स्थान दिलवाने में कई एजेंसियों और सरकारों की साझा भूमिका रही:
➤ केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय:
तकनीकी दस्तावेज़ तैयार करना
अंतरराष्ट्रीय संबंधों और प्रस्तुति में प्रमुख योगदान
➤ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI):
किलों की ऐतिहासिक महत्ता और संरचनात्मक विश्लेषण
संरक्षण की योजनाएँ बनाना और दस्तावेज़ तैयार करना
➤ महाराष्ट्र एवं तमिलनाडु राज्य सरकारें:
स्थानीय प्रशासन, भूमि स्वामित्व, विकास योजनाओं में योगदान
क्षेत्रीय इतिहास और जनभागीदारी को प्रेरित करना
Maratha Military Landscapes of India का नामांकन एक उदाहरण है कि जब केंद्र और राज्य साथ मिलकर काम करते हैं, तो वैश्विक पहचान संभव होती है।
वैश्विक मंच पर भारत का गौरव
अब भारत के पास कुल 44 UNESCO World Heritage Sites हैं — जिसमें स्थापत्य, प्राकृतिक, मिश्रित, और सांस्कृतिक धरोहरें शामिल हैं।
Maratha Military Landscapes of India के शामिल होने से भारत ने एक मजबूत संदेश दिया है:
हमारा इतिहास केवल कहानियाँ नहीं, वैश्विक धरोहर है
मराठा साम्राज्य की सैन्य क्षमता वैश्विक अनुसंधान योग्य है
भारतीय परंपराएँ और ज्ञान विश्व में अग्रणी हैं
संरक्षण और विकास योजनाएँ
अब जब Maratha Military Landscapes of India को वैश्विक मान्यता मिल चुकी है, तो इसकी रक्षा और विकास की ज़िम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। UNESCO ने भारत को इसके लिए स्पष्ट निर्देश दिए हैं:
➤ कोर और बफर ज़ोन की योजना:
Core Area (किले का संरक्षित क्षेत्र): ~1,577 हेक्टेयर
Buffer Zone (सुरक्षा घेरा): ~96,000 हेक्टेयर
➤ संरक्षण के उपाय:
समय-समय पर मरम्मत और रखरखाव
पर्यटन पर नियंत्रण ताकि मूल संरचना प्रभावित न हो
डिजिटल डॉक्युमेंटेशन और स्कैनिंग
➤ समुदाय की भागीदारी:
स्थानीय लोगों को रोजगार
किलों के आसपास इको-टूरिज्म बढ़ाना
छात्रों के लिए अध्ययन केंद्रों की स्थापना
इन सब प्रयासों के पीछे उद्देश्य एक ही है: Maratha Military Landscapes of India को केवल स्मारक नहीं, बल्कि जीवंत सांस्कृतिक प्रतीक बनाए रखना।
पर्यटन, शिक्षा और रोजगार की संभावनाएँ
अब हम बात करेंगे कि कैसे Maratha Military Landscapes of India भारत के टूरिज्म और लोकल इकोनॉमी को नई दिशा देंगे:
पर्यटन को बढ़ावा:
अंतरराष्ट्रीय टूरिस्ट अब इन किलों को देखने आएँगे
Maharashtra-Tamil Nadu किला पर्यटन मार्ग विकसित किया जाएगा
होमस्टे, गाइड ट्रेनिंग, संग्रहालयों की स्थापना से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा
शैक्षणिक अवसर:
विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के लिए नया विषय
वास्तुकला, युद्ध नीति, जल प्रबंधन आदि पर शोध
स्कूलों में स्थानीय इतिहास को पढ़ाया जाएगा
सांस्कृतिक जागरूकता:
युवाओं में मराठा इतिहास के प्रति गौरव
लोक कला, चित्रकला, और सांस्कृतिक महोत्सवों के ज़रिए जागरूकता बढ़ेगी

Maratha Military Landscapes of India की चुनौतियाँ
UNESCO का दर्जा मिलना जितना गौरव की बात है, उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी भी है। Maratha Military Landscapes of India के समक्ष कुछ प्रमुख चुनौतियाँ निम्न हैं:
1. संरक्षण बनाम पर्यटन
भारी संख्या में आने वाले पर्यटकों के कारण संरचनाओं पर प्रभाव पड़ सकता है।
समाधान: सीमित और नियंत्रित प्रवेश, डिजिटल टिकटिंग, ईको-फ्रेंडली टूरिज्म।
2. प्राकृतिक क्षरण
बारिश, पवन, नमी आदि कारणों से दीवारें और आधारभूत संरचनाएँ कमजोर हो सकती हैं।
समाधान: नियमित रखरखाव, वैज्ञानिक मरम्मत तकनीकों का उपयोग।
3. अतिक्रमण और असंवेदनशील विकास
कुछ किलों के आसपास अनियोजित निर्माण से दृश्य सौंदर्य और ऐतिहासिक संदर्भ प्रभावित होते हैं।
समाधान: कोर व बफर ज़ोन में निर्माण नियंत्रण।
4. स्थानीय समुदाय की भागीदारी की कमी
अगर स्थानीय जनता इस गौरव का हिस्सा नहीं बनेगी, तो संरक्षण सतत नहीं हो सकता।
समाधान: सामुदायिक प्रशिक्षण, युवाओं की भागीदारी, स्कूल स्तर पर जागरूकता।
लोगों की भूमिका: आपकी भागीदारी ज़रूरी है
Maratha Military Landscapes of India को केवल सरकार या UNESCO नहीं बचा सकते — इसके सच्चे रक्षक भारत के नागरिक ही हैं।
आप क्या कर सकते हैं?
किलों का दौरा करते समय उनकी दीवारों पर कुछ न लिखें
प्लास्टिक/कचरा वहाँ न फेंके
अपने बच्चों को इस इतिहास के बारे में बताएं
सोशल मीडिया पर जागरूकता फैलाएं
स्थानीय गाइड से जानकारी लेकर पर्यटन करें
Maratha Military Landscapes of India को एक ‘People’s Heritage’ बनाना ही इसका स्थायी सम्मान होगा।
दीर्घकालीन प्रभाव
आइए देखें कि इस वैश्विक मान्यता से भारत को आगे क्या लाभ होंगे:
शैक्षणिक स्तर पर:
वास्तुकला, इतिहास और सामरिक विज्ञान के कोर्सों में नया विषय
इंटरनेशनल स्कॉलरशिप्स और रिसर्च फंडिंग में वृद्धि
स्टूडेंट्स के लिए इंटर्नशिप, हेरिटेज स्टडी टूर
आर्थिक स्तर पर:
पर्यटन उद्योग को बढ़ावा
होटल, गाइड, हस्तशिल्प, परिवहन क्षेत्रों में रोजगार
ग्रामीण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था सशक्त
कूटनीतिक स्तर पर:
सांस्कृतिक डिप्लोमेसी को मज़बूती
भारत की पहचान एक ‘विरासत-समृद्ध राष्ट्र’ के रूप में और प्रबल
ASEAN देशों के साथ सैन्य इतिहास साझा करने की नई राह
Maratha Military Landscapes of India भारत की सॉफ्ट पावर को बढ़ाने का प्रभावशाली साधन बन सकता है।
निष्कर्ष: गर्व, जिम्मेदारी और भविष्य
Maratha Military Landscapes of India को UNESCO World Heritage Site में शामिल किया जाना सिर्फ एक ऐतिहासिक उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत के गौरव, आत्म-सम्मान और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है।
यह भारत को याद दिलाता है कि:
हमारा इतिहास केवल किताबों में नहीं, पत्थरों में साँस लेता है
हमारी विरासत अब विश्व मंच पर आदर के साथ देखी जा रही है
अब हमें इसे अगली पीढ़ियों के लिए संरक्षित, प्रस्तुत और सम्मानित करना है
Maratha Military Landscapes of India अब केवल 12 किलों का नाम नहीं, बल्कि एक राष्ट्र की स्मृति, आत्मा और आत्मविश्वास का रूप है।
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