Mukundra Hills Tiger Reserve: बेस्ट सफारी, वनस्पति, जीव-जंतु और यात्रा टिप्स
प्रस्तावना (Introduction)
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Toggleभारत का वन्यजीव संसार हमेशा से अपनी विविधता और अद्भुत आकर्षण के लिए प्रसिद्ध रहा है। राजस्थान, जो मुख्य रूप से रेगिस्तानी भूमि के रूप में जाना जाता है, केवल रेत और ऊँटों तक सीमित नहीं है बल्कि यहाँ की धरती पर हरियाली, नदियाँ और गहरी घाटियाँ भी मौजूद हैं। इन्हीं में से एक है मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिज़र्व (Mukundra Hills Tiger Reserve – MHTR)।
यह राजस्थान का तीसरा टाइगर रिज़र्व है, जिसने बीते कुछ वर्षों में न केवल जैव विविधता संरक्षण में अपना नाम बनाया है बल्कि पर्यटन, पारिस्थितिकी और अनुसंधान के क्षेत्र में भी अलग पहचान बनाई है।

मुकुंदरा हिल्स का इतिहास (History of Mukundra Hills Tiger Reserve)
पहले इस क्षेत्र को दर्रा वन्यजीव अभयारण्य (Darrah Wildlife Sanctuary) के नाम से जाना जाता था।
1955 में इसे औपचारिक रूप से अभयारण्य घोषित किया गया।
2004 में इस क्षेत्र के साथ जवाहर सागर अभयारण्य और चंबल अभयारण्य को मिलाकर Mukundra Hills Tiger Reserve बनाया गया।
2013 में Mukundra Hills Tiger Reserve टाइगर रिज़र्व का दर्जा मिला।
महत्वपूर्ण बिंदु:
यहाँ शिकार पर पहले महाराजा कोटा का विशेषाधिकार था।
यह स्थान मुगलों और मराठों के दौर में भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा।
टाइगर संरक्षण योजना (Project Tiger) के अंतर्गत राजस्थान का Ranthambore और Sariska के बाद यह तीसरा टाइगर रिज़र्व बना।
भौगोलिक स्थिति और क्षेत्र (Geographical Location & Area)
Mukundra Hills Tiger Reserve राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र में स्थित है।
यह चार जिलों में फैला है: कोटा, बूंदी, झालावाड़ और चित्तौड़गढ़।
कुल क्षेत्रफल: लगभग 760 वर्ग किलोमीटर।
इसमें 417 वर्गकिमी कोर क्षेत्र और 343 वर्गकिमी बफर क्षेत्र है।
रिज़र्व का भू-भाग मुख्यतः दो पर्वत श्रृंखलाओं—मुकुंदरा और गगरोला—के बीच स्थित घाटी पर फैला हुआ है।
यहाँ से चंबल, काली सिंध, आहू और रामज़ान नदियाँ बहती हैं, जो पूरे क्षेत्र को हरियाली और जीवन प्रदान करती हैं।
मुकुंदरा की जलवायु (Climate of Mukundra Hills)
ग्रीष्मकाल (अप्रैल–जून): तापमान 40–45 डिग्री तक पहुँच जाता है।
वर्षा ऋतु (जुलाई–सितंबर): औसत वर्षा लगभग 800–1000 मिमी।
शीत ऋतु (नवंबर–फरवरी): तापमान 8–20 डिग्री।
सफारी और पर्यटन के लिए सर्वश्रेष्ठ समय अक्टूबर से मार्च है।
मुकुंदरा की वनस्पति (Flora of Mukundra Hills)
यह क्षेत्र मुख्य रूप से शुष्क पर्णपाती वन (Dry Deciduous Forests) से आच्छादित है।
प्रमुख वृक्ष प्रजातियाँ:
धोक (Anogeissus pendula)
खैर (Acacia catechu)
बबूल
पलाश (Butea monosperma)
शिशम (Dalbergia sissoo)
सालर (Boswellia serrata)
इन वृक्षों के बीच झाड़ियाँ और औषधीय पौधों की भी बहुतायत है, जिससे यह क्षेत्र पारिस्थितिकी और आयुर्वेदिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण बनता है।
मुकुंदरा की जीव-जंतु विविधता (Fauna & Wildlife)
प्रमुख मांसाहारी (Carnivores):
बंगाल टाइगर (Royal Bengal Tiger)
भारतीय तेंदुआ
भेड़िया
सियार
स्लॉथ भालू
प्रमुख शाकाहारी (Herbivores):
चीतल (Spotted Deer)
सांभर
नीलगाय
चिंकारा
जंगली सूअर
सरीसृप (Reptiles):
घड़ियाल
मगरमच्छ
मॉनिटर लिज़ार्ड
विभिन्न प्रकार के साँप
पक्षी (Birds):
सारस क्रेन
स्किमर
किंगफिशर
गरुड़
बाज
यहाँ अब तक लगभग 260+ पक्षी प्रजातियाँ दर्ज की जा चुकी हैं।
टाइगर पुनर्वास और संरक्षण (Tiger Relocation & Conservation Efforts)
2018 में रणथंभौर से पहला नर बाघ (T-91) यहाँ लाया गया।
बाद में मादा बाघिनों को भी ट्रांसलोकेट किया गया ताकि प्रजनन की संभावना बढ़े।
हाल ही में यहाँ पहली बार बाघिन और शावक देखे गए, जिससे उम्मीदें और भी मजबूत हुई हैं।
वन विभाग और NTCA (National Tiger Conservation Authority) ने यहाँ शिकार-जीवों की संख्या बढ़ाने के लिए चीतल और सांभर का पुनर्वास किया।
मुकुंदरा में पर्यटन (Tourism in Mukundra Hills)
सफारी ज़ोन: यहाँ जिप्सी सफारी की सुविधा है, जहाँ सुबह और शाम दोनों समय जंगल भ्रमण किया जा सकता है।
बोट सफारी: चंबल नदी में नौका विहार पर्यटकों को अनोखा अनुभव देता है।
बर्ड वॉचिंग: पक्षी प्रेमियों के लिए यह क्षेत्र किसी स्वर्ग से कम नहीं है।
एडवेंचर गतिविधियाँ: जंगल ट्रेकिंग, वाइल्डलाइफ़ फोटोग्राफी और नेचर कैंप।
एंट्री शुल्क और सफारी बुकिंग ऑनलाइन व वन विभाग कार्यालयों से की जा सकती है।
स्थानीय संस्कृति और महत्त्व (Local Culture & Significance)
यह क्षेत्र हाड़ौती संस्कृति से जुड़ा हुआ है।
कोटा और बूंदी अपने किलों, चित्रकला और पारंपरिक हस्तशिल्प के लिए प्रसिद्ध हैं।
मुकुंदरा का पर्यटन यहाँ के स्थानीय समुदाय के लिए रोज़गार का प्रमुख साधन भी है।

चुनौतियाँ और समस्याएँ (Challenges & Issues)
टाइगर पुनर्वास की धीमी गति।
मानव-वन्यजीव संघर्ष।
अवैध शिकार और चराई का दबाव।
बफर ज़ोन में ग्रामीण गतिविधियाँ।
प्रशासनिक देरी और संसाधनों की कमी।
भविष्य की संभावनाएँ (Future Prospects)
मध्य प्रदेश और अन्य रिज़र्व से बाघों का स्थानांतरण।
शिकार जीवों की संख्या में वृद्धि।
इको-टूरिज्म को बढ़ावा।
स्थानीय समुदाय की सहभागिता से बेहतर संरक्षण।
मुकुंदरा को राजस्थान का प्रमुख “वाइल्डलाइफ़ डेस्टिनेशन” बनाने की योजना।
निष्कर्ष
Mukundra Hills Tiger Reserve राजस्थान की हाड़ौती धरती का वह रत्न है, जो न केवल वन्यजीव संरक्षण की दिशा में नई आशा जगाता है बल्कि सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पर्यटन दृष्टि से भी अनमोल धरोहर है। यह क्षेत्र शुष्क पर्णपाती वनों, नदियों और गहरी घाटियों से घिरा हुआ है, जो इसे प्राकृतिक रूप से एक अनूठा जैव मंडल बनाते हैं।
पिछले कुछ दशकों में यहाँ टाइगर पुनर्वास (Tiger Relocation) की पहल ने इसे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बनाया है।
रणथंभौर और सारिस्का जैसे स्थापित टाइगर रिज़र्व के बाद Mukundra Hills Tiger Reserve में बाघों का नया परिवार बसाना राजस्थान सरकार और NTCA के संरक्षण प्रयासों का बड़ा कदम है। हाल ही में बाघिन और शावक के दिखने से यह साबित हो गया है कि यह क्षेत्र बाघों के लिए उपयुक्त आवास बन सकता है।
Mukundra Hills Tiger Reserve केवल टाइगर ही नहीं बल्कि तेंदुए, स्लॉथ भालू, सांभर, चीतल, नीलगाय और लगभग 260+ पक्षी प्रजातियों का भी सुरक्षित घर है। यहाँ की जैव विविधता इस तथ्य को रेखांकित करती है कि यह क्षेत्र पश्चिमी भारत का एक महत्वपूर्ण वाइल्डलाइफ़ कॉरिडोर है।
पर्यटन की दृष्टि से Mukundra Hills Tiger Reserve तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यहाँ की जिप्सी सफारी, बोट सफारी, बर्ड वॉचिंग और फोटोग्राफी टूर पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। यह स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और आर्थिक विकास का अवसर भी प्रदान करता है।
हालांकि, चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं—जैसे कि मानव-वन्यजीव संघर्ष, अवैध शिकार, बफर ज़ोन पर दबाव और संसाधनों की कमी। यदि इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटा जाए, तो मुकुंदरा आने वाले वर्षों में देश का एक मॉडल टाइगर रिज़र्व बन सकता है।
अंततः, Mukundra Hills Tiger Reserve केवल एक संरक्षित क्षेत्र नहीं, बल्कि एक आशा का प्रतीक है। यह हमें याद दिलाता है कि यदि वैज्ञानिक दृष्टिकोण, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और स्थानीय जनसहभागिता एक साथ जुड़ जाएँ, तो हम विलुप्ति की कगार पर खड़े जीवों को भी नया जीवन दे सकते हैं।
राजस्थान की यह भूमि अब केवल वीरता और राजवंशों के इतिहास के लिए ही नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण और जैव विविधता पुनर्जीवन की मिसाल के रूप में भी जानी जाएगी।
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