India’s Role in the Multipolar World: 2025 में क्यों बढ़ेगा भारत का Global Impact
प्रस्तावना: बदलते विश्व में भारत का उभरता स्वरूप
Table of the Post Contents
Toggle21वीं सदी में वैश्विक राजनीति का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। जहाँ कभी दो या तीन महाशक्तियाँ पूरी दुनिया के निर्णय करती थीं, वहीं अब दुनिया बहुध्रुवीय (Multipolar) दिशा में आगे बढ़ रही है। इस बदलाव में India’s role in the multipolar world दिन-ब-दिन और भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है।

हाल ही में सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात के बाद स्पष्ट कहा, “जैसे-जैसे दुनिया अनिवार्य रूप से बहुध्रुवीयता की ओर अग्रसर हो रही है, भारत की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है।” यह कथन केवल राजनयिक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक यथार्थ पर आधारित गहन वैश्विक मान्यता है।
बहुध्रुवीयता क्या है और क्यों आवश्यक है?
Multipolar world वह व्यवस्था है जिसमें अनेक राष्ट्र शक्ति, प्रभाव और नेतृत्व के ध्रुव बन जाते हैं। यह द्विध्रुवीय (जैसे अमेरिका–सोवियत संघ) या एकध्रुवीय (जैसे केवल अमेरिका) व्यवस्था से बिल्कुल भिन्न होती है।
इस व्यवस्था में India’s role in the multipolar world न केवल संतुलन बनाए रखने का होता है, बल्कि वैश्विक सहयोग, व्यापार, शांति और विकास में नेतृत्वकारी भूमिका भी निभानी होती है।
भारत की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता
🔹 कूटनीतिक शक्ति
भारत G20, BRICS, SCO, QUAD जैसे संगठनों का सक्रिय और प्रभावशाली सदस्य है। 2023 में G20 की अध्यक्षता भारत ने जिस तरह से की, वह एक उदाहरण बन गया।
🔹 आर्थिक शक्ति
भारत अब विश्व की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और 2030 तक तीसरे स्थान पर पहुँचने की दिशा में अग्रसर है। यह आर्थिक मजबूती India’s role in the multipolar world को और सशक्त बनाती है।
🔹 सैन्य शक्ति
तीनों सेनाओं में तेजी से आधुनिकीकरण, परमाणु शक्ति और रणनीतिक साझेदारियों ने भारत को रक्षा के क्षेत्र में भी विश्वसनीय बनाया है।
🔷 भारत–सिंगापुर संबंध: भविष्य के साझेदार
सिंगापुर और भारत के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध दशकों पुराने हैं। दोनों देश “Comprehensive Strategic Partnership” में बंधे हैं और 2025 में इसके 10 वर्ष पूरे होंगे। विवियन बालाकृष्णन की भारत यात्रा इस साझेदारी को और मजबूत करती है।
उनके शब्दों में, “भारत केवल एशिया ही नहीं, पूरी दुनिया के लिए अवसर का एक बड़ा केंद्र है।” यह कथन सीधे India’s role in the multipolar world की पुष्टि करता है।
🔷 Indo-Pacific में भारत का सामरिक महत्व
Indo-Pacific क्षेत्र आज की भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बन चुका है। इस क्षेत्र में India’s role in the multipolar world कई रूपों में देखा जा सकता है:
QUAD के माध्यम से अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया के साथ रणनीतिक संतुलन।
Blue Economy, समुद्री सुरक्षा और आपदा प्रबंधन में नेतृत्व।
ASEAN देशों के साथ मजबूत व्यापारिक व सांस्कृतिक संबंध।
🔷 बहुध्रुवीय विश्व में भारत के 5 प्रमुख स्तंभ
- कूटनीतिक लचीलापन (Diplomatic Flexibility)
आर्थिक उदारीकरण और तकनीकी वृद्धि
जनशक्ति और जनसंख्या लाभांश
सांस्कृतिक प्रभाव और सभ्यतागत संवाद
सस्टेनेबल विकास और क्लाइमेट लीडरशिप
इन पाँचों स्तंभों के माध्यम से India’s role in the multipolar world और भी ज्यादा स्पष्ट और सशक्त बनता जा रहा है।
🔷 जयशंकर की कूटनीति: निर्णायक दृष्टिकोण
भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर का विश्व मंचों पर दृष्टिकोण अत्यंत स्पष्ट और संतुलित है। उनका यह कथन प्रसिद्ध है: “हम अपने हितों के लिए स्पष्ट, परिपक्व और निर्णायक तरीके से खड़े होंगे।” यही नीति India’s role in the multipolar world को स्पष्ट दिशा प्रदान करती है।
🔷 भविष्य की दिशा: भारत किस ओर?
2030 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की योजना
चंद्रयान और गगनयान जैसे स्पेस मिशन से तकनीकी शक्ति का प्रदर्शन
डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया के ज़रिए वैश्विक नवाचार केंद्र बनना
International Solar Alliance जैसे वैश्विक संस्थानों की अगुआई
यह सभी पहलू यह दिखाते हैं कि आने वाले वर्षों में India’s role in the multipolar world केवल एक भागीदार की नहीं, बल्कि एक नेतृत्वकर्ता की होगी।
भारत की आर्थिक शक्ति: बहुध्रुवीय विश्व में निर्णायक योगदान
भारत की अर्थव्यवस्था तेज़ी से विकास कर रही है। IMF और World Bank जैसे संस्थानों के अनुसार, भारत अब विश्व की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, और वर्ष 2030 तक यह तीसरे स्थान पर पहुँच सकता है।
FDI (Foreign Direct Investment) में निरंतर वृद्धि
Make in India जैसे अभियानों से मैन्युफैक्चरिंग में विस्तार
स्टार्टअप इंडिया से युवा नेतृत्व और नवाचार को बढ़ावा
इन सभी आर्थिक पहलों के ज़रिए भारत की स्थिति न केवल क्षेत्रीय ताकत बन रही है, बल्कि India’s role in the multipolar world को स्पष्ट रूप से परिभाषित कर रही है। बहुध्रुवीयता का अर्थ केवल सैन्य शक्ति नहीं होता, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता और वैश्विक आर्थिक योगदान भी उतना ही ज़रूरी है – और भारत इसी दिशा में दृढ़ता से आगे बढ़ रहा है।
🔷 सांस्कृतिक शक्ति: सॉफ्ट पावर के रूप में भारत
भारत की सभ्यता, दर्शन, योग, आयुर्वेद, और हिंदी जैसी भाषाओं का वैश्विक विस्तार आज एक नई पहचान बन चुकी है। UNESCO के अनुसार, भारत के पास विश्व की सबसे विविध सांस्कृतिक धरोहरों में से एक है।
International Yoga Day को 180+ देशों में मनाया जाता है
बॉलीवुड और भारतीय संगीत की लोकप्रियता वैश्विक स्तर पर बढ़ी है
संस्कृत और भारतीय दर्शन पर अमेरिका, यूरोप और एशिया में शोध
इस सॉफ्ट पावर के माध्यम से भारत विश्व को जोड़ने और मानवीय मूल्यों को केंद्र में लाने की कोशिश कर रहा है। इस सांस्कृतिक पहुँच का भी India’s role in the multipolar world में अहम योगदान है।
🔷 डिजिटल प्रभाव: टेक्नोलॉजी से नेतृत्व
भारत दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल लोकतंत्र है। आधार, UPI, और CoWIN जैसे प्लेटफॉर्म आज डिजिटल गवर्नेंस के मॉडल बन चुके हैं।
UPI का वैश्विक विस्तार: सिंगापुर, UAE, फ्रांस में भारत की भुगतान प्रणाली लागू
डिजिटल इंडिया मिशन: 100 करोड़ से अधिक लोगों को डिजिटल पहचान
AI और सेमीकंडक्टर निर्माण की दिशा में मजबूत रणनीति
डिजिटल शक्ति की यह छलांग बहुध्रुवीय व्यवस्था में भारत को टेक्नोलॉजिकल नेता बना रही है। India’s role in the multipolar world अब सिर्फ परंपरागत नहीं रहा, बल्कि इसमें तकनीकी नेतृत्व की भूमिका भी शामिल है।
🔷 वैश्विक मंचों पर भारत की आवाज
भारत का दृष्टिकोण अब निष्क्रिय नहीं, बल्कि सक्रिय और अग्रणी है। G20 शिखर सम्मेलन, COP सम्मेलन, BRICS बैठकें, और SCO मंचों पर भारत ने बहुपक्षीय समन्वय में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
G20 की अध्यक्षता के दौरान वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ को मंच प्रदान किया गया
BRICS में भारत ने विकासशील देशों की आर्थिक न्याय की मांग को आगे बढ़ाया
QUAD जैसे सुरक्षा मंचों पर भारत की संतुलनकारी भूमिका
इसमें संदेह नहीं कि इन वैश्विक मंचों पर India’s role in the multipolar world निर्णायक और प्रेरणास्पद रहा है।

🔷 भारत की जलवायु नीति और वैश्विक नेतृत्व
जलवायु संकट आज के समय की सबसे बड़ी वैश्विक चुनौती है, और भारत ने इस दिशा में अपनी नीति के ज़रिए ग्रीन डिप्लोमेसी को नया आकार दिया है।
International Solar Alliance (ISA): 100+ देशों को जोड़ने वाली भारत की पहल
LiFE (Lifestyle for Environment) अभियान का वैश्विक प्रभाव
अक्षय ऊर्जा में निवेश: 2030 तक 500 GW के लक्ष्य की योजना
यह पहलें न केवल भारत को जलवायु नेता बनाती हैं, बल्कि यह भी दिखाती हैं कि India’s role in the multipolar world में पर्यावरण संरक्षण एक मूल स्तंभ बनता जा रहा है।
🔷 युवा शक्ति और मानव संसाधन
भारत की जनसंख्या औसत आयु 29 वर्ष है – अर्थात यह दुनिया का सबसे युवा देश है। यही जनशक्ति भारत को विश्व का कार्यशक्ति केंद्र बनाती है।
Skill India और PM Kaushal Vikas Yojana से करोड़ों युवाओं को प्रशिक्षित किया गया
विदेशी कंपनियाँ भारत में Tech & BPO Talent की वजह से निवेश कर रही हैं
Global IT सेक्टर में 25% workforce भारतीय
इस जनसांख्यिकीय लाभांश से भारत की भूमिका विश्व में और भी मजबूत हो जाती है। यही जनशक्ति India’s role in the multipolar world की आधारशिला है।
🔷 भारत की रक्षा और सामरिक नीति
भारत ने अपनी रक्षा नीति में आक्रामक नहीं, बल्कि संतुलित और सक्रिय रणनीति को चुना है।
Rafale, Agni-V, Tejas जैसे स्वदेशी हथियारों का निर्माण
Defence Corridor, Make in India के तहत हथियारों का निर्यात
One Border, One Force की नीति
भारत की सुरक्षा नीति शांति की राह को अपनाते हुए सामरिक दृढ़ता का उदाहरण है, जो वैश्विक स्थिरता के लिए आवश्यक है। यह भी स्पष्ट करता है कि India’s role in the multipolar world सैन्य दृष्टिकोण से भी अत्यंत प्रभावशाली है।
निष्कर्ष: भारत — बहुध्रुवीय विश्व का आत्मनिर्भर ध्रुव
जैसे‑जैसे वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और कूटनीति बहुध्रुवीयता की ओर बढ़ रही है, भारत का कद वैश्विक मंचों पर पहले से कहीं अधिक ऊँचा हो गया है। यह स्पष्ट होता जा रहा है कि India’s role in the multipolar world केवल एक सहयोगी या दर्शक की भूमिका नहीं है, बल्कि वह एक सशक्त निर्णायक की है।
भारत आज एक ऐसा राष्ट्र है जो विकास और परंपरा दोनों को संतुलित करते हुए दुनिया को शांति, स्थिरता और सहयोग की ओर प्रेरित कर रहा है।
आर्थिक दृष्टि से भारत तेज़ी से दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में जगह बना रहा है, तकनीकी क्षेत्र में UPI, डिजिटल इंडिया, और स्टार्टअप कल्चर के ज़रिए नेतृत्व कर रहा है, वहीं जलवायु परिवर्तन और वैश्विक न्याय के मुद्दों पर अपनी नीतियों से पूरी दुनिया को रास्ता दिखा रहा है।
सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन जैसे विश्वनेताओं के कथन भारत की इस भूमिका की पुष्टि करते हैं — कि India’s role in the multipolar world अनिवार्य, अपरिहार्य और अपरिवर्तनीय है।
भारत की शक्ति केवल उसकी जनसंख्या, अर्थव्यवस्था या सेना तक सीमित नहीं है — उसकी असली शक्ति है उसके विचार, उसके मूल्य और उसका संतुलनपूर्ण दृष्टिकोण। यही वह विशेषता है जो भारत को इस बदलती दुनिया में एक भरोसेमंद और स्थिर स्तंभ बनाती है।
अतः यह कहने में कोई संकोच नहीं कि आने वाले वर्षों में India’s role in the multipolar world और भी अधिक निर्णायक, नेतृत्वकारी और ऐतिहासिक होने वाला है। भारत न केवल अपनी सीमाओं के भीतर बल्कि समूचे वैश्विक परिदृश्य पर नई विश्व व्यवस्था का मार्गदर्शक बनकर उभरेगा।
Related
Discover more from Aajvani
Subscribe to get the latest posts sent to your email.