NISAR Mission 2025: NASA-ISRO का पहला Dual Radar Satellite जो बदल देगा पृथ्वी अवलोकन का भविष्य
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Toggleविज्ञान और प्रौद्योगिकी के इस युग में पृथ्वी का गहन अध्ययन वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी दिशा में भारत और अमेरिका की संयुक्त अंतरिक्ष एजेंसियाँ — ISRO और NASA — मिलकर एक महत्त्वाकांक्षी पृथ्वी अवलोकन मिशन NISAR को विकसित कर रही हैं। यह मिशन आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

NISAR क्या है?
NISAR का पूर्ण नाम है – NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar। यह एक संयुक्त पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है जिसे NASA और ISRO द्वारा मिलकर तैयार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पृथ्वी की सतह पर होने वाले परिवर्तनों जैसे भूमि धसकना, हिमनदों का पिघलना, भूकंप, समुद्री सतह में बदलाव आदि को मापना है।
NISAR मिशन का उद्देश्य
NISAR का प्राथमिक उद्देश्य पृथ्वी की सतह पर हो रहे छोटे-बड़े परिवर्तनों की निगरानी करना है। यह मिशन निम्नलिखित उद्देश्यों पर कार्य करेगा:
भूकंप, ज्वालामुखी और भूस्खलन की पहचान करना
समुद्री जलस्तर और तटीय क्षेत्रों में बदलाव की निगरानी
हिमनदों के पिघलने और ध्रुवीय क्षेत्रों में बर्फ की स्थिति का मूल्यांकन
कृषि भूमि और वनावरण में बदलाव को ट्रैक करना
जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझना
निसार की यह सभी क्षमताएँ वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं के लिए अमूल्य जानकारी प्रदान करेंगी।
NISAR की तकनीकी विशेषताएँ
निसार एक अत्यंत उन्नत उपग्रह है जिसमें कई आधुनिक तकनीकें सम्मिलित हैं। इसकी कुछ प्रमुख तकनीकी विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. दोहरी फ्रिक्वेंसी रडार प्रणाली
L-बैंड (NASA द्वारा)
S-बैंड (ISRO द्वारा)
2. सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR)
यह प्रणाली उच्च-रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग के लिए जानी जाती है। इससे किसी भी मौसम में, दिन या रात, पृथ्वी की सतह की विस्तृत जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
3. विशाल एंटीना
निसार में एक 12 मीटर व्यास वाला रिफ्लेक्टिव एंटीना है, जो फोल्ड होने योग्य है। यह एंटीना कार्बन फाइबर से बना है।
NISAR का निर्माण और सहयोग
NASA की भूमिका
NASA इस मिशन में L-बैंड SAR, GPS रिसीवर, सॉलिड स्टेट रिकॉर्डर, और हाई-स्पीड डेटा संचार प्रणाली प्रदान कर रहा है।
ISRO की भूमिका
ISRO इस उपग्रह के लिए S-बैंड रडार, सैटेलाइट बस, लॉन्च व्हीकल (GSLV Mk-II) और मिशन ऑपरेशन्स का जिम्मा संभाल रहा है।
संयुक्त प्रयास
निसार दोनों देशों के वैज्ञानिकों के बीच गहरे तकनीकी सहयोग का प्रतीक है। इस मिशन से न केवल वैज्ञानिक डेटा मिलेगा बल्कि यह भविष्य के तकनीकी आदान-प्रदान के लिए भी रास्ते खोलेगा।
NISAR की तकनीक और payload
NISAR में दो सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) शामिल हैं: L‑band (NASA) और S‑band (ISRO)। ये तकनीक बहु‑ध्रुवीय, इंटरफेरोमेट्रिक डेटा और बड़े स्वाथ (≈240 km) के साथ 5–100 m resolution प्रदान करती है। एंटीना व्यास 12 मीटर का है, और यह deployable boom से जुड़ा होता है। इस dual‑SAR payload से NISAR पृथ्वी की सतह को केवल 12‑दिन में दो बार image कर सकता है।
NISAR मिशन की समयरेखा और लेटेस्ट अपडेट
मूल लॉन्च योजना: मिशन की शुरुआत March 2025 के लिए तय थी, लेकिन प्रमुख कंपोनेंट्स की कोटिंग और परीक्षणों के कारण इसमें विलंब हुआ।
लेटेस्ट अपडेट (July 2025 में):
रॉकेट GSLV‑F16/NISAR को 24 जुलाई 2025 को श्रीहरिकोटा से लॉन्च पैड तक रोल‑आउट किया गया। यह GSLV Mk II का 18वाँ मिशन है।
लॉन्च तिथि और समय तय हुआ: 30 जुलाई 2025, दोपहर 5:40 PM IST (8:10 AM EDT)। कमेंट्री NASA और ISRO दोनों द्वारा लाइव प्रसारित होगी।
कमिशनिंग और प्री‑ऑपरेशन फेज:
उड़ेने के लगभग 18.5 मिनट बाद उपग्रह निर्धारित सूर्य‑समकालिक कक्षा में स्थापित हो जाएगा।
अगले ≈90 दिनों (commissioning phase) तक उपग्रह की कामकाजी प्रणाली, सेंसर और डेटा लिंक का परीक्षण और कैलिब्रेशन होगा। इस अवधि के बाद “science phase” शुरू होगी, जिसमें NISAR डेटा भेजना शुरू करेगा।
NISAR की वैश्विक महत्ता और उद्देश्य
NISAR को पृथ्वी का सबसे सामर्थ्यशाली Earth observation उपग्रह माना जा रहा है, जो हर मौसम और दिन‑रात कार्य क्षमता के साथ imagery प्रदान करेगा।
यह प्रयास लगभग $1.5 बिलियन का है, और यह Indo‑US space partnership में एक मील का पत्थर है।
NISAR प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, भूस्खलन, हिमनदों के पिघलने, समुद्री सतह परिवर्तन, और भूमि इकोसिस्टम में बदलावों की सटीक निगरानी करेगा।

NISAR के डेटा का उपयोग
निसार द्वारा एकत्र किया गया डेटा कई क्षेत्रों में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकता है:
- कृषि क्षेत्र में फसल स्वास्थ्य और पैदावार का अनुमान
आपदा प्रबंधन के लिए समय रहते चेतावनी
शहरी नियोजन और इन्फ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा
पर्यावरण संरक्षण और वन क्षेत्र की निगरानी
जलवायु परिवर्तन के वैज्ञानिक अध्ययन
NISAR की वैश्विक महत्ता
NISAR सिर्फ भारत और अमेरिका के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए लाभकारी होगा। यह मिशन वैश्विक स्तर पर SDG Goals, विशेष रूप से जलवायु कार्रवाई (SDG 13), जीवन भूमि पर (SDG 15) और आपदा जोखिम न्यूनीकरण में सहयोग देगा।
वैज्ञानिकों की राय
वैज्ञानिकों के अनुसार NISAR “ग्लोबल अर्थ मॉनिटर” के रूप में काम करेगा। इसकी सहायता से पृथ्वी पर प्रतिदिन होने वाले बदलावों का एक सटीक और विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया जा सकेगा।
NISAR से जुड़े रोचक तथ्य
यह पहला उपग्रह होगा जिसमें दोहरी SAR फ्रिक्वेंसी (L और S) का संयोजन होगा।
इसका डेटा प्रति सप्ताह लगभग 85 टेराबाइट्स तक हो सकता है।
एक ही स्थान की इमेज हर 12 दिन में ली जा सकेगी।
यह मिशन 3 से 5 वर्षों तक कार्यरत रहेगा।
भविष्य की संभावनाएँ
NISAR के डेटा से भविष्य में:
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित आपदा पूर्वानुमान मॉडल तैयार किए जा सकेंगे।
रियल-टाइम कृषि योजना बनाना संभव होगा।
प्राकृतिक आपदाओं से पहले “स्मार्ट अलर्ट सिस्टम” का विकास किया जा सकेगा।
भारत-अमेरिका सहयोग की नई मिसाल
NISAR दोनों देशों के बीच बढ़ते हुए तकनीकी संबंधों और भरोसे का प्रतीक है। यह मिशन आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग के लिए नई राहें खोलेगा।
निष्कर्ष: NISAR — विज्ञान, सहयोग और पृथ्वी संरक्षण की नई उड़ान
NISAR (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) केवल एक उपग्रह मिशन नहीं है, बल्कि यह विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का प्रतीक है। यह मिशन पृथ्वी की सतह पर होने वाले छोटे से छोटे परिवर्तनों को सटीकता से मापने में सक्षम है — चाहे वह भूकंप हो, हिमनदों का पिघलना, वन क्षेत्र में बदलाव, या फिर समुद्री सतह में उतार-चढ़ाव।
अंतरराष्ट्रीय महत्त्व:
इस मिशन ने भारत और अमेरिका को वैश्विक मंच पर वैज्ञानिक सहयोग के आदर्श मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया है। यह संयुक्त प्रयास हमें पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक विश्वसनीय डेटा प्रदान करेगा।
तकनीकी उत्कृष्टता:
NISAR अपने अत्याधुनिक L-band और S-band SAR सिस्टम, विशाल deployable एंटीना, और दिन-रात, सभी मौसमों में कार्य करने की क्षमता के कारण, विश्व का सबसे शक्तिशाली Earth Observation सैटेलाइट बन गया है।
व्यवहारिक उपयोग:
इसका डेटा कृषि, जलवायु परिवर्तन, शहरी योजना, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण में नई क्रांति लाएगा।
नवीनतम स्थिति:
30 जुलाई 2025 को यह उपग्रह GSLV-F16 रॉकेट से श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित होने जा रहा है। लॉन्च के 90 दिन बाद यह अपना विज्ञान संचालन शुरू करेगा, जिससे वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय को उच्च गुणवत्ता वाला डेटा प्राप्त होगा।
अंततः, NISAR भविष्य की एक झलक है — जहाँ तकनीक, विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग मिलकर हमारी पृथ्वी को बेहतर ढंग से समझने और सुरक्षित रखने की दिशा में काम करेंगे।
निसार हमें सिर्फ पृथ्वी पर हो रहे बदलावों को दिखाएगा नहीं, बल्कि उन्हें समझने और सहेजने का रास्ता भी देगा।
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