PM-AASHA Yojana का पूरा सच: MSP का असली हक अब हर अन्नदाता को!
प्रस्तावना: क्यों ज़रूरी है PM-AASHA?
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Toggleभारत एक कृषि प्रधान देश है। यहाँ 60% से अधिक लोग कृषि पर निर्भर हैं। लेकिन आज भी किसान अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं पा पाते। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सिर्फ घोषणा बनकर रह जाती है। ऐसे में PM-AASHA योजना एक उम्मीद की किरण है – जो कहती है:
“अब हर फसल का मिलेगा उचित दाम!“
PM-AASHA Yojana यानी प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान – यह केवल एक योजना नहीं, बल्कि एक आंदोलन है – किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने का।

PM-AASHA Yojana क्या है? (What is PM-AASHA Yojana?)
PM-AASHA का पूरा नाम है – Pradhan Mantri Annadata Aay Sanrakshan Abhiyan।
इस योजना को केंद्र सरकार ने सितंबर 2018 में लॉन्च किया। इसका मुख्य उद्देश्य है:
किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ वास्तविक रूप में दिलाना।
MSP की सुनिश्चित खरीद या भुगतान की गारंटी देना।
बाजार में मूल्य गिरावट के समय किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता देना।
PM-AASHA Yojana किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह है, ताकि उन्हें दलालों पर निर्भर न रहना पड़े।
PM-AASHA Yojana के मुख्य उद्देश्य (Objectives of PM-AASHA)
- MSP का प्रभावी क्रियान्वयन।
- बाजार मूल्य गिरने पर आय में सुरक्षा देना।
- किसानों की फसल को उचित मूल्य दिलाना।
- उपज की सीधी खरीद के लिए वैकल्पिक तंत्र बनाना।
- MSP को कागज़ से ज़मीन तक पहुंचाना।
इससे किसानों की आय में स्थिरता, सुरक्षा और सम्मान तीनों जुड़ते हैं।
PM-AASHA Yojana के 3 स्तंभ – तीन प्रमुख योजनाएँ
PM-AASHA Yojana के तहत सरकार ने MSP लागू करने के तीन अलग-अलग मॉडल लागू किए हैं:
(1) मूल्य समर्थन योजना (PSS – Price Support Scheme)
दलहन, तिलहन और खोपरा जैसी फसलों की सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीद।
MSP पर सीधी खरीद की जाती है।
खरीद की सीमा उत्पादन का 25% तक होती है।
NAFED जैसी एजेंसियाँ इसमें अहम भूमिका निभाती हैं।
उदाहरण: किसान की उड़द MSP से कम पर बिक रही है, तो सरकार सीधी खरीद करेगी।
(2) मूल्य घाटा भुगतान योजना (PDPS – Price Deficiency Payment Scheme)
जब बाजार मूल्य MSP से कम होता है, तो सरकार किसान को अंतर की राशि बैंक खाते में देती है।
इसमें किसान अपनी उपज बाजार में बेच सकता है, फिर MSP और बाजार मूल्य के बीच का पैसा सीधे उसे दिया जाता है।
उदाहरण: MSP ₹5,000 है और किसान ने ₹4,000 पर बेचा, तो ₹1,000 सरकार सीधे देगी।
(3) निजी खरीद और भंडारण योजना (PPSS – Private Procurement & Stockist Scheme)
निजी व्यापारी या कंपनियाँ MSP पर फसल खरीद सकती हैं।
सरकार उन्हें निश्चित सेवा शुल्क देती है।
यह योजना उन क्षेत्रों में लागू होती है जहां सरकारी खरीद संभव नहीं।
यह व्यवस्था बाज़ार में प्रतियोगिता लाकर किसानों को MSP सुनिश्चित करती है।
किन फसलों पर लागू है PM-AASHA Yojana?
PM-AASHA विशेषकर निम्न फसलों पर केंद्रित है:
फसल श्रेणी
अरहर (तुअर), मूंग, उड़द दलहन
सरसों, सूरजमुखी, सोयाबीन तिलहन
खोपरा (सूखा नारियल) वाणिज्यिक फसल
PM-AASHA Yojana की प्रक्रिया – किसान को कैसे मिलता है लाभ?
1. पंजीकरण: किसान राज्य पोर्टल पर या APMC मंडी में पंजीकरण कराता है।
2. फसल बिक्री: किसान अपनी फसल मंडी/बाजार में बेचता है।
3. MSP तुलना: यदि मूल्य MSP से कम है, तो PSS/PDPS के अंतर्गत किसान पात्र होता है।
4. भुगतान: सीधा बैंक खाते में भुगतान होता है या सरकारी एजेंसी खरीदती है।
इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल पोर्टल और SMS अलर्ट की सुविधा दी गई है।
PM-AASHA Yojana का प्रभाव – क्या बदला किसानों के लिए?
किसानों को बाजार में मजबूरी में सस्ते दाम पर फसल बेचनी नहीं पड़ती।
फसल का MSP मिलना निश्चित हो गया है।
किसानों को मिल रही है प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता।
मंडियों में दलालों की निर्भरता घटी है।
एक किसान की बात:
“पहले फसल बेचते थे, पर MSP सिर्फ खबर में दिखती थी। अब PM-AASHA के तहत मेरी मूंग MSP पर सरकार ने खरीदी।” – रामलाल, मध्य प्रदेश
राज्यों में लागू PM-AASHA Yojana की स्थिति
कुछ राज्यों में इस योजना की कार्यप्रणाली बेहद प्रभावशाली रही है:
राज्य फसल योजना
मध्य प्रदेश मूंग, उड़द PSS
राजस्थान सरसों, तिल PDPS
महाराष्ट्र तुअर PSS
कर्नाटक सोयाबीन PDPS
क्या चुनौतियाँ हैं PM-AASHA Yojana के सामने?
- सभी फसलों को शामिल नहीं किया गया है।
- MSP से जुड़ी जानकारी अभी भी गांवों में कम है।
- कुछ राज्य सरकारें ढिलाई करती हैं।
- भंडारण और लॉजिस्टिक व्यवस्था कमजोर है।
इन चुनौतियों को दूर करने से PM-AASHA Yojana और भी प्रभावी बन सकती है।
क्या सुधार होने चाहिए?
हर फसल के लिए मजबूत MSP खरीद ढांचा।
डिजिटल ऐप के माध्यम से किसान को रीयल-टाइम जानकारी।
सभी ज़िलों में स्थायी खरीद केंद्र।
स्थानीय स्तर पर स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था।
निजी क्षेत्र की भागीदारी को और प्रोत्साहन।
भविष्य में क्या है PM-AASHA Yojana का विजन?
PM-AASHA Yojana का दीर्घकालिक लक्ष्य केवल MSP देना नहीं है, बल्कि किसानों की कुल आय को सुरक्षित और बढ़ाना है। आने वाले समय में सरकार का लक्ष्य है:
हर किसान को स्मार्ट फसल बीमा + MSP + खरीद गारंटी देना।
AI आधारित मंडी मूल्य भविष्यवाणी से किसान पहले से जान सके कि कहाँ बेचना बेहतर होगा।
हर गाँव स्तर पर सरकारी खरीद केंद्र और सीधे किसान खातों में भुगतान की व्यवस्था।
कृषि में निजी निवेश, जिससे स्टोरेज, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग बेहतर हो।
PM-AASHA Yojana को आत्मनिर्भर भारत और डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन से भी जोड़ा जा रहा है ताकि भारत का किसान सिर्फ अन्नदाता नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर उद्यमी बने।
किसानों की नजर में PM-AASHA – ज़मीनी सच्चाई
हमने कई राज्यों के किसानों से बातचीत करके उनकी राय जानी:
रामकिशोर यादव (छत्तीसगढ़)
“पहले मंडी में कोई हमारी तिलहन नहीं खरीदता था, अब सरकार खुद लेती है। PM-AASHA ने हमें हिम्मत दी है।”
सीता देवी (राजस्थान)
“सरसों MSP से ₹400 कम बिक रही थी, लेकिन PDPS से वो पैसा खाते में आ गया।”
नंदकुमार (महाराष्ट्र)
> “खरीद केन्द्र अब गांव में खुला है। NAFED वाले खुद फोन करके बुलाते हैं। बहुत अच्छा लग रहा है।”
इन अनुभवों से साफ है – PM-AASHA किसानों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रही है।
PM-AASHA Yojana से जुड़े संस्थान और उनकी भूमिका
संस्था भूमिका
NAFED दलहन व तिलहन की खरीद
NCCF सहकारी संस्थाओं के माध्यम से खरीद
राज्य कृषि विपणन बोर्ड मंडी नेटवर्क के साथ समन्वय
बैंक / NPCI भुगतान व्यवस्था सुनिश्चित करना
FCI कुछ फसलों का भंडारण व वितरण
इन सभी एजेंसियों का तालमेल ही PM-AASHA को सफल और पारदर्शी बनाता है।

PM-AASHA Yojana – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. PM-AASHA योजना क्या है?
उत्तर:
PM-AASHA यानी प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान, भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक योजना है, जिसका उद्देश्य किसानों को उनकी फसलों का उचित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) दिलाना और बाजार मूल्य गिरने की स्थिति में उनकी आय की सुरक्षा करना है।
2. PM-AASHA योजना कब शुरू की गई थी?
उत्तर:
सितंबर 2018 में PM-AASHA योजना की शुरुआत हुई थी। इसका उद्देश्य किसानों को MSP का वास्तविक लाभ पहुंचाना है, न कि सिर्फ घोषणा तक सीमित रखना।
3. PM-AASHA योजना के अंतर्गत कौन-कौन सी उप-योजनाएं आती हैं?
उत्तर:
PM-AASHA के तीन मुख्य घटक हैं:
- PSS – मूल्य समर्थन योजना
- PDPS – मूल्य घाटा भुगतान योजना
- PPSS – निजी खरीद एवं भंडारण योजना
4. किन किसानों को PM-AASHA का लाभ मिलता है?
उत्तर:
वे सभी किसान जो MSP वाली फसलें उगाते हैं और उन्हें या तो सरकारी एजेंसियाँ खरीदती हैं या बाजार में MSP से कम दाम पर बेचनी पड़ती है, उन्हें PM-AASHA योजना के तहत लाभ मिलता है।
5. क्या सभी फसलें PM-AASHA में शामिल हैं?
उत्तर:
नहीं, फिलहाल PM-AASHA योजना दलहन (अरहर, उड़द, मूंग), तिलहन (सरसों, सूरजमुखी, सोयाबीन) और खोपरा जैसी कुछ चुनिंदा MSP वाली फसलों पर केंद्रित है।
6. PM-AASHA योजना का लाभ लेने के लिए किसान को क्या करना होता है?
उत्तर:
किसानों को अपनी फसल के लिए राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त पोर्टल या मंडी में पंजीकरण कराना होता है। फिर फसल बेचने के बाद योजना के तहत पात्रता के अनुसार भुगतान या खरीद होती है।
7. PDPS योजना के अंतर्गत भुगतान कैसे होता है?
उत्तर:
PDPS यानी मूल्य घाटा भुगतान योजना के तहत किसान को MSP और वास्तविक बिक्री मूल्य के बीच का अंतर सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाता है।
8. PM-AASHA योजना में कौन-कौन सी एजेंसियाँ शामिल हैं?
उत्तर:
PM-AASHA के अंतर्गत मुख्य एजेंसियाँ हैं:
NAFED
NCCF
FCI
राज्य की कृषि विपणन एजेंसियाँ
ये मिलकर खरीद, भुगतान और लॉजिस्टिक प्रबंधन का कार्य करती हैं।
9. क्या PM-AASHA योजना सभी राज्यों में लागू है?
उत्तर:
हां, यह योजना सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू की जा सकती है, लेकिन इसकी कार्यान्वयन की जिम्मेदारी राज्य सरकारों पर होती है। कुछ राज्य इसे सक्रिय रूप से चला रहे हैं, जबकि कुछ में अब भी जागरूकता की कमी है।
10. PM-AASHA योजना का किसान को सबसे बड़ा लाभ क्या है?
उत्तर:
इस योजना का सबसे बड़ा लाभ यह है कि किसान को अपनी मेहनत का न्यूनतम मूल्य मिलना तय हो गया है। इससे उसकी आय में स्थिरता आती है, और वह बाजार के उतार-चढ़ाव से आर्थिक रूप से सुरक्षित रहता है।
निष्कर्ष: PM-AASHA – अन्नदाता का सच्चा सहारा
PM-AASHA योजना केवल सरकारी पहल नहीं, बल्कि भारत के करोड़ों किसानों के जीवन में एक आर्थिक सुरक्षा कवच है। यह उन किसानों के लिए एक आशा है, जो हर मौसम में खेतों में मेहनत करते हैं, लेकिन बाजार के उतार-चढ़ाव से अक्सर न्यूनतम मूल्य से भी वंचित रह जाते हैं।
इस योजना ने साबित किया है कि जब सरकार, किसान और व्यवस्था मिलकर काम करें, तो MSP सिर्फ आंकड़ा नहीं, एक अधिकार बन जाता है।
PM-AASHA के ज़रिए:
किसानों को फसल का लाभकारी मूल्य मिलता है,
उन्हें दलालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता,
और बाजार में कीमत गिरने पर भी उनकी आय सुरक्षित रहती है।
यह योजना आत्मनिर्भर भारत और डिजिटल एग्रीकल्चर विज़न की दिशा में भी एक मजबूत कड़ी है।
PM-AASHA का मतलब है –
प्रधानमंत्री की गारंटी, MSP की मजबूती, और अन्नदाता की सुरक्षा।
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