Solar PV Module Manufacturing Capacity under ALMM: भारत की 2.3 GW से 100 GW तक की ऐतिहासिक सौर यात्रा
प्रस्तावना – सौर ऊर्जा में भारत की ऐतिहासिक छलांग
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Toggleभारत ने हाल ही में Solar PV Module Manufacturing Capacity under ALMM के तहत 100 गीगावाट क्षमता का ऐतिहासिक आंकड़ा छू लिया है। यह सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि यह ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्वदेशी तकनीक के प्रति भारत के संकल्प का प्रमाण है।

साल 2014 में यह क्षमता मात्र 2.3 गीगावाट थी, और अब एक दशक में यह 100 गीगावाट तक पहुँचना भारत की नीतिगत दृष्टि, औद्योगिक विकास और निवेशक विश्वास का नतीजा है।
ALMM क्या है और इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी?
ALMM यानी Approved List of Models and Manufacturers एक ऐसी आधिकारिक सूची है जिसमें वे सभी सौर पीवी मॉड्यूल और उनके निर्माता शामिल होते हैं, जिन्हें भारत सरकार और सरकारी समर्थित परियोजनाओं में इस्तेमाल की अनुमति होती है।
इसका उद्देश्य –
सौर परियोजनाओं में उच्च गुणवत्ता वाले मॉड्यूल का इस्तेमाल सुनिश्चित करना
घटिया और अविश्वसनीय मॉड्यूल के प्रयोग को रोकना
स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देना
अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के बीच भारतीय निर्माताओं की स्थिति मजबूत करना
Solar PV Module Manufacturing Capacity under ALMM के माध्यम से सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि देश की ऊर्जा जरूरतें न सिर्फ पूरी हों, बल्कि निर्यात की संभावनाएँ भी बढ़ें।
2014 में स्थिति – छोटी शुरुआत से बड़ा सफर
2014 में भारत की सौर पीवी मॉड्यूल निर्माण क्षमता 2.3 GW थी।
उस समय भारत का अधिकांश सौर उपकरण आयात पर निर्भर था।
घरेलू निर्माण इकाइयों की संख्या बेहद सीमित थी।
तकनीकी स्तर पर अधिकतर निर्माता पुराने डिज़ाइन और निम्न दक्षता वाले मॉड्यूल बनाते थे।
यहीं से Solar PV Module Manufacturing Capacity under ALMM की यात्रा की शुरुआत हुई – एक ऐसी यात्रा जिसने 10 साल में पूरे उद्योग की तस्वीर बदल दी।
ALMM नीति का आगमन और प्रभाव
भारत सरकार ने 2019 में ALMM की अवधारणा को औपचारिक रूप से लागू किया।
2019 में ALMM आदेश जारी हुआ
2021 में पहली सूची आई, जिसमें 21 निर्माता और लगभग 8.2 GW की क्षमता शामिल थी
इसके बाद निर्माताओं की संख्या और क्षमता में लगातार वृद्धि हुई
यह नीति Solar PV Module Manufacturing Capacity under ALMM को विस्तार देने का सबसे बड़ा आधार बनी।
2019 से 2025 तक – विस्फोटक वृद्धि
2019 से 2025 के बीच –
निर्माताओं की संख्या 21 से बढ़कर 100 हो गई
निर्माण इकाइयाँ 123 तक पहुँच गईं
क्षमता 8.2 GW से बढ़कर 100 GW हो गई
यह वृद्धि दर्शाती है कि Solar PV Module Manufacturing Capacity under ALMM सिर्फ नीति का नतीजा नहीं, बल्कि निवेश, नवाचार और प्रबंधन का संयुक्त परिणाम है।
सरकारी योजनाएँ और प्रोत्साहन
भारत सरकार ने कई नीतियाँ लागू कीं, जैसे –
PLI Scheme for High Efficiency Solar PV Modules
बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) बढ़ाना ताकि आयात कम हो
स्थानीय कंटेंट आवश्यकताएँ
वित्तीय सहायता और सॉफ्ट लोन
इन पहलों से Solar PV Module Manufacturing Capacity under ALMM को सीधा लाभ मिला।
तकनीकी प्रगति – दक्षता की नई ऊँचाइयाँ
भारतीय कंपनियाँ अब TOPCon, Mono PERC, Bifacial और Half-cut सेल तकनीक जैसे आधुनिक समाधान अपना रही हैं।
उच्च दक्षता (>21%) वाले मॉड्यूल का निर्माण
500Wp से 720Wp तक के मॉड्यूल
बेहतर तापमान गुणांक और टिकाऊपन
ये सभी तकनीकें Solar PV Module Manufacturing Capacity under ALMM को वैश्विक मानकों पर खड़ा करती हैं।
वैश्विक परिदृश्य में भारत की स्थिति
दुनिया के प्रमुख सौर निर्माण देशों में –
चीन अभी भी शीर्ष पर है
लेकिन भारत अब टॉप-3 में अपनी जगह बना रहा है
निर्यात बाजार में भी भारतीय मॉड्यूल की मांग बढ़ रही है
Solar PV Module Manufacturing Capacity under ALMM का यह स्तर भारत को एक महत्वपूर्ण वैश्विक सप्लायर बना सकता है।
2030 का लक्ष्य और आगे का रोडमैप
भारत ने 2030 तक 500 GW non-fossil fuel capacity का लक्ष्य रखा है।
इसमें सौर ऊर्जा का योगदान लगभग 280 GW होगा
Solar PV Module Manufacturing Capacity under ALMM इस लक्ष्य को हासिल करने में रीढ़ की हड्डी का काम करेगी
निरंतर तकनीकी सुधार, लागत में कमी और निर्यात विस्तार पर ध्यान देना होगा

चुनौतियाँ
हालाँकि उपलब्धियाँ बड़ी हैं, लेकिन चुनौतियाँ भी मौजूद हैं –
वैश्विक कीमतों में गिरावट से प्रतिस्पर्धा
उच्च दक्षता मॉड्यूल के लिए कच्चे माल की आपूर्ति
निरंतर R&D निवेश की आवश्यकता
इन चुनौतियों को हल करके ही Solar PV Module Manufacturing Capacity under ALMM को टिकाऊ बनाया जा सकता है।
सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
लाखों रोजगार का सृजन
ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक विकास
कार्बन उत्सर्जन में कमी
ऊर्जा आत्मनिर्भरता
इन सभी प्रभावों के केंद्र में Solar PV Module Manufacturing Capacity under ALMM है।
निष्कर्ष – भारत की सौर क्रांति का नया युग
भारत की Solar PV Module Manufacturing Capacity under ALMM का 2014 में 2.3 GW से 2025 में 100 GW तक पहुँचना एक ऐसी कहानी है जिसमें नीति, तकनीक, उद्योग और संकल्प – सभी ने मिलकर योगदान दिया है। यह उपलब्धि केवल संख्या का खेल नहीं है, बल्कि यह कई स्तरों पर भारत की शक्ति और दिशा को दर्शाती है।
1. नीतिगत दृष्टि और आत्मनिर्भरता
भारत ने 2019 में ALMM नीति को लागू कर यह सुनिश्चित किया कि सरकारी परियोजनाओं में केवल मान्यता प्राप्त, उच्च गुणवत्ता वाले मॉड्यूल का उपयोग हो। इस कदम से न केवल घरेलू निर्माण को बढ़ावा मिला बल्कि विदेशी आयात पर निर्भरता भी कम हुई।
Solar PV Module Manufacturing Capacity under ALMM ने “Make in India” और “Atmanirbhar Bharat” को सौर ऊर्जा क्षेत्र में वास्तविकता में बदल दिया है।
2. आर्थिक और औद्योगिक प्रभाव
लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार का सृजन
औद्योगिक क्लस्टर्स का विकास (गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु आदि में)
MSMEs और स्टार्टअप्स को सप्लाई चेन में शामिल होने का अवसर
निर्यात क्षमता में वृद्धि, जिससे विदेशी मुद्रा अर्जन
3. तकनीकी प्रगति और वैश्विक प्रतिस्पर्धा
भारत अब TOPCon, Mono PERC और Bifacial तकनीकों में दक्ष हो चुका है , उच्च दक्षता वाले (>21%) और 500Wp–720Wp तक के मॉड्यूल का घरेलू निर्माण यह दिखाता है कि Solar PV Module Manufacturing Capacity under ALMM अब अंतरराष्ट्रीय मानकों से पीछे नहीं है, बल्कि कई मामलों में बराबरी कर रही है।
4. ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय लाभ
2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म क्षमता लक्ष्य में सौर ऊर्जा का योगदान अहम है।
इस उपलब्धि से कोयला और अन्य जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटेगी।
कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी, जिससे भारत अपने जलवायु लक्ष्यों को पूरा कर सकेगा।
5. भविष्य की दिशा
अब चुनौती सिर्फ क्षमता बनाए रखने की नहीं, बल्कि
मॉड्यूल की गुणवत्ता और टिकाऊपन में सुधार
वैश्विक निर्यात बाजार में प्रतिस्पर्धी कीमत
रिसर्च एंड डेवलपमेंट में निवेश
सप्लाई चेन में आत्मनिर्भरता (कच्चा माल, सोलर सेल उत्पादन)
अगर ये सभी पहलू संतुलित रूप से पूरे किए जाएँ, तो Solar PV Module Manufacturing Capacity under ALMM भारत को न सिर्फ घरेलू बाजार का लीडर बनाएगी, बल्कि यह वैश्विक सौर निर्यात बाजार में भी शीर्ष स्थान पर पहुँचा सकती है।
अंततः, यह उपलब्धि केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह भारत के ऊर्जा परिदृश्य में गहरे बदलाव की नींव है। यह दिखाती है कि सही नीति, मजबूत इच्छाशक्ति, उद्योग का सहयोग और तकनीकी नवाचार – मिलकर किसी भी क्षेत्र में असंभव को संभव बना सकते हैं।
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