Modified Interest Subvention Scheme 2025-26: किसानों को 4% ब्याज पर मिलेगा फसल ऋण

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Modified Interest Subvention Scheme 2025-26: Kisan Credit Card से पाएं सस्ता लोन

भूमिका
भारत में किसानों की आर्थिक रीढ़ को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है।

28 मई 2025 को सरकार ने संशोधित ब्याज सब्सिडी Scheme (Modified Interest Subvention Scheme – MISS) को वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जारी रखने की आधिकारिक घोषणा कर दी।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कृषि क्षेत्र को जलवायु परिवर्तन, उत्पादन लागत, और बाजार अनिश्चितता जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

यह Scheme किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से अल्पकालिक कृषि ऋण सस्ती ब्याज दर पर उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई है।

आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं इस Scheme की हर बारीकी को — उसका उद्देश्य, लाभ, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, लेटेस्ट अपडेट और इस योजना का ज़मीनी असर।

Scheme का उद्देश्य: किसान को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना

भारत में कृषि मुख्य पेशा है, लेकिन बहुत सारे किसान बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और कृषि उपकरण के लिए समय पर पैसे की व्यवस्था नहीं कर पाते।

इस कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने यहScheme चलाई है ताकि किसान ब्याज की ऊँची दरों से बच सकें और उन्हें कम दर पर ऋण उपलब्ध हो।

सरकार का उद्देश्य है:

किसानों को सस्ती दरों पर ऋण देना

स्व-निर्भर कृषि प्रणाली को बढ़ावा देना

ऋण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सौ प्रतिशत ऋण वापसी के लिए प्रोत्साहन देना

किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में एक और ठोस कदम

योजना की प्रमुख विशेषताएं: किसानों के लिए क्या है खास?

1. ब्याज में राहत

इस Scheme के अंतर्गत किसानों को 7% की सामान्य दर से कृषि ऋण मिलता है। लेकिन:

अगर किसान समय पर ऋण चुकता करता है, तो उसे 3% की अतिरिक्त छूट मिलती है।

इसका अर्थ है कि किसान को केवल 4% ब्याज दर देनी होती है।

सरकार खुद इस पर 1.5% की ब्याज सब्सिडी देती है ताकि बैंक को कोई घाटा न हो।

2. ऋण की सीमा बढ़ी

पहले किसान क्रेडिट कार्ड के तहत ₹3 लाख तक ऋण की सुविधा थी। लेकिन अब सरकार ने इसे बढ़ाकर ₹5 लाख कर दिया है। इसका सीधा लाभ यह होगा कि किसान उन्नत बीज, कृषि यंत्र, कीटनाशक, पशुपालन जैसी गतिविधियों में निवेश कर पाएंगे।

3. जमानत मुक्त ऋण

अब किसानों को ₹2 लाख तक का ऋण बिना किसी जमानत के दिया जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि छोटे और सीमांत किसान जो collateral नहीं दे सकते, उन्हें भी आसानी से ऋण मिल सके।

4. डिजिटलीकरण

अब MISS योजना को Kisan Rin Portal (KRP) से जोड़ा गया है जिससे:

हर किसान का रिकॉर्ड डिजिटल रहेगा

क्लेम और सब्सिडी भुगतान की प्रक्रिया पारदर्शी हो गई है

सब कुछ रियल टाइम पर ट्रैक किया जा सकता है

Modified Interest Subvention Scheme 2025-26: किसानों को 4% ब्याज पर मिलेगा फसल ऋण
Modified Interest Subvention Scheme 2025-26: किसानों को 4% ब्याज पर मिलेगा फसल ऋण
पात्रता: कौन-कौन ले सकता है योजना का लाभ?

इस Scheme के तहत भारत के हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के किसान पात्र हैं।

विशेषताएं:

भूमिधारी किसान

बटाईदार और किरायेदार किसान

संयुक्त देयता समूह (JLGs)

स्व-सहायता समूह (SHGs)

पशुपालन, मत्स्य पालन, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन जैसे संबद्ध क्षेत्रों से जुड़े किसान भी पात्र हैं

आवेदन कैसे करें?

चरण 1: किसान क्रेडिट कार्ड बनवाना

नजदीकी राष्ट्रीयकृत बैंक / ग्रामीण बैंक / सहकारी बैंक में जाएं

आधार कार्ड, भूमि संबंधी दस्तावेज़, बैंक पासबुक, पासपोर्ट साइज फोटो लेकर जाएं

KCC आवेदन पत्र भरें और जमा करें

एक बार स्वीकृति मिल जाए, तो आपको KCC जारी किया जाएगा

चरण 2: ऋण के लिए आवेदन

KCC के माध्यम से आप जरूरत के अनुसार ₹5 लाख तक का ऋण प्राप्त कर सकते हैं

समय पर चुकाने पर ब्याज सब्सिडी का लाभ मिलेगा

लेटेस्ट अपडेट 2025-26: सरकार ने क्या बदला?

2025 के बजट और कैबिनेट निर्णय में कई नए बदलाव हुए हैं जो MISS योजना को और मजबूत बनाते हैं:

1. योजना को 2025-26 तक विस्तार

अब यह Scheme अगले वित्तीय वर्ष तक जारी रहेगी, यानी किसानों को लगातार सस्ती दर पर ऋण मिलता रहेगा।

2. ऋण सीमा ₹5 लाख

पिछले वर्षों में जहां यह सीमा ₹3 लाख थी, अब बढ़ाकर ₹5 लाख कर दी गई है — यह बदलाव 2025 बजट में घोषित किया गया।

3. ब्याज सब्सिडी अब डिजिटल

अब किसानों को सब्सिडी की जानकारी Kisan Rin Portal और संबंधित बैंक ऐप्स पर मिलेगी। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।

4. नई फसलों को भी मिलेगा लाभ

MISS योजना के अंतर्गत अब पशुपालन और मत्स्य पालन से संबंधित फसलों और गतिविधियों को भी कवर किया गया है।

किसानों के लिए इसका क्या मतलब है?

आसान ऋण उपलब्धता

अब किसान छोटी-छोटी जरूरतों के लिए महाजन से कर्ज नहीं लेंगे, उन्हें बैंक से सस्ती दर पर ऋण मिलेगा।

आत्मनिर्भर कृषि

अच्छा ऋण मिलने से किसान जैविक खेती, ड्रिप इरिगेशन, सोलर पंप, कृषि यंत्र आदि में निवेश कर सकता है।

समय पर ऋण वापसी की आदत

ब्याज में 3% की अतिरिक्त छूट समय पर ऋण चुकाने को प्रोत्साहित करती है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति

जब किसानों को समय पर ऋण मिलेगा, तो पूरा ग्रामीण बाजार और श्रमिक वर्ग भी सक्रिय होगा।

इस Scheme का ऐतिहासिक विकास: कहां से शुरू हुई और कहां तक पहुँची?

संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना का इतिहास बताता है कि यह केवल एक Scheme नहीं, बल्कि भारत सरकार की किसानों के प्रति गंभीर प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

वर्ष 2006-07: पहली बार ब्याज सब्सिडी की शुरुआत

भारत सरकार ने तत्कालीन समय में किसानों के बढ़ते कर्ज को देखते हुए पहली बार यह Scheme शुरू की, जिसमें 7% की दर से फसल ऋण देने की व्यवस्था की गई।

वर्ष 2009-10: समय पर चुकौती पर 1% प्रोत्साहन

इस साल से सरकार ने समय पर ऋण चुकाने वालों को अतिरिक्त 1% ब्याज में छूट देना शुरू किया।

वर्ष 2011-12: प्रोत्साहन को बढ़ाकर 3% किया गया

इससे किसानों को केवल 4% ब्याज पर ऋण मिलने लगा, जिससे योजना बेहद लोकप्रिय हो गई।

वर्ष 2022-23: योजना को संशोधित किया गया

योजना को डिजिटल स्वरूप में बदला गया, जिसका नाम पड़ा – Modified Interest Subvention Scheme (MISS)। इसे Kisan Rin Portal से जोड़ा गया।

वर्ष 2025-26: Schemeको नया विस्तार

28 मई 2025 को सरकार ने इसे आने वाले वर्ष तक बढ़ाने का निर्णय लिया, जिसमें ₹5 लाख तक के ऋण को कवर करने की घोषणा की गई।

Modified Interest Subvention Scheme 2025-26: किसानों को 4% ब्याज पर मिलेगा फसल ऋण
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डिजिटल ट्रैकिंग: किसान ऋण पोर्टल (KRP) का महत्व

नई व्यवस्था में Kisan Rin Portal (KRP) Scheme की रीढ़ बन गया है।

अब यह पोर्टल:

बैंक और सरकार के बीच डेटा साझा करता है

किसानों के ब्याज सब्सिडी क्लेम को ट्रैक करता है

डुप्लिकेट क्लेम और गड़बड़ी को रोकता है

और सबसे अहम – किसान को पारदर्शी लाभ सुनिश्चित करता है

अब किसान को खुद SMS/मोबाइल ऐप/CSC केंद्र के माध्यम से यह जानकारी मिल सकती है कि:

उसका सब्सिडी क्लेम कब हुआ?

कितनी राशि ट्रांसफर हुई?

अगला भुगतान कब संभावित है?

राज्यवार प्रभाव: योजना की पहुँच कहाँ तक?

यह Scheme भारत के हर कोने तक पहुँच चुकी है, लेकिन कुछ राज्यों में इसकी पकड़ और भी मज़बूत हुई है:

उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश:

यहाँ के छोटे और सीमांत किसान इस योजना से सबसे ज़्यादा लाभान्वित हुए हैं।

महाराष्ट्र, राजस्थान, तेलंगाना:

यहाँ सूखा-प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को राहत मिली है।

पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम:

यह योजना बटाईदार किसानों के लिए भी उम्मीद की किरण बनी है।

Schemeसे जुड़े जोखिम और चुनौतियाँ

हर Scheme के अपने फायदे होते हैं, लेकिन कुछ चुनौतियाँ भी होती हैं:

बैंक की लेट प्रक्रिया

कई ग्रामीण बैंकों में अब भी प्रक्रिया धीमी है, और किसान को कई बार चक्कर लगाने पड़ते हैं।

जानकारी की कमी

ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बहुत सारे किसान KCC और ब्याज सब्सिडी के अंतर को नहीं समझते।

डिजिटल डिवाइड

Kisan Rin Portal की जानकारी मोबाइल या इंटरनेट के जरिए मिलती है, लेकिन डिजिटल साक्षरता की कमी एक बड़ी बाधा है।

समाधान: सरकार क्या कर सकती है?

CSC केंद्रों को और मजबूत करें, ताकि हर गाँव में डिजिटल जानकारी मिले

बैंकों को प्रशिक्षण दें ताकि KCC और MISS को सहज रूप से लागू कर सकें

जागरूकता अभियान चलाएं, जिसमें पंचायत स्तर पर किसान को योजना की जानकारी दी जाए

स्वचालित SMS अलर्ट हर किसान को मिलें जब भी सब्सिडी जमा हो

भविष्य की दिशा: क्या आगे और लाभ होंगे?

सरकार MISS योजना को और प्रभावी बनाने के लिए निम्नलिखित कदम उठा सकती है:

ब्याज दर को 3% तक लाना उन किसानों के लिए जो लगातार समय पर चुकौती करते हैं

ऑटो रिन्यू सिस्टम जिससे हर फसल सीजन में किसान को बार-बार बैंक नहीं जाना पड़े

AI आधारित ऋण मूल्यांकन, जिससे किसान की जरूरत के अनुसार तुरंत ऋण स्वीकृति हो सके

पशुपालन, मधुमक्खी पालन, वर्मी कम्पोस्ट जैसी योजनाओं को सीधे KCC से लिंक करना

निष्कर्ष: किसान सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत कदम

संशोधित ब्याज अनुदान योजना (Modified Interest Subvention Scheme – MISS) केवल एक आर्थिक सहायता योजना नहीं है, बल्कि यह किसानों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की सरकार की रणनीतिक सोच का प्रतिबिंब है।

सस्ती दर पर अल्पकालिक फसल ऋण उपलब्ध कराकर यह योजना न केवल किसान की आय में वृद्धि करती है, बल्कि उसे साहूकारों के कर्जजाल से मुक्त करने में भी मदद करती है।

Kisan Credit Card और Kisan Rin Portal जैसे डिजिटल साधनों के ज़रिए पारदर्शिता, तेज़ी और जवाबदेही आई है। अब किसान अपने हक के पैसे को सीधे अपने बैंक खाते में प्राप्त कर सकता है, वो भी सरल, सुरक्षित और डिजिटल तरीके से।

हालांकि, कुछ चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं — जैसे ग्रामीण इलाकों में डिजिटल जानकारी की कमी, बैंकिंग प्रक्रियाओं की धीमी गति, और तकनीकी साक्षरता की सीमाएँ।

लेकिन अगर इन बाधाओं को दूर कर लिया जाए, तो यह योजना भारत के कृषि भविष्य को पूरी तरह बदल सकती है।

इस योजना का सबसे बड़ा संदेश यही है:

> “अब किसान भी टेक्नोलॉजी से जुड़कर अपने खेत की पैदावार को आत्मविश्वास और सम्मान के साथ बढ़ा सकता है।”

सरकार, बैंक, पंचायत और समाज – जब सभी मिलकर इस योजना को ज़मीन तक पहुँचाएँगे, तभी ‘अन्नदाता’ सच में ‘समृद्धदाता’ बन पाएगा।


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Hello! Welcome To About me My name is Sanjeev Kumar Sanya. I have completed my BCA and MCA degrees in education. My keen interest in technology and the digital world inspired me to start this website, “Aajvani.com.”

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