Tegbir Singh की प्रेरणादायक कहानी – सिर्फ 6 साल की उम्र में छू ली 18,510 फीट की ऊंचाई!
प्रस्तावना – छोटी उम्र, बड़ी उड़ान
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Toggleहर बच्चा खास होता है, लेकिन कुछ बच्चे ऐसे होते हैं जो अपनी उम्र से कहीं आगे की उड़ान भरते हैं। ऐसे ही एक बालक हैं – Tegbir Singh, जिन्होंने मात्र 6 साल 9 महीने 4 दिन की उम्र में रूस के एलब्रस पर्वत की चोटी फतह करके दुनिया को हैरान कर दिया। यह कोई सामान्य ट्रैकिंग नहीं थी – यह थी बर्फ, बर्फीली हवाओं और 5,642 मीटर की ऊँचाई पर खुद से लड़कर जीतने की कहानी।

कौन हैं Tegbir Singh? – नन्हा पर्वतारोही, बड़ी सोच
Tegbir Singh पंजाब के रोपड़ (Rupnagar) जिले से आते हैं। उनका बचपन भी हर बच्चे की तरह खेलकूद में बीत रहा था, लेकिन कुछ अलग था — उनमें एक जज़्बा था कुछ नया और चुनौतीपूर्ण करने का। पिता की प्रेरणा और प्राकृतिक दुनिया के प्रति उनके आकर्षण ने उन्हें पर्वतारोहण की ओर प्रेरित किया।
उनकी उम्र में जब बच्चे स्कूल बैग उठाने में आलस करते हैं, तेगबीर बर्फ में बूट पहनकर चढ़ाई कर रहे थे।
Tegbir Singh की यात्रा की शुरुआत
Tegbir Singh की पर्वतारोही यात्रा खेल-कूद से नहीं, बल्कि प्रकृति के करीब रहने की आदत से शुरू हुई। उनके पिता स्वयं भी एक पर्वतारोही और साहसिक खेलों के प्रेमी हैं। वे अपने बेटे को अक्सर ट्रैकिंग और कैम्पिंग पर ले जाते थे।
धीरे-धीरे, Tegbir Singh ने ऊँचाई पर चलने, बर्फ में संतुलन बनाने और ऑक्सीजन की कमी से निपटने की छोटी-छोटी तकनीकें सीखीं। किसी ने नहीं सोचा था कि इतना छोटा बच्चा एक दिन यूरोप की सबसे ऊँची चोटी पर तिरंगा लहराएगा।
एलब्रस पर्वत – यूरोप की सबसे ऊँची चोटी
Tegbir Singh ने जिस पर्वत पर चढ़ाई की, उसका नाम है माउंट एलब्रस (Mount Elbrus)।
यह पर्वत क्यों खास है?
स्थिति: दक्षिणी रूस में कॉकसस पर्वत श्रृंखला में स्थित है।
ऊंचाई: 5,642 मीटर यानी 18,510 फीट — यूरोप का सबसे ऊँचा पर्वत।
प्रकार: यह एक निष्क्रिय ज्वालामुखी है।
प्रमुखता: दुनिया के 10 सबसे प्रमुख पर्वतों में से एक।
एलब्रस की चढ़ाई आसान नहीं है। ऑक्सीजन की कमी, बर्फीली हवाएँ, और खड़ी चढ़ाई — यह सब एक चुनौती बनकर सामने आता है।
चढ़ाई की तैयारी – एक बच्चे की असाधारण मेहनत
कोई भी पर्वत जीतने से पहले, खुद को जीतना पड़ता है। तेगबीर की तैयारी सिर्फ शारीरिक नहीं थी, मानसिक भी थी।
शारीरिक तैयारी:
रोज सुबह दौड़ लगाना
बैकपैक लेकर छोटी ट्रैकिंग
हाई एल्टीट्यूड मास्क से सांस लेना
मानसिक तैयारी:
ध्यान (Meditation) से डर पर नियंत्रण
सर्द मौसम में रहने की आदत
जोखिम लेने का साहस
चढ़ाई के दौरान की चुनौतियाँ
तेगबीर की टीम ने एलब्रस के साउथ रूट से चढ़ाई की। यह सबसे आम रूट माना जाता है, लेकिन इसके बावजूद यह बेहद मुश्किल होता है।
चुनौतियाँ:
तेज़ हवाएँ जो कभी-कभी 60 km/h से भी तेज चलती हैं
-20°C तक का तापमान
ऑक्सीजन की कमी, जिससे सिरदर्द और थकावट होती है
ग्लेशियर क्रेवास – बर्फ की दरारें जिनमें गिरने का खतरा
फिर भी, Tegbir Singh बिना घबराए, हर कदम पर ध्यान देते हुए चोटी तक पहुंचे।
परिवार और टीम का योगदान – हर सफल बच्चे के पीछे मजबूत समर्थन
Tegbir Singh की सफलता सिर्फ उनकी मेहनत नहीं, उनके परिवार विशेषकर उनके पिता की दूरदर्शिता और मार्गदर्शन का भी परिणाम है। उनके पिता ने ना केवल उन्हें पर्वतारोहण का महत्व समझाया बल्कि हर कदम पर उनके साथ रहे।
पिता का मार्गदर्शन:
उन्हें ऊँचाई पर कैसे सांस लेना है, कैसे चलते समय खुद को बैलेंस करना है – यह सब बचपन से सिखाया।
जोखिम को समझना और अपनी सीमा पहचानना – ये बातें बच्चे को जीवन भर काम आएंगी।
टीम का सहयोग:
विशेषज्ञ गाइड, डॉक्टर, पोर्टर और सहयोगी पर्वतारोही – सभी ने इस बच्चे को स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं, बल्कि ट्रेनिंग के समान अवसर दिए।
विश्व रिकॉर्ड की पुष्टि – इतिहास में दर्ज एक नाम
Tegbir Singh की इस चढ़ाई को केवल सोशल मीडिया पर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण संस्थाओं द्वारा प्रमाणित किया गया।
रिकॉर्ड विवरण:
उम्र: 6 वर्ष 9 महीने 4 दिन
चढ़ाई की तारीख: जून 2025 के मध्य
प्रमाण: स्थानीय पर्वतारोहण संस्था (Kabardino‑Balkaria Mountaineering Federation) द्वारा आधिकारिक सर्टिफिकेट
भारत में मान्यता: युवा मामलों के मंत्रालय और स्पोर्ट्स ऑथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा संज्ञान लिया गया
Tegbir Singh का नाम अब सबसे कम उम्र में एलब्रस फतह करने वाले विश्व के पर्वतारोहियों में दर्ज हो चुका है।
दुनिया के अन्य बाल पर्वतारोही – तेगबीर की उपलब्धि कितनी खास?
दुनिया में कई बच्चों ने ऊँचाइयों को छुआ है, लेकिन इतनी कम उम्र में एलब्रस फतह करना बेहद दुर्लभ है।
तुलना:
नाम देश उम्र पर्वत वर्ष
तेगबीर सिंह भारत 6 साल 9 माह एलब्रस 2025
कुशाग्र वाघा भारत 7 साल 3 माह एलब्रस 2022
सानवी सूद भारत 8 वर्ष एलब्रस 2023
मालवथ पूरना भारत 13 वर्ष माउंट एवरेस्ट 2014
जॉर्डन रोमेरो अमेरिका 13 वर्ष माउंट एवरेस्ट 2010
Tegbir Singh ने ना सिर्फ रिकॉर्ड तोड़ा बल्कि एक ऐसी ऊँचाई को छुआ जो शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत कठिन मानी जाती है।
भारत में पर्वतारोहण – एक बढ़ता हुआ क्षेत्र
Tegbir Singh जैसे युवा पर्वतारोहियों की वजह से भारत में अब पर्वतारोहण को लेकर नई जागरूकता आई है।
वर्तमान स्थिति:
पर्वतारोहण अभी भी क्रिकेट या फुटबॉल जितना लोकप्रिय नहीं, लेकिन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM), हिमालयन माउंटेनिंग इंस्टिट्यूट (HMI) जैसे संस्थान प्रशिक्षण दे रहे हैं।
चुनौतियाँ:
महंगा खेल: गियर, यात्रा, प्रशिक्षण की लागत ज़्यादा होती है
सरकार की तरफ से सीमित मदद
पर्वतीय सुरक्षा मानकों की कमी
Tegbir Singh जैसे बच्चों की कहानियाँ युवाओं में नई लहर जगा सकती हैं।
बच्चों के लिए प्रेरणा – उम्र नहीं, जज़्बा मायने रखता है
Tegbir Singh की उपलब्धि सिर्फ रिकॉर्ड नहीं है, यह एक संदेश है हर बच्चे के लिए कि…
> “अगर आपका लक्ष्य ऊँचा है, तो उम्र सिर्फ एक संख्या है।”
बच्चों को क्या सीख मिलती है?
डर से पार कैसे पाएं
अनुशासन का महत्व
टीमवर्क और धैर्य
शारीरिक और मानसिक फिटनेस की अहमियत
पर्वत से सीखे गए सबक – जीवन की पाठशाला
एलब्रस जैसे पर्वत सिर्फ चढ़ने की चीज़ नहीं, ये जिंदगी सिखाने वाले स्कूल हैं। Tegbir Singh को इस यात्रा में कई सबक मिले:
सीख:
जब आप थक जाएं, वहीं से असली यात्रा शुरू होती है।
कभी अकेले मत चढ़ो, टीम में भरोसा रखो।
खुद पर विश्वास रखो, लेकिन ज़्यादा आत्ममुग्ध मत हो।
ये मूल्य उन्हें जीवन में किसी भी क्षेत्र में कामयाब बनाएंगे।
मीडिया की भूमिका और प्रतिक्रिया
जब Tegbir Singh की खबर सामने आई, तो मीडिया ने इसे हाथों-हाथ लिया।
टीवी चैनलों पर उनकी कहानी दिखाई गई।
सोशल मीडिया पर #TegbirSingh ट्रेंड हुआ।
शिक्षा और खेल जगत में भी उन्हें सम्मानित किया गया।
कई विशेषज्ञों ने इस पर चिंता भी जताई – क्या इतनी कम उम्र में यह जोखिम उचित है? लेकिन उनके माता-पिता ने समझाया कि यह निर्णय सोच-समझकर और ट्रेनिंग के बाद ही लिया गया था।

पर्वतारोही बनने की राह – बच्चों के लिए गाइड
Tegbir Singh की सफलता के बाद, बहुत से माता-पिता जानना चाहते हैं कि उनका बच्चा भी अगर इस राह पर जाना चाहे तो कैसे शुरू करें।
5 स्टेप गाइड:
1. प्राकृतिक जगहों पर ले जाना शुरू करें – पहाड़, जंगल, ट्रेकिंग
2. बेसिक फिटनेस बनाएं – दौड़, योग, साइकलिंग
3. छोटे ट्रेक्स से शुरुआत करें – 1–2 दिन के कैम्प्स
4. सरकारी मान्यता प्राप्त संस्थानों से प्रशिक्षण लें
5. सुरक्षा और संतुलन का ध्यान रखें – किसी भी उम्र में
FAQs – तेगबीर सिंह और एलब्रस पर्वत चढ़ाई से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. Tegbir Singh कौन हैं?
उत्तर: तेगबीर सिंह पंजाब (भारत) के रोपड़ जिले के रहने वाले एक बाल पर्वतारोही हैं, जिन्होंने मात्र 6 साल 9 महीने 4 दिन की उम्र में Mount Elbrus (रूस) की चोटी पर चढ़ाई कर इतिहास रच दिया। वे दुनिया के सबसे कम उम्र के पर्वतारोही बन गए हैं जिन्होंने यूरोप की सबसे ऊँची चोटी फतह की है।
2. माउंट एलब्रस (Mount Elbrus) कहाँ स्थित है?
उत्तर: माउंट एलब्रस दक्षिणी रूस में स्थित है और कॉकसस पर्वतमाला का हिस्सा है। यह यूरोप का सबसे ऊँचा पर्वत है जिसकी ऊँचाई 5,642 मीटर (18,510 फीट) है।
3. माउंट एलब्रस की चढ़ाई करना कितना मुश्किल है?
उत्तर: माउंट एलब्रस तकनीकी रूप से एवरेस्ट जैसा कठिन नहीं है, लेकिन इसकी बर्फीली परिस्थितियाँ, ऑक्सीजन की कमी, और -20°C तक का तापमान इसे बेहद चुनौतीपूर्ण बनाते हैं — खासकर बच्चों के लिए।
4. Tegbir Singh ने यह पर्वत कब फतह किया?
उत्तर: तेगबीर सिंह ने जून 2025 में एलब्रस पर्वत की चढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी की। उनकी उम्र तब 6 साल 9 महीने और 4 दिन थी।
5. क्या तेगबीर का रिकॉर्ड आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त है?
उत्तर: हाँ, उनकी उपलब्धि को रूस की पर्वतारोहण संस्था (Kabardino-Balkarian Federation) द्वारा प्रमाणित किया गया है। इसके अलावा भारतीय मीडिया और समाज ने भी इसे व्यापक रूप से सराहा है।
6. क्या इतनी कम उम्र में पर्वतारोहण करना सुरक्षित है?
उत्तर: यह एक विवाद का विषय है, लेकिन तेगबीर की तैयारी बेहद वैज्ञानिक, संरक्षित और पेशेवर गाइड्स की निगरानी में की गई थी। उन्होंने अपनी फिटनेस, मानसिक शक्ति और संतुलन से साबित किया कि अगर तैयारी पुख्ता हो, तो यह संभव है।
7. Tegbir Singh को इस सफलता के लिए किसने प्रेरित किया?
उत्तर: तेगबीर को उनके पिता ने प्रेरित किया, जो स्वयं साहसिक खेलों में रुचि रखते हैं। उन्होंने अपने बेटे को शुरू से प्रकृति से जोड़ने, ट्रैकिंग पर ले जाने और पर्वतारोहण की तकनीकों से परिचित करवाया।
8. क्या Tegbir Singh भारत के सबसे कम उम्र के पर्वतारोही हैं?
उत्तर: हाँ, तेगबीर भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे कम उम्र के पर्वतारोहियों में से एक हैं जिन्होंने Mount Elbrus की चढ़ाई सफलतापूर्वक की है।
9. क्या पर्वतारोहण में बच्चे भी करियर बना सकते हैं?
उत्तर: बिलकुल। यदि शुरुआत सही गाइडेंस और सुरक्षा के साथ की जाए तो पर्वतारोहण आज एक एडवेंचर स्पोर्ट, राष्ट्रीय सम्मान और अंतरराष्ट्रीय पहचान का जरिया बन सकता है। भारत में NIM, HMI जैसे संस्थान प्रशिक्षण भी देते हैं।
10. मैं अपने बच्चे को पर्वतारोहण की ओर कैसे प्रेरित कर सकता हूँ?
उत्तर: आप शुरुआत छोटे ट्रेक से करें, बच्चे को प्रकृति के पास ले जाएं, उनकी फिटनेस पर ध्यान दें और उन्हें पर्वतों के बारे में जानकारी दें। जब बच्चा तैयार हो, तब उसे मान्यता प्राप्त पर्वतारोहण संस्थानों से ट्रेनिंग दिलाएं।
निष्कर्ष — एक नई ऊँचाई की शुरुआत
Tegbir Singh की कहानी केवल एक रिकॉर्ड तोड़ने की यात्रा नहीं, बल्कि यह उस हौसले की मिसाल है जो यह साबित करती है कि उम्र चाहे कितनी भी कम हो, यदि इरादे मजबूत हों तो पर्वत भी झुक जाते हैं।
एक ऐसा समय जब दुनिया डिजिटल गैजेट्स और खेलों में उलझी है, तेगबीर ने बर्फ, ठंड और ऑक्सीजन की कमी से जूझते हुए खुद को एक सच्चा योद्धा साबित किया।
उन्होंने न केवल माउंट एलब्रस की ऊंचाइयों को छुआ, बल्कि दुनिया को दिखा दिया कि भारत के बच्चे अब केवल किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि पर्वतों की चोटियों तक पहुँचने का जज्बा रखते हैं।
उनकी यह ऐतिहासिक उपलब्धि हर माता-पिता, शिक्षक और समाज के लिए भी एक संदेश है —
> “अगर सही दिशा, सच्चा समर्थन और अनुशासन मिले, तो बच्चे असंभव को भी संभव बना सकते हैं।”
Tegbir Singh आज लाखों बच्चों के लिए एक प्रेरणा हैं और भारत के भविष्य की एक प्रकाशमान किरण भी। उनकी यह यात्रा तो बस शुरुआत है, असली उड़ान अभी बाकी है…
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