बन्नेरघट्टा राष्ट्रीय उद्यान: इतिहास, आकर्षण और सफारी का अनोखा अनुभव
परिचय (Introduction)
भारत अपनी समृद्ध जैव विविधता और अद्भुत प्राकृतिक धरोहरों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। इन्हीं धरोहरों में से एक है बन्नेरघट्टा राष्ट्रीय उद्यान (Bannerghatta National Park), जो कर्नाटक राज्य के बेंगलुरु से कुछ ही दूरी पर स्थित है। यह राष्ट्रीय उद्यान केवल एक पर्यटन स्थल ही नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण, इको-टूरिज्म और शिक्षा का भी महत्वपूर्ण केंद्र है।
यहाँ आने वाले पर्यटक शेर, बाघ, तेंदुए, हाथियों और असंख्य पक्षियों को नज़दीक से देख सकते हैं। साथ ही बटरफ्लाई पार्क और सफारी अनुभव इसे अन्य राष्ट्रीय उद्यानों से अलग पहचान दिलाते हैं।
इतिहास (History of Bannerghatta National Park)
स्थापना
इस उद्यान की स्थापना वर्ष 1971 में की गई थी।
प्रारंभिक दौर में इसे एक संरक्षित क्षेत्र के रूप में बनाया गया, ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा हो सके।
राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा
वर्ष 1974 में इसे आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय उद्यान घोषित कर दिया गया।
इसके बाद कई हिस्सों को धीरे-धीरे सफारी और संरक्षण क्षेत्रों में परिवर्तित किया गया।
वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी पहल
यहाँ Project Tiger और Elephant Conservation Project जैसी योजनाएँ सक्रिय हैं।
बेंगलुरु जैसे बड़े शहर के पास स्थित होने के बावजूद यह उद्यान वन्यजीवों के लिए सुरक्षित घर है।

भौगोलिक स्थिति (Geographical Location)
यह उद्यान कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से लगभग 22 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है।
इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 260.51 वर्ग किलोमीटर है।
उद्यान चालगट्टा और आरण्या श्रृंखलाओं की पहाड़ियों से घिरा हुआ है।
पास में स्थित चामराजनगर और माइसूर के जंगलों से यह जुड़ा हुआ है, जिससे यहाँ जैव विविधता बनी रहती है।
जैव विविधता (Biodiversity)
वनस्पति (Flora)
यहाँ मुख्य रूप से शुष्क पर्णपाती वन, उष्णकटिबंधीय शुष्क वन और झाड़-झंखाड़ पाए जाते हैं।
सागौन, बांस, नीलगिरी, गुलमोहर, अर्जुन वृक्ष
जड़ी-बूटियाँ और औषधीय पौधे
जीव-जंतु (Fauna)
प्रमुख जानवर:
बाघ (Tiger)
शेर (Lion)
तेंदुआ (Leopard)
एशियाई हाथी (Asian Elephant)
भालू, सांभर, चीतल, जंगली सुअर
पक्षी:
मोर, तोता, कठफोड़वा
दुर्लभ प्रवासी पक्षी
सरीसृप:
अजगर, नाग, मगरमच्छ
विशेष आकर्षण (Major Attractions)
बटरफ्लाई पार्क
यह भारत का पहला बटरफ्लाई पार्क है।
यहाँ 48 से अधिक प्रजातियों की तितलियाँ देखी जा सकती हैं।
सफारी अनुभव
लायन सफारी – शेरों को प्राकृतिक माहौल में देखने का अवसर।
टाइगर सफारी – बाघों के साथ रोमांचक अनुभव।
हर्बिवोर सफारी – हिरण, सांभर और हाथी देखने का मौका।
चिड़ियाघर
उद्यान का एक हिस्सा चिड़ियाघर के रूप में विकसित है, जिसमें कई विदेशी पक्षी और जानवर भी हैं।
ट्रेकिंग और एडवेंचर
ट्रेकिंग मार्ग जैसे उदयगिरि और शिवगिरि पहाड़ियाँ रोमांच प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं।
संरक्षण प्रयास (Conservation Efforts)
Project Tiger – बाघों की घटती संख्या को बचाने के लिए।
Elephant Corridor Protection – हाथियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए।
Research & Education Centre – छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए विशेष सुविधा।
पर्यटन महत्व (Tourism Importance)
कब जाएँ (Best Time to Visit)
अक्टूबर से मार्च का समय सबसे उपयुक्त है।
टिकट और समय
प्रवेश शुल्क: ₹80 से ₹260 तक (विदेशियों के लिए अलग)
सफारी शुल्क: अलग-अलग पैकेज उपलब्ध
समय: सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक
कैसे पहुँचे
सड़क मार्ग – बेंगलुरु से टैक्सी और बस उपलब्ध
रेल मार्ग – बेंगलुरु रेलवे स्टेशन निकटतम
हवाई मार्ग – केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, बेंगलुरु
स्थानीय संस्कृति और प्रभाव (Local Culture & Impact)
स्थानीय लोग गाइड और सफारी ड्राइवर के रूप में कार्य करते हैं।
इको-टूरिज्म से रोजगार के अवसर बढ़े हैं।
कर्नाटक की लोक संस्कृति और भोजन यहाँ आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
चुनौतियाँ (Challenges)
शहरीकरण – बेंगलुरु शहर का विस्तार वन्यजीवों पर दबाव डाल रहा है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष – हाथियों और तेंदुओं के गाँवों में घुस आने की घटनाएँ।
प्रदूषण और प्लास्टिक – पर्यावरण पर बुरा असर।
भविष्य की संभावनाएँ (Future Prospects)
Eco-Tourism Village Development
Wildlife Research Centre का विस्तार
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफारी और बटरफ्लाई पार्क का प्रचार

FAQs – बन्नेरघट्टा राष्ट्रीय उद्यान (Bannerghatta National Park)
1. बन्नेरघट्टा राष्ट्रीय उद्यान कहाँ स्थित है?
बन्नेरघट्टा राष्ट्रीय उद्यान कर्नाटक राज्य की राजधानी बेंगलुरु से लगभग 22 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है।
2. इस उद्यान की स्थापना कब हुई थी?
इस उद्यान की स्थापना वर्ष 1971 में की गई थी और इसे वर्ष 1974 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया।
3. बन्नेरघट्टा राष्ट्रीय उद्यान का क्षेत्रफल कितना है?
इस उद्यान का कुल क्षेत्रफल लगभग 260.51 वर्ग किलोमीटर है।
4. यहाँ कौन-कौन से जानवर पाए जाते हैं?
यहाँ बाघ, शेर, तेंदुआ, एशियाई हाथी, भालू, सांभर, चीतल, जंगली सुअर, अजगर और मगरमच्छ जैसे कई जानवर पाए जाते हैं।
5. बन्नेरघट्टा राष्ट्रीय उद्यान में क्या खास है?
यहाँ का लायन और टाइगर सफारी, बटरफ्लाई पार्क और ट्रेकिंग रूट्स इसे अन्य उद्यानों से अलग बनाते हैं।
6. बन्नेरघट्टा राष्ट्रीय उद्यान जाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
अक्टूबर से मार्च का समय सबसे उपयुक्त है क्योंकि इस समय मौसम सुहावना होता है और जानवरों को देखने का अच्छा मौका मिलता है।
7. उद्यान का टाइमिंग क्या है?
यह उद्यान रोजाना सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक खुला रहता है। सोमवार को यह बंद रहता है।
8. उद्यान का प्रवेश शुल्क कितना है?
प्रवेश शुल्क भारतीय नागरिकों के लिए ₹80 से ₹260 तक है। विदेशी पर्यटकों के लिए टिकट दर थोड़ी अधिक होती है। सफारी के लिए अलग से शुल्क लिया जाता है।
9. यहाँ कैसे पहुँचा जा सकता है?
हवाई मार्ग – बेंगलुरु का केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
रेल मार्ग – बेंगलुरु रेलवे स्टेशन
सड़क मार्ग – बेंगलुरु से टैक्सी और बसें उपलब्ध हैं।
10. क्या बन्नेरघट्टा राष्ट्रीय उद्यान बच्चों और परिवारों के लिए उपयुक्त है?
हाँ, यह बच्चों और परिवारों के लिए बिल्कुल उपयुक्त है। खासकर बटरफ्लाई पार्क और सफारी बच्चों के लिए रोमांचक अनुभव प्रदान करते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
बन्नेरघट्टा राष्ट्रीय उद्यान केवल कर्नाटक ही नहीं बल्कि पूरे भारत के लिए वन्यजीव संरक्षण और इको-टूरिज्म का अनमोल खजाना है। यह राष्ट्रीय उद्यान उन चुनिंदा जगहों में से एक है जहाँ पर्यटक बेंगलुरु जैसे आधुनिक महानगर से कुछ ही दूरी पर प्रकृति की गोद में पहुँच जाते हैं।
यहाँ की सफारी, बटरफ्लाई पार्क, चिड़ियाघर और ट्रेकिंग ट्रेल्स हर उम्र के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। साथ ही यह स्थान शिक्षा और अनुसंधान का भी महत्वपूर्ण केंद्र है, जहाँ छात्रों और शोधकर्ताओं को जैव विविधता को समझने का अवसर मिलता है।
हालाँकि उद्यान को शहरीकरण, प्रदूषण और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन सरकार और स्थानीय समुदायों के निरंतर प्रयास इसे और भी सुरक्षित और आकर्षक बना रहे हैं।
यदि आप प्रकृति, रोमांच और वन्यजीवों के अद्भुत संसार का अनुभव करना चाहते हैं, तो बन्नेरघट्टा राष्ट्रीय उद्यान आपकी यात्रा सूची में सबसे ऊपर होना चाहिए। यह स्थान हमें याद दिलाता है कि प्रकृति और मनुष्य का संतुलित सह-अस्तित्व ही सतत विकास की असली पहचान है।
