भारत में इथेनॉल क्रांति: 2025 तक 20% मिश्रण लक्ष्य, फायदे, चुनौतियाँ और भविष्य!

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इथेनॉल से बदलेगा भारत का भविष्य: 2025 तक 20% मिश्रण का बड़ा लक्ष्य!”

भारत ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने और पर्यावरणीय स्थिरता प्राप्त करने के लिए कई महत्वपूर्ण नीतिगत पहल कर रहा है। इसी दिशा में सरकार ने राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति-2018 में संशोधन कर ethanol मिश्रण को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं।

पेट्रोल में ethanol मिश्रण से न केवल जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होगी, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि होगी, प्रदूषण घटेगा और विदेशी मुद्रा भंडार को बचाया जा सकेगा।

सरकार ने ethanol आपूर्ति वर्ष (ईएसवाई) 2025-26 तक पेट्रोल में 20% ethanol मिश्रण का लक्ष्य रखा है, जिसे पहले 2030 तक हासिल किया जाना था।

यह नीति विभिन्न फीडस्टॉक जैसे गन्ने के रस, मक्का, टूटे चावल आदि के उपयोग को प्रोत्साहित करती है और देश में ethanol उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। यहाँ हम विस्तार से समझेंगे कि ethanol मिश्रण नीति क्या है, इसके क्या लाभ हैं, इससे जुड़े तकनीकी पहलू क्या हैं और भारत के लिए इसकी भविष्य की संभावनाएं क्या हैं।

इथेनॉल: राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति और इसके संशोधन

भारत सरकार ने 2018 में राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति लागू की थी, जिसका उद्देश्य देश में जैव ईंधनों के उत्पादन, उपयोग और नीतिगत समर्थन को मजबूत बनाना था। इस नीति में मुख्य रूप से इथेनॉल, बायोडीजल और जैव-सीएनजी के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न उपाय शामिल किए गए थे।

इथेनॉल: नीति में 2022 का संशोधन

सरकार ने 2022 में इस नीति में संशोधन कर 20% ethanol मिश्रण के लक्ष्य को 2030 से घटाकर 2025-26 कर दिया। इसके तहत:

1. ethanol उत्पादन के लिए फीडस्टॉक के स्रोतों का विस्तार – अब गन्ने के रस, मक्का, टूटे चावल, सड़ा हुआ आलू, कसावा आदि का उपयोग किया जा सकता है।

2. ethanol की खरीद को बढ़ावा देने के लिए तेल कंपनियों (OMCs) के लिए दिशानिर्देश – जिससे ethanol उत्पादकों को उचित कीमत मिले।

3. ethanol उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए जीएसटी में कटौती – अब ethanol पर केवल 5% जीएसटी लागू है।

4. किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर – फसल अवशेषों और खराब अनाज से इथेनॉल बनाने की अनुमति।

यह संशोधन न केवल भारत के ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती देगा बल्कि यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘स्वच्छ भारत’ जैसे अभियानों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इथेनॉल मिश्रण का वर्तमान परिदृश्य और उपलब्धियां

10% इथेनॉल मिश्रण लक्ष्य की समय से पूर्व प्राप्ति

सरकार द्वारा लागू किए गए प्रोत्साहनों के कारण, पब्लिक सेक्टर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने जून 2022 में 10%  मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया, जो कि ईएसवाई 2021-22 के निर्धारित लक्ष्य से 5 महीने पहले ही पूरा हो गया।

वर्तमान मिश्रण स्तर

1. ईएसवाई 2022-23 में इथेनॉल मिश्रण – 12.06%

2. ईएसवाई 2023-24 में इथेनॉल मिश्रण – 14.60%

3. ईएसवाई 2024-25 में इथेनॉल मिश्रण – 17.98%

28 फरवरी 2025 तक भारत ने अपने इथेनॉल मिश्रण को लगभग 18% तक बढ़ा लिया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि 2025-26 तक 20% मिश्रण (E20) का लक्ष्य प्राप्त करना संभव है।

इथेनॉल मिश्रण के लाभ

1. जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता में कमी

भारत आयातित कच्चे तेल पर अत्यधिक निर्भर है, जिससे न केवल विदेशी मुद्रा खर्च होती है बल्कि यह व्यापार संतुलन को भी प्रभावित करता है। ethanol मिश्रण से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी।

2. किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर

ethanolउत्पादन के लिए गन्ने, मक्का, कसावा, टूटे चावल और अन्य कृषि अवशेषों का उपयोग किया जा सकता है। इससे किसानों को इन अतिरिक्त स्रोतों से आय प्राप्त होगी और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

3. पर्यावरणीय लाभ और कार्बन उत्सर्जन में कमी

इथेनॉल मिश्रण से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (GHG Emission) कम होगा, जिससे वायु प्रदूषण में कमी आएगी।

4. ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता

भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए बड़े पैमाने पर विदेशी तेल पर निर्भर है। इथेनॉल मिश्रण से ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।

5. रोजगार के अवसर

इथेनॉल उत्पादन और वितरण से कृषि, उद्योग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

भारत में इथेनॉल क्रांति: 2025 तक 20% मिश्रण लक्ष्य, फायदे, चुनौतियाँ और भविष्य!
भारत में इथेनॉल क्रांति: 2025 तक 20% मिश्रण लक्ष्य, फायदे, चुनौतियाँ और भविष्य!

इथेनॉल मिश्रण से संबंधित चुनौतियाँ

1. इथेनॉल उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चा माल

वर्तमान में, भारत का इथेनॉल उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने पर आधारित है। लेकिन गन्ने से इथेनॉल उत्पादन की सीमाएं हैं और इसे अन्य स्रोतों जैसे मक्का और कृषि अवशेषों से भी उत्पादित करने की आवश्यकता है।

2. वाहनों की अनुकूलता

20% इथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल का उपयोग करने के लिए वाहनों के इंजन डिज़ाइन में कुछ बदलावों की आवश्यकता हो सकती है।

सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने बताया है कि इंजन हार्डवेयर और ट्यूनिंग में संशोधन के साथ दक्षता में होने वाली हानि को कम किया जा सकता है।

3. इथेनॉल उत्पादन की लागत और बुनियादी ढाँचा

इथेनॉल उत्पादन के लिए अतिरिक्त निवेश और डिस्टिलरी प्लांट्स की आवश्यकता होगी।

ग्रामीण इलाकों में इथेनॉल उत्पादन सुविधाओं को स्थापित करने और परिवहन लागत को कम करने के लिए लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की जरूरत है।

इथेनॉल मिश्रण और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर प्रभाव

ई20 ईंधन का वाहनों पर प्रभाव

सरकार द्वारा जारी 2020-25 रोडमैप के अनुसार, 20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) का उपयोग करने से चार पहिया वाहनों की ईंधन दक्षता में मामूली कमी देखी गई।

इंजन ट्यूनिंग और हार्डवेयर में संशोधन

सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने बताया कि यदि इंजन के हार्डवेयर और ट्यूनिंग में कुछ बदलाव किए जाएं, तो इथेनॉल मिश्रण से होने वाली दक्षता की हानि को कम किया जा सकता है।

इंजन की स्थायित्व पर प्रभाव

समिति की रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि E20 ईंधन से इंजन के प्रदर्शन, इंजन पुर्जों की स्थायित्व और इंजन ऑयल पर कोई महत्वपूर्ण नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।

ethanol उत्पादन के लिए उपयोग किए जाने वाले स्रोत

सरकार द्वारा विभिन्न प्रकार के फीडस्टॉक (Feedstock) को इथेनॉल उत्पादन के लिए स्वीकृति दी गई है, जिनमें शामिल हैं:

1. गन्ने का रस और गुड़

2. मक्का, चावल, सड़ा हुआ आलू, कसावा आदि

3. कृषि अवशेष जैसे चावल का भूसा, मकई के दाने, कपास के डंठल

सरकार इथेनॉल उत्पादन के लिए हर साल फीडस्टॉक की सीमा निर्धारित करती है, जो उपलब्धता, लागत और मांग के अनुसार बदलती रहती है।

भविष्य की संभावनाएं और चुनौतियां

1. ethanol मिश्रण 20% से अधिक बढ़ाने की संभावनाएं

वर्तमान में सरकार ने 20% से अधिक ethanol मिश्रण के लिए कोई निर्णय नहीं लिया है, लेकिन भविष्य में यह बढ़ सकता है।

2. ethanol उत्पादन क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता

देश में ethanol उत्पादन क्षमता को और अधिक बढ़ाने की जरूरत है ताकि भविष्य में बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके।

3. ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए नई तकनीक का विकास

वाहन कंपनियों को ethanol के उच्च मिश्रण स्तरों के अनुरूप इंजन विकसित करने होंगे।

भविष्य की रणनीति और संभावनाएँ

1. ethanol मिश्रण के बाद के लक्ष्य

सरकार ने अभी तक E20 से आगे बढ़कर कोई आधिकारिक लक्ष्य घोषित नहीं किया है, लेकिन भविष्य में E25 और E30 की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

2. अल्टरनेटिव फीडस्टॉक पर अनुसंधान और विकास

गैर-खाद्य फीडस्टॉक जैसे कि कृषि अवशेषों, समुद्री शैवाल और औद्योगिक अपशिष्टों से ethanol उत्पादन पर शोध किया जा रहा है।

3. ethanol मिश्रण के लिए नई तकनीकें

वाहन निर्माताओं को ऐसे इंजन विकसित करने होंगे जो उच्च ethanol मिश्रण के लिए अधिक अनुकूल हों।

सरकार द्वारा उठाए गए कदम

1. ईबीपी (इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम) को मजबूत बनाना

सरकार ने पेट्रोल में ethanol मिश्रण को बढ़ाने के लिए 2014 से कई महत्वपूर्ण पहल की हैं।

इसमें ethanol खरीद प्रक्रिया को आसान बनाना, कर प्रोत्साहन देना और अधिशेष खाद्यान्न के उपयोग की अनुमति देना शामिल है।

2. जीएसटी में राहत

इथेनॉल पर जीएसटी दर को घटाकर 5% किया गया, जिससे ethanol उत्पादकों को लाभ मिला।

3. ethanol उत्पादन के लिए वित्तीय सहायता

सरकार ने ethanol उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता प्रदान की है।

4. ethanol के अंतरराज्यीय और अंतर्राज्यीय परिवहन को सुविधाजनक बनाना

उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम में संशोधन करके ethanol के सुगम परिवहन की व्यवस्था की गई।

ethanol मिश्रण कार्यक्रम की अंतरराष्ट्रीय तुलना

भारत में ethanol मिश्रण को बढ़ावा देने के लिए जो प्रयास किए जा रहे हैं, वे कई देशों की नीतियों से प्रेरित हैं। विश्व स्तर पर, ब्राजील और अमेरिका जैसे देश पहले से ही उच्च ethanol मिश्रण वाले ईंधन का उपयोग कर रहे हैं।

1. ब्राजील:

ब्राजील में 1970 के दशक से ethanol मिश्रण नीति लागू है।

वहाँ वर्तमान में 27% (E27) ethanol मिश्रण अनिवार्य है।

फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (FFVs) को विकसित किया गया है, जो 100% इथेनॉल (E100) तक उपयोग कर सकते हैं।

2. संयुक्त राज्य अमेरिका:

अमेरिका में 10% इथेनॉल मिश्रण (E10) अनिवार्य है, और कई जगहों पर 15% (E15) मिश्रण भी उपलब्ध है।

अमेरिका मुख्य रूप से मक्का आधारित इथेनॉल का उपयोग करता है।

3. यूरोपीय संघ:

यूरोपीय देशों में ethanol मिश्रण का स्तर 5-10% के बीच है।

यहाँ पर्यावरणीय चिंताओं के कारण जैव ईंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

भारत में इथेनॉल मिश्रण से संबंधित भविष्य की योजनाएँ

1. फ्लेक्स-फ्यूल इंजन का विकास

भारत सरकार ने ऑटोमोबाइल निर्माताओं से फ्लेक्स-फ्यूल इंजन विकसित करने को कहा है, ताकि वे 20% से अधिक ethanol मिश्रण वाले ईंधन पर भी सुचारू रूप से काम कर सकें।

कुछ कंपनियों ने E85 (85% इथेनॉल) तक अनुकूलित वाहनों पर काम करना शुरू कर दिया है।

2. सेलूलोसिक इथेनॉल (द्वितीय पीढ़ी का इथेनॉल)

पारंपरिक फीडस्टॉक के बजाय कृषि अवशेषों से ethanol बनाने के लिए अनुसंधान किया जा रहा है।

इससे खाद्य सुरक्षा प्रभावित किए बिना इथेनॉल उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।

3. इथेनॉल मिश्रण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ना

सरकार चाहती है कि ethanol उत्पादन ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक हो, ताकि किसानों को सीधा लाभ मिले।

सहकारी चीनी मिलों और छोटे डिस्टिलरी प्लांट्स को सब्सिडी दी जा रही है।

4. ब्लेंडिंग लक्ष्य को और बढ़ाना (E25 और E30)

अगर भारत 2025-26 तक E20 लक्ष्य हासिल कर लेता है, तो भविष्य में इसे E25 और E30 तक ले जाने पर विचार किया जा सकता है।

ब्राजील की तरह, फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के साथ E100 के उपयोग की संभावना भी खारिज नहीं की जा सकती।

भारत में इथेनॉल क्रांति: 2025 तक 20% मिश्रण लक्ष्य, फायदे, चुनौतियाँ और भविष्य!
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कृषि क्षेत्र पर प्रभाव और किसानों को मिलने वाले लाभ

ethanol उत्पादन का सबसे बड़ा लाभ किसानों को होगा, क्योंकि इसके लिए विभिन्न कृषि उत्पादों और अवशेषों का उपयोग किया जाता है।

1. गन्ना किसानों को सुनिश्चित बाजार:

ethanol उत्पादन के लिए गन्ने का उपयोग होने से चीनी उद्योग पर दबाव कम होगा।

किसानों को समय पर भुगतान मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

2. मक्का और अन्य फसलों को बढ़ावा:

सरकार मक्का, कसावा, और अन्य गैर-खाद्य फसलों से ethanol बनाने पर जोर दे रही है।

इससे किसानों को वैकल्पिक फसल उगाने का अवसर मिलेगा।

3. अधिशेष और खराब खाद्यान्न का उपयोग:

टूटे हुए चावल, सड़ा हुआ आलू और अन्य खराब अनाज को ethanol उत्पादन में उपयोग किया जा सकता है।

इससे खाद्यान्न बर्बादी रुकेगी और किसानों को नुकसान नहीं होगा।

4. कृषि अवशेषों का सही उपयोग:

चावल का भूसा, मकई के दाने, कपास के डंठल आदि से इथेनॉल बनाया जा सकता है।

इससे किसानों की आय बढ़ेगी और खेतों में पराली जलाने की समस्या कम होगी।

इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की चुनौतियाँ और समाधान

हालांकि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के कई लाभ हैं, लेकिन इसे पूरी तरह सफल बनाने के लिए कुछ चुनौतियों से निपटने की जरूरत है।

1. इथेनॉल उत्पादन की स्थिरता:

भारत में गन्ना उत्पादन मानसून पर निर्भर करता है। यदि मानसून कमजोर रहता है, तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

सरकार मक्का और अन्य स्रोतों से इथेनॉल उत्पादन बढ़ाकर इस समस्या को हल कर रही है।

2. वाहन अनुकूलता और उपभोक्ता जागरूकता:

वर्तमान में अधिकतर वाहन E10 के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

सरकार ऑटोमोबाइल कंपनियों को E20 अनुकूल वाहन बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

3. बुनियादी ढांचे की कमी:

पूरे देश में ethanol मिश्रण की समान व्यवस्था नहीं है।

सरकार नए डिस्टिलरी प्लांट लगाने और लॉजिस्टिक्स सुधारने के लिए निवेश कर रही है।

4. पेट्रोलियम कंपनियों की भागीदारी:

तेल कंपनियों को इथेनॉल खरीद प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाना होगा।

इसके लिए OMCs को दीर्घकालिक अनुबंध करने होंगे, ताकि ethanol उत्पादकों को सुरक्षा मिल सके।

सरकार की दीर्घकालिक दृष्टि और संभावनाएँ

भारत सरकार केवल ethanol मिश्रण पर ही नहीं, बल्कि संपूर्ण जैव ईंधन पारिस्थितिकी तंत्र को विकसित करने पर काम कर रही है। भविष्य की रणनीतियाँ इस प्रकार हो सकती हैं:

1. बायोडीजल और हाइड्रोजन आधारित ईंधन का विकास:

ethanol के अलावा, बायोडीजल और ग्रीन हाइड्रोजन पर भी अनुसंधान जारी है।

भारत 2030 तक ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।

2. फ्लेक्स-फ्यूल इंजन नीति का कार्यान्वयन:

सरकार ने वाहन कंपनियों को 2025 तक फ्लेक्स-फ्यूल इंजन विकसित करने का निर्देश दिया है।

इससे पेट्रोल और इथेनॉल के मिश्रण के प्रति उपभोक्ता का रुझान बढ़ेगा।

3. ग्रामीण भारत में जैव ईंधन क्रांति:

छोटे किसानों को इथेनॉल उत्पादन से जोड़ने के लिए सहकारी मॉडल पर जोर दिया जा रहा है।

इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार होगा और किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलेगा।

4. कचरे से ऊर्जा उत्पादन (Waste to Energy):

जैव ईंधन नीति के तहत, कृषि और शहरी कचरे से भी जैव ईंधन उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा।

इससे पर्यावरण को नुकसान कम होगा और ऊर्जा का सतत स्रोत मिलेगा।

निष्कर्ष

भारत में ethanol मिश्रण कार्यक्रम ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। सरकार 2025-26 तक 20% इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए तेजी से काम कर रही है। इस योजना से न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि किसानों को आर्थिक लाभ, रोजगार के नए अवसर और स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार भी होगा।

हालांकि कुछ चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं, लेकिन सरकार द्वारा उठाए गए कदम इन चुनौतियों का समाधान कर सकते हैं। यदि नीति का सही ढंग से क्रियान्वयन किया जाता है, तो भारत आने वाले वर्षों में जैव ईंधन के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व कर सकता है।

इथेनॉल मिश्रण न केवल एक ऊर्जा समाधान है, बल्कि भारत की आत्मनिर्भरता और सतत विकास का प्रतीक भी है।


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