मुकुर्ती राष्ट्रीय उद्यान

मुकुर्ती राष्ट्रीय उद्यान – इतिहास, वन्यजीव, दर्शनीय स्थल और घूमने का सही समय

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मुकुर्ती राष्ट्रीय उद्यान: तमिलनाडु का प्राकृतिक खजाना और यात्रा अनुभव

परिचय

मुकुर्ती राष्ट्रीय उद्यान (Mukkurthi National Park) भारत के तमिलनाडु राज्य में स्थित एक महत्वपूर्ण संरक्षित क्षेत्र है। यह उद्यान नीलगिरि की पहाड़ियों में फैला हुआ है और अपनी अद्वितीय जैव-विविधता, दुर्लभ वन्यजीवों तथा उच्च हिमालयी वनस्पतियों के लिए प्रसिद्ध है।

इसे UNESCO की Nilgiri Biosphere Reserve का हिस्सा घोषित किया गया है। यह स्थान प्रकृति प्रेमियों, वैज्ञानिकों और पर्यावरण संरक्षणकर्ताओं के लिए अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है।

मुकुर्ती राष्ट्रीय उद्यान का इतिहास

स्थापना वर्ष – 1986 में मुकुर्ती राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना की गई।

इसका उद्देश्य नीलगिरि ताहर (Nilgiri Tahr), जो यहाँ की सबसे दुर्लभ प्रजाति है, का संरक्षण करना था।

पूर्व में इस क्षेत्र को Nilgiri Tahr Wildlife Sanctuary कहा जाता था।

यह उद्यान औपनिवेशिक काल से ही वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए महत्त्वपूर्ण रहा।

भौगोलिक स्थिति

स्थान: उद्यान तमिलनाडु के नीलगिरि जिले में स्थित है।

निर्देशांक: 11°16′N से 11°22′N अक्षांश और 76°26′E से 76°34′E देशांतर।

क्षेत्रफल: लगभग 78.46 वर्ग किलोमीटर।

ऊँचाई: 1500 से 2600 मीटर के बीच।

उद्यान की सीमा पश्चिम में केरल के साइलेंट वैली नेशनल पार्क और उत्तरी सीमा में मुदुमलाई टाइगर रिज़र्व से मिलती है।

मुकुर्ती राष्ट्रीय उद्यान
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मुकुर्ती राष्ट्रीय उद्यान की जलवायु

तापमान: यहाँ का औसत तापमान 0°C से 23°C तक रहता है।

वर्षा: उद्यान को मुख्य रूप से दक्षिण-पश्चिम मानसून से वर्षा प्राप्त होती है।

मौसम:

सर्दी (नवंबर से फरवरी): ठंडी और शुष्क।

गर्मी (मार्च से मई): मध्यम ठंडी।

मानसून (जून से सितंबर): अधिक वर्षा और हरियाली से भरपूर।

मुकुर्ती राष्ट्रीय उद्यान की वनस्पति

इस उद्यान की सबसे बड़ी विशेषता है यहाँ पाई जाने वाली शोला वनस्पति (Shola Forests)।

शोला घासभूमि: छोटी-छोटी हरी घास से ढकी घाटियाँ।

शोला वन: नमी युक्त सदाबहार वन।

यहाँ की प्रमुख वनस्पतियाँ:

रोडोडेंड्रॉन

माइकेलिया

इल्यूसिन

क्लेमाटिस

बम्बू (बाँस की प्रजातियाँ)

मुकुर्ती राष्ट्रीय उद्यान का जीव-जंतु संसार

स्तनधारी

नीलगिरि ताहर – इस उद्यान का सबसे प्रमुख और संरक्षित जीव।

हाथी

बाघ

तेंदुआ

भालू

सांभर हिरण

नेवला

भारतीय पेंगोलिन

पक्षी

काला बगुला

हिल माइनाह

केरल लॉफिंग थ्रश

मालाबार व्हिस्लिंग थ्रश

नीलगिरि फ्लाईकैचर

सरीसृप व उभयचर

किंग कोबरा

इंडियन रॉक पाइथन

ट्री फ्रॉग

गेकोस

मुकुर्ती राष्ट्रीय उद्यान का विशेष महत्व

1. जैव विविधता संरक्षण

यहाँ की अद्वितीय जलवायु और भू-आकृति दुर्लभ प्रजातियों को संरक्षित करती है।

2. नीलगिरि ताहर का घर

यह स्थान नीलगिरि ताहर के संरक्षण के लिए विश्व में प्रसिद्ध है।

3. जल स्रोत

यह उद्यान कावेरी और अन्य नदियों की सहायक नदियों के लिए जलग्रहण क्षेत्र के रूप में कार्य करता है

पर्यटन और आकर्षण

प्रमुख दर्शनीय स्थल

मुकुर्ती पीक

मुकुर्ती झील

पिकनिक स्पॉट्स और व्यू पॉइंट्स

गतिविधियाँ

ट्रेकिंग

बर्ड वॉचिंग

वन्यजीव फोटोग्राफी

नेचर वॉक

मुकुर्ती राष्ट्रीय उद्यान जाने का सही समय

सबसे अच्छा समय: सितंबर से मई।

मानसून में यहाँ पहुँचना कठिन हो सकता है क्योंकि रास्ते फिसलन भरे हो जाते हैं।

मुकुर्ती राष्ट्रीय उद्यान तक पहुँचने के मार्ग

वायु मार्ग

निकटतम हवाई अड्डा: कोयंबटूर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (140 किमी दूर)।

रेल मार्ग

निकटतम रेलवे स्टेशन: ऊटी रेलवे स्टेशन (45 किमी दूर)।

सड़क मार्ग

ऊटी से टैक्सी और बसों के माध्यम से उद्यान तक आसानी से पहुँचा जा सकता है।

मुकुर्ती राष्ट्रीय उद्यान के नियम और प्रवेश

पर्यटकों को Forest Department की अनुमति लेना अनिवार्य है।

शिकार, प्लास्टिक का उपयोग और पेड़ों की कटाई पूर्णतः प्रतिबंधित है।

गाइड के बिना प्रवेश की अनुमति नहीं मिलती।

मुकुर्ती राष्ट्रीय उद्यान में संरक्षण की चुनौतियाँ

मानव हस्तक्षेप

वनों की कटाई

अवैध शिकार

पर्यटन का दबाव

जलवायु परिवर्तन

सरकार और संस्थाओं द्वारा उठाए गए कदम

नीलगिरि बायोस्फीयर रिज़र्व में शामिल करना।

विशेष संरक्षण प्रोजेक्ट – Nilgiri Tahr Project।

इको-टूरिज्म को बढ़ावा।

जागरूकता अभियान।

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मुकुर्ती राष्ट्रीय उद्यान से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQs)

1. मुकुर्ती राष्ट्रीय उद्यान कहाँ स्थित है?

मुकुर्ती राष्ट्रीय उद्यान तमिलनाडु राज्य के नीलगिरि जिले में स्थित है। यह नीलगिरि बायोस्फीयर रिज़र्व का हिस्सा है और ऊटी से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी पर पड़ता है।

2. मुकुर्ती राष्ट्रीय उद्यान क्यों प्रसिद्ध है?

यह उद्यान विशेष रूप से नीलगिरि ताहर (Nilgiri Tahr) के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है। इसके अलावा यहाँ की शोला वनस्पति, उच्च पर्वतीय घासभूमि और दुर्लभ पक्षी प्रजातियाँ इसे खास बनाती हैं।

3. मुकुर्ती राष्ट्रीय उद्यान कब स्थापित किया गया था?

मुकुर्ती राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना 1986 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य नीलगिरि ताहर सहित विलुप्तप्राय प्रजातियों का संरक्षण करना था।

4. मुकुर्ती राष्ट्रीय उद्यान का क्षेत्रफल कितना है?

इस उद्यान का कुल क्षेत्रफल लगभग 78.46 वर्ग किलोमीटर है।

5. मुकुर्ती राष्ट्रीय उद्यान में कौन-कौन से जानवर पाए जाते हैं?

यहाँ नीलगिरि ताहर के अलावा हाथी, बाघ, तेंदुआ, सांभर हिरण, जंगली कुत्ते, भालू और विभिन्न पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं।

6. मुकुर्ती राष्ट्रीय उद्यान जाने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?

सितंबर से मई तक का समय यहाँ घूमने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। इस दौरान मौसम साफ और ठंडा होता है तथा ट्रेकिंग और बर्ड वॉचिंग के लिए उपयुक्त रहता है।

7. मुकुर्ती राष्ट्रीय उद्यान में प्रवेश शुल्क कितना है?

प्रवेश शुल्क समय-समय पर बदलता रहता है। औसतन भारतीय पर्यटकों के लिए 30–50 रुपये और विदेशी पर्यटकों के लिए 300–500 रुपये तक शुल्क लिया जाता है। इसके अलावा कैमरा और गाइड शुल्क अलग से होता है।

8. मुकुर्ती राष्ट्रीय उद्यान तक पहुँचने का आसान तरीका क्या है?

हवाई मार्ग: कोयंबटूर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (140 किमी)।

रेल मार्ग: ऊटी रेलवे स्टेशन (45 किमी)।

सड़क मार्ग: ऊटी से बस/टैक्सी के माध्यम से।

9. क्या मुकुर्ती राष्ट्रीय उद्यान में रात को रुकने की सुविधा है?

उद्यान के अंदर रात रुकने की अनुमति नहीं है। लेकिन ऊटी और इसके आसपास कई होटल, गेस्ट हाउस और रिसॉर्ट उपलब्ध हैं।

10. मुकुर्ती राष्ट्रीय उद्यान में कौन-कौन सी गतिविधियाँ की जा सकती हैं?

ट्रेकिंग

बर्ड वॉचिंग

वन्यजीव फोटोग्राफी

नेचर वॉक

निष्कर्ष

मुकुर्ती राष्ट्रीय उद्यान केवल एक संरक्षित क्षेत्र नहीं, बल्कि भारत की प्राकृतिक धरोहर है। यह उद्यान नीलगिरि की ऊँची पर्वत श्रृंखलाओं, हरे-भरे शोला वनों और दुर्लभ प्रजातियों की उपस्थिति के कारण विश्व भर में विशेष पहचान रखता है।

यहाँ का पर्यावरणीय संतुलन, जैव विविधता और जलवायु वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिकों, पर्यावरणविदों और प्रकृति प्रेमियों के लिए अध्ययन का महत्वपूर्ण विषय है।

नीलगिरि ताहर जैसी विलुप्तप्राय प्रजातियों का संरक्षण, स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण—ये सब इस उद्यान की महत्ता को और बढ़ा देते हैं।

मुकुर्ती झील, ऊँचे पहाड़ी दृश्य, और अद्वितीय वन्यजीव इसे न सिर्फ पर्यटन का आकर्षण बनाते हैं बल्कि सतत विकास और इको-टूरिज्म की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

हालाँकि, इस उद्यान के सामने कई चुनौतियाँ भी हैं—मानव हस्तक्षेप, पर्यटन का दबाव, जलवायु परिवर्तन और अवैध गतिविधियाँ। इन खतरों से निपटने के लिए सरकार, स्थानीय समुदाय और पर्यावरण संगठनों को मिलकर प्रयास करने होंगे।

खासकर स्थानीय लोगों की सहभागिता और जागरूकता यहाँ के संरक्षण में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

भविष्य की पीढ़ियों के लिए मुकुर्ती राष्ट्रीय उद्यान केवल एक पर्यटन स्थल नहीं रहेगा, बल्कि यह प्रकृति और मानव के सह-अस्तित्व का जीवंत उदाहरण बनेगा।

हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि यह उद्यान आने वाले दशकों में भी अपनी प्राकृतिक सुंदरता और जैविक विविधता को उसी तरह सुरक्षित रख सके, जैसा आज हमें देखने को मिलता है।

इसलिए, मुकुर्ती राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा करने वाले हर व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि वे पर्यावरण संरक्षण के नियमों का पालन करें, प्लास्टिक का प्रयोग न करें, वन्यजीवों को परेशान न करें और इको-फ्रेंडली तरीके से इस धरोहर का आनंद लें।

अंततः, मुकुर्ती राष्ट्रीय उद्यान भारत के उन दुर्लभ स्थलों में से एक है, जहाँ प्रकृति, संस्कृति और संरक्षण एक साथ मिलते हैं। यह उद्यान हमें यह सिखाता है कि यदि हम प्रकृति को बचाएँगे, तो वही प्रकृति आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन का आधार बनेगी।

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Sanjeev

Hello! Welcome To About me My name is Sanjeev Kumar Sanya. I have completed my BCA and MCA degrees in education. My keen interest in technology and the digital world inspired me to start this website, “Aajvani.com.”

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