गौरैया गायब क्यों हुई? वैज्ञानिक कारण और भारत में घटती संख्या की रिपोर्ट
🔷 परिचय: कभी घर-आंगन की शान, आज खतरे में गौरैया
भारत के ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में गौरैया कभी सबसे सामान्य और प्यारी चिड़िया हुआ करती थी। सुबह उसकी चहचहाहट हमारे दिन की शुरुआत मानी जाती थी। लेकिन पिछले 20–25 वर्षों में गौरैया की संख्या में तेज़ी से गिरावट आई है।
आज यह स्थिति ऐसी है कि कई शहरों में गौरैया लगभग गायब हो चुकी है।
गौरैया के संरक्षण के लिए सरकार, NGO, वैज्ञानिक और आम लोग लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद यह उत्सुकता का विषय है कि आखिर वह चिड़िया जो हमारे साथ ही रहती थी, वह अचानक कम क्यों होने लगी?
इस Article में हम विस्तार से समझेंगे—
✔ गौरैया क्या है
✔ इसके विलुप्त होने के कारण
✔ पर्यावरण पर प्रभाव
✔ वैज्ञानिक अध्ययन
✔ सरकार और NGO के प्रयास
✔ घर पर गौरैया को वापस लाने के आसान उपाय
✔ निष्कर्ष

1. गौरैया क्या है? (What is a Sparrow?)
1.1 वैज्ञानिक वर्गीकरण
वैज्ञानिक नाम (Scientific Name): Passer domesticus
कुल (Family): Passeridae
वर्ग (Class): Aves
आयु (Lifespan): 3–7 वर्ष
औसत लंबाई: 14–16 सेमी
औसत वजन: 24–40 ग्राम
गौरैया एक छोटी, सामाजिक और मानव-अनुकूल चिड़िया है, जो शहरों, गाँवों, खेतों और घरों के आसपास रहना पसंद करती है। यह बीज, अनाज, छोटे कीड़ों और बच्चों को दिए जाने वाले कीट-आहार पर निर्भर रहती है।
2. भारत में गौरैया: इतिहास और सांस्कृतिक महत्व
2.1 भारतीय जीवन का अभिन्न हिस्सा
गौरैया को भारत के कई हिस्सों में शुभ माना जाता है।
घर में घोंसला बनना समृद्धि का संकेत माना जाता था।
किसान गौरैया को अपने मित्र के रूप में देखते थे क्योंकि यह कीड़ों को खाती है।
2.2 स्कूल की कविताओं और लोकगीतों में गौरैया
गौरैया भारतीय बच्चों की पहली पहचानी जाने वाली चिड़िया होती थी। लोकगीत, कहावतें और बच्चों की किताबों में इसका उल्लेख आम था।
आज यह सांस्कृतिक पक्ष भी कमजोर पड़ रहा है क्योंकि नई पीढ़ी ने गौरैया को असल में देखा ही नहीं।
3. गौरैया के घटते आंकड़े – डराने वाले तथ्य
भारत में पिछले दो दशक में गौरैया की आबादी 60–80% तक कम हुई है (विभिन्न शोध एवं सर्वेक्षण के अनुसार)।
कुछ बड़े शहर जैसे—
दिल्ली
मुंबई
बेंगलुरु
चेन्नई
कोलकाता
—में गौरैया का मिलना बहुत दुर्लभ हो चुका है।
2012 में गौरेया को दिल्ली की राज्य पक्षी घोषित किया गया, ताकि इसके संरक्षण पर ध्यान दिया जा सके।
4. गौरैया क्यों घट रही है? (Major Reasons of Sparrow Decline)
यह सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है। वैज्ञानिकों ने इसके मुख्य कारणों की सूची बताई है:
4.1 मोबाइल टावर और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन (EMR)
मोबाइल टावर की रेडिएशन—
गौरैया के नेविगेशन
भोजन खोजने की क्षमता
प्रजनन प्रक्रिया पर नकारात्मक असर डालती है।
अध्ययन बताते हैं कि रेडिएशन से:
✔ गौरैया के अंडों का विकास प्रभावित होता है
✔ चूजों का दिमाग कमजोर पड़ता है
✔ दिशा भटकने की समस्या बढ़ती है
4.2 कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग
आधुनिक खेती में कीटनाशक (Pesticides) के बढ़ते उपयोग ने गौरैया के भोजन को खत्म कर दिया है।
गौरैया अपने बच्चों को कीड़े खिलाती है लेकिन—
DDT
Endosulfan
Organophosphate जैसे कीटनाशक छोटे कीड़ों को मार देते हैं।
बिना भोजन के चूजे जीवित नहीं रहते।
4.3 घरों की संरचना में बदलाव
पहले के घरों में थे—
खुली खिड़कियाँ
टाइलों की छत
लकड़ी के बीम
छोटे-छोटे कोने
जहाँ Sparrow आसानी से घोंसला बना लेती थी।
आधुनिक कंक्रीट के घरों में—
स्मूथ दीवारें
सील्ड खिड़कियाँ
फॉल्स सीलिंग
—के कारण घोंसला बनाने की जगह ही नहीं बची।
4.4 प्रदूषण और शहरीकरण
जैसे-जैसे शहर फैल रहे हैं—
पेड़ों की कटाई
हरियाली की कमी
ध्वनि प्रदूषण
वायु प्रदूषण
—गौरैया के लिए जीवन असंभव बनाते जा रहे हैं।
4.5 भोजन की कमी
पहले घर-आंगन में रोज अनाज-बाजरा डाला जाता था।
आज—
पैकेटबंद खाना
सीमेंट की बालकनी
कूड़ा-कचरा
—बदलती जीवनशैली से Sparrow की प्राकृतिक भोजन व्यवस्था टूट गई है।
5. Sparrow के विलुप्त होने से पर्यावरण पर प्रभाव
Sparrow केवल एक चिड़िया नहीं है। वह पर्यावरण के पूरे संतुलन का हिस्सा है।
5.1 कीट नियंत्रण में गिरावट
Sparrow हजारों कीड़ों को खाती है।
इसके कम होने से—
फसलों में कीट बढ़ेंगे
कीटनाशकों की जरूरत बढ़ेगी
भूमि और पानी और अधिक प्रदूषित होंगे
5.2 परागण (Pollination) पर असर
Sparrow कई छोटे पौधों का परागण करती है।
इसके न रहने से जैव विविधता प्रभावित होती है।
5.3 पारिस्थितिक श्रृंखला (Food Chain) का टूटना
Sparrow कई शिकारी जीवों का भोजन है—
उल्लू
बाज
बिल्ली
Sparrow के जाने से भोजन श्रृंखला असंतुलित होती है।
6. वैज्ञानिक शोध क्या बताते हैं?
वैज्ञानिकों ने Sparrow पर कई अध्ययन किए हैं:
✔ EMR (मोबाइल रेडिएशन) से चूजों के विकास में कमी
अंडों के फूटने की सफलता केवल 20–30% रह जाती है।
✔ कीटनाशकों से
चूजों के मरने की दर अधिक
प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर
भोजन की कमी
✔ शहरी क्षेत्रों में
जहाँ हरियाली 10% से कम है, वहाँ गौरैया लगभग 90% गायब है।
7. सरकार, NGO और अंतरराष्ट्रीय प्रयास
7.1 राष्ट्रीय गौरैया दिवस – 20 मार्च
भारत में हर साल 20 मार्च को राष्ट्रीय गौरैया दिवस मनाया जाता है।
7.2 भारत सरकार के प्रयास
मोबाइल टावर रेडिएशन की सीमा को नियंत्रित किया
पक्षी संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम
शहरी पार्कों में घोंसला बॉक्स लगाने की योजना
7.3 NGO के प्रयास
“Nature Forever Society” जैसे संगठन—
✔ घोंसला बॉक्स
✔ पानी के पात्र
✔ जागरूकता अभियान चलाते हैं।
8. अपने घर में Sparrow को कैसे वापस लाएँ? (Easy Steps)
Sparrow आपके घर तभी लौटेगी जब उसे 3 चीज़ें मिलें:
भोजन + पानी + घोंसला

8.1 घोंसला बॉक्स लगाएँ
लकड़ी या मिट्टी का घोंसला बॉक्स लगाएँ।
उसे लगाएँ—
बरामदे
बालकनी
पेड़
8.2 रोज खाना डालें
बाजरा
चावल
गेहूं
चिड़ियों के दाने
एक फीडिंग प्लेटफॉर्म जरूर लगाएँ।
8.3 पानी का स्रोत रखें
गर्मियों में पानी की कमी से चिड़ियों की मौत होती है।
हर बालकनी में मिट्टी का पानी पात्र रखें।
8.4 पौधे लगाएँ
Sparrow घनी पत्तियों वाले पौधों के पास रहना पसंद करती है:
तुलसी
मनीप्लांट
जास्मिन
मोगरा
शैडो वाले पौधे
8.5 मोबाइल टावर, WiFi राउटर को कम शक्ति पर चलाएँ
अत्यधिक रेडिएशन वाले राउटर को घर के बाहर/कोने में रखें।
9. स्कूलों और समाज की भूमिका
बच्चों को पक्षियों के महत्व के बारे में पढ़ाया जाए
पार्कों में Bird-Friendly क्षेत्र बनाए जाएँ
हर कॉलोनी में Sparrow Zone स्थापित किए जाएँ
“घोंसला बैंक” की अवधारणा बढ़ाई जाए
10. भविष्य क्या कहता है?
यदि अभी भी Sparrow पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले 10–15 वर्षों में यह भारत के कई क्षेत्रों से पूरी तरह गायब हो सकती है।
परंतु अच्छी बात यह है कि—
जहाँ भी लोगों ने
✔ घोंसला
✔ दाना
✔ पानी
का नियमित इंतजाम किया—
वहाँ Sparrow की संख्या वापस बढ़ रही है।
11. निष्कर्ष (Conclusion)
Sparrow का तेजी से घटता अस्तित्व केवल एक पक्षी की समस्या नहीं है, बल्कि यह हमारे बदलते पर्यावरण, आधुनिक जीवनशैली और प्रकृति से दूरी का संकेत है। कभी हर घर, खेत और पेड़ की शाखाओं पर दिखने वाली यह छोटी चिड़िया आज भोजन की कमी, घोंसले की जगह न मिलना, कीटनाशकों, मोबाइल रेडिएशन और बढ़ते शहरीकरण जैसी चुनौतियों के कारण संघर्ष कर रही है।
Sparrow की कमी हमें यह याद दिलाती है कि यदि प्रकृति का संतुलन बिगड़ता है, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान मनुष्य को ही उठाना पड़ता है। पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है।
यदि हम अपने घरों में थोड़ा-सा स्थान, थोड़ा-सा दाना और थोड़ा-सा पानी गौरैया के लिए उपलब्ध कर दें, तो इसके अस्तित्व को बचाया जा सकता है।
छोटे प्रयास—
जैसे घोंसला बॉक्स लगाना, पानी रखना, पौधे लगाना, और कीटनाशकों का कम उपयोग—
Sparrow की वापसी की सबसे बड़ी उम्मीद हैं।
यदि हम आज जागरूक हो जाएँ, तो कल फिर हमारी सुबह Sparrow की प्यारी चहचहाहट से शुरू हो सकती है।
