पार्वती-अरगा पक्षी अभयारण्य क्यों है खास

पार्वती-अरगा पक्षी अभयारण्य क्यों है खास? जानिए रामसर साइट का पूरा महत्व

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पार्वती-अरगा पक्षी अभयारण्य गोंडा उत्तर प्रदेश: इतिहास, पक्षी और घूमने की पूरी जानकारी

परिचय
भारत में जैव विविधता और प्राकृतिक वेटलैंड्स का महत्व दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। इन्हीं महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहरों में से एक है पार्वती-अरगा पक्षी अभयारण्य, जो उत्तर प्रदेश के गोंडा जनपद में स्थित है। यह अभयारण्य न केवल प्रवासी और स्थानीय पक्षियों का सुरक्षित आश्रय है, बल्कि वेटलैंड पारिस्थितिकी, जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन का भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।

पार्वती-अरगा पक्षी अभयारण्य दो प्राकृतिक झीलों — पार्वती ताल और अरगा ताल — के संयुक्त स्वरूप से बना है। यही कारण है कि इसे उत्तर भारत के विशिष्ट वेटलैंड अभयारण्यों में गिना जाता है।

भौगोलिक स्थिति और क्षेत्रफल

पार्वती-अरगा पक्षी अभयारण्य उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में स्थित है। यह क्षेत्र तराई मैदान का हिस्सा है, जहाँ भूमि समतल, उपजाऊ और जल संसाधनों से भरपूर है।

कुल संरक्षित क्षेत्रफल: लगभग 1084 हेक्टेयर

स्थलाकृति: समतल मैदान, झीलें, दलदली क्षेत्र और आसपास का वन क्षेत्र

निकटवर्ती प्रमुख क्षेत्र: अयोध्या, गोंडा, बहराइच

यह स्थान भौगोलिक रूप से ऐसा है जहाँ जल वर्ष भर उपलब्ध रहता है, जिससे पक्षियों के लिए भोजन, प्रजनन और विश्राम के अनुकूल परिस्थितियाँ बनी रहती हैं।

इतिहास और संरक्षण की पृष्ठभूमि

पार्वती-अरगा क्षेत्र लंबे समय से स्थानीय लोगों के लिए जल स्रोत और प्राकृतिक आश्रय के रूप में जाना जाता था। यहाँ सर्दियों के मौसम में बड़ी संख्या में विदेशी पक्षी आते थे, जिसे देखकर वन विभाग और वैज्ञानिकों ने इसे संरक्षित क्षेत्र घोषित करने की आवश्यकता महसूस की।

1990 में इसे आधिकारिक रूप से पक्षी अभयारण्य घोषित किया गया

बाद में इसके वेटलैंड महत्व को देखते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय रामसर साइट का दर्जा मिला

रामसर साइट बनने के बाद इस क्षेत्र का महत्व केवल राज्य या देश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण वेटलैंड्स की सूची में शामिल हो गया।

पार्वती-अरगा पक्षी अभयारण्य क्यों है खास
पार्वती-अरगा पक्षी अभयारण्य क्यों है खास
पार्वती और अरगा ताल: प्राकृतिक संरचना

पार्वती-अरगा अभयारण्य की सबसे बड़ी विशेषता इसकी दो झीलें हैं:

1. पार्वती ताल
यह झील अपेक्षाकृत बड़ी है और वर्ष भर पानी से भरी रहती है। यह झील पक्षियों के लिए मुख्य भोजन क्षेत्र है।

2. अरगा ताल
यह झील पार्वती ताल से जुड़ी हुई है और दलदली क्षेत्र के रूप में कार्य करती है, जो जलीय पौधों और छोटे जीवों के लिए आदर्श है।
दोनों झीलें मिलकर एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बनाती हैं जहाँ पक्षी, मछलियाँ, कीट और वनस्पति आपस में संतुलन बनाए रखते हैं।

जलवायु और मौसम

पार्वती-अरगा क्षेत्र की जलवायु उष्णकटिबंधीय है।

ग्रीष्म ऋतु: गर्म और शुष्क

वर्षा ऋतु: पर्याप्त वर्षा, जिससे झीलें और दलदल भर जाते हैं

शीत ऋतु: ठंडी और नम — यही प्रवासी पक्षियों के आगमन का समय होता है

नवंबर से फरवरी के बीच यह क्षेत्र पक्षी प्रेमियों के लिए स्वर्ग बन जाता है।

पक्षी विविधता (Avifauna)

पार्वती-अरगा पक्षी अभयारण्य की पहचान इसकी समृद्ध पक्षी विविधता है। यहाँ 150 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं।

प्रवासी पक्षी

सर्दियों में हजारों किलोमीटर दूर से आने वाले पक्षी इस अभयारण्य को अपना अस्थायी घर बनाते हैं। ये पक्षी ठंडे देशों से यहाँ गर्म वातावरण और भोजन की तलाश में आते हैं।

मुख्य प्रवासी पक्षी:

नॉर्दर्न पिनटेल

ग्रेलैग गूज

मल्लार्ड

नॉर्दर्न शोवेलर

रेड-क्रेस्टेड पोचार्ड

स्थानीय और आवासीय पक्षी

ये पक्षी वर्ष भर इसी क्षेत्र में रहते हैं:

सारस क्रेन

पेंटेड स्टॉर्क

इंडियन रोलर

ब्लैक ड्रोंगो

पर्पल स्वैम्पहेन

दुर्लभ और संकटग्रस्त पक्षी

यह अभयारण्य कई संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए सुरक्षित स्थान है:

इंडियन वल्चर

व्हाइट-रंप्ड वल्चर

मिस्र गिद्ध

इन पक्षियों की उपस्थिति इस क्षेत्र के पारिस्थितिक स्वास्थ्य को दर्शाती है।

अन्य वन्यजीव (Fauna)

हालाँकि यह मुख्यतः पक्षी अभयारण्य है, फिर भी यहाँ कई स्थलीय जीव पाए जाते हैं:

नीलगाय

सियार

जंगली सुअर

विभिन्न प्रकार के सरीसृप और उभयचर

ये जीव झीलों और आसपास के वन क्षेत्र पर निर्भर रहते हैं।

वनस्पति (Flora)

पार्वती-अरगा अभयारण्य में जल और स्थल दोनों प्रकार की वनस्पति मिलती है।

जलीय पौधे

कमल

जलकुंभी

जलकुमुदिनी

स्थलीय वनस्पति

साल

शीशम

बांस

घास की विभिन्न प्रजातियाँ

ये पौधे न केवल पर्यावरण को संतुलित रखते हैं, बल्कि पक्षियों और जीवों को भोजन और आश्रय भी प्रदान करते हैं।

पारिस्थितिक महत्व

पार्वती-अरगा पक्षी अभयारण्य का महत्व केवल पक्षियों तक सीमित नहीं है।

भूजल स्तर बनाए रखने में सहायक

बाढ़ नियंत्रण में मददगार

स्थानीय जलवायु को संतुलित करता है

जैव विविधता संरक्षण का केंद्र

यह क्षेत्र प्राकृतिक रूप से “इकोलॉजिकल बैलेंस ज़ोन” के रूप में कार्य करता है।

पर्यटन और इको-टूरिज़्म

यह अभयारण्य धीरे-धीरे इको-टूरिज़्म के रूप में विकसित हो रहा है।

घूमने का सबसे अच्छा समय

नवंबर से फरवरी

पर्यटक गतिविधियाँ

बर्ड वॉचिंग

नेचर वॉक

फोटोग्राफी

पर्यावरण अध्ययन

यह स्थान भीड़-भाड़ से दूर, शांत और प्राकृतिक अनुभव प्रदान करता है।

कैसे पहुँचें

सड़क मार्ग: गोंडा और अयोध्या से आसानी से पहुँचा जा सकता है

रेल मार्ग: निकटतम स्टेशन – गोंडा जंक्शन

हवाई मार्ग: लखनऊ हवाई अड्डा

संरक्षण प्रयास और चुनौतियाँ

हालाँकि अभयारण्य संरक्षित है, फिर भी कुछ चुनौतियाँ मौजूद हैं:

जल प्रदूषण

अतिक्रमण

अवैध शिकार की संभावनाएँ

सरकार और वन विभाग द्वारा जागरूकता, निगरानी और संरक्षण योजनाएँ चलाई जा रही हैं।

पार्वती-अरगा पक्षी अभयारण्य : वर्तमान स्थिति पर एक नज़र

आज के समय में पार्वती-अरगा पक्षी अभयारण्य उत्तर प्रदेश के उन चुनिंदा प्राकृतिक क्षेत्रों में शामिल हो चुका है, जहाँ संरक्षण, जागरूकता और इको-टूरिज़्म – तीनों पर एक साथ ध्यान दिया जा रहा है। पहले यह क्षेत्र केवल स्थानीय लोगों और पक्षी प्रेमियों तक सीमित था, लेकिन अब इसकी पहचान राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर बन रही है।

1. संरक्षण की स्थिति

वर्तमान में अभयारण्य पूरी तरह संरक्षित क्षेत्र के रूप में कार्य कर रहा है।

वन विभाग द्वारा यहाँ नियमित निगरानी की जाती है ताकि: अवैध शिकार न हो

पक्षियों को बिना बाधा प्राकृतिक वातावरण मिले

झीलों और जलस्रोतों की गुणवत्ता बनी रहे

अब इस क्षेत्र को पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र माना जा रहा है, जिससे अनियंत्रित निर्माण, प्रदूषण और भारी मानवीय गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।

पार्वती-अरगा पक्षी अभयारण्य क्यों है खास
पार्वती-अरगा पक्षी अभयारण्य क्यों है खास

2. पक्षियों की वर्तमान उपस्थिति

आज भी हर सर्दी के मौसम में पार्वती-अरगा पक्षी अभयारण्य प्रवासी पक्षियों से गुलज़ार हो जाता है।

स्थानीय पक्षियों के साथ-साथ विदेशी पक्षी यहाँ सुरक्षित वातावरण पाकर नियमित रूप से आते हैं।
वर्तमान स्थिति में:

प्रवासी पक्षियों की संख्या में स्थिरता और धीरे-धीरे सुधार देखा जा रहा है

कुछ दुर्लभ और संवेदनशील प्रजातियाँ अब भी यहाँ देखी जा रही हैं

झीलों में पानी उपलब्ध रहने से पक्षियों को भोजन और विश्राम में सुविधा मिल रही है

यह इस बात का संकेत है कि क्षेत्र का पारिस्थितिक संतुलन अभी काफी हद तक सुरक्षित है।

3. जल और वेटलैंड की स्थिति

अभयारण्य की दोनों झीलें — पार्वती ताल और अरगा ताल — आज भी इसकी जीवनरेखा हैं।

वर्तमान में:

झीलों में साल के अधिकांश समय पानी बना रहता है

मानसून के बाद जल स्तर बेहतर हो जाता है

कुछ स्थानों पर जलकुंभी जैसी समस्या दिखती है, लेकिन इसे नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं

जल संरक्षण को लेकर अब प्रशासन और स्थानीय स्तर पर ज्यादा गंभीरता दिखाई दे रही है।

4. इको-टूरिज़्म की वर्तमान स्थिति

पार्वती-अरगा अभयारण्य को अब केवल पक्षी विहार नहीं, बल्कि प्राकृतिक पर्यटन स्थल के रूप में भी देखा जा रहा है।

इस समय:
बर्ड-वॉचिंग और नेचर वॉक जैसी गतिविधियाँ बढ़ रही हैं

छात्र, शोधकर्ता और प्रकृति प्रेमी यहाँ आने लगे हैं

सरकार की योजना है कि पर्यटन को बढ़ाते हुए भी पर्यावरण को नुकसान न पहुँचे

अभी यह क्षेत्र बड़े पर्यटन स्थलों जैसा विकसित नहीं हुआ है, लेकिन शांत, प्राकृतिक और शुद्ध अनुभव के लिए उपयुक्त बना हुआ है।

5. स्थानीय लोगों की भूमिका

वर्तमान में स्थानीय समुदायों की भूमिका धीरे-धीरे बढ़ रही है।

लोगों में पक्षियों और वेटलैंड के प्रति जागरूकता बढ़ रही है

कुछ लोग संरक्षण गतिविधियों में अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ रहे हैं

इको-टूरिज़्म से भविष्य में स्थानीय रोजगार की संभावना देखी जा रही है

यह बदलाव सकारात्मक माना जा रहा है, क्योंकि किसी भी अभयारण्य का भविष्य स्थानीय सहयोग पर निर्भर करता है।

6. मौजूदा चुनौतियाँ

हालाँकि स्थिति पहले से बेहतर है, फिर भी कुछ समस्याएँ बनी हुई हैं: जलकुंभी और अन्य अवांछित पौधों का फैलाव

आसपास की कृषि गतिविधियों से आने वाला अपशिष्ट कुछ क्षेत्रों में मानव दबाव

इन चुनौतियों को देखते हुए संरक्षण प्रयासों को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

7. कुल मिलाकर वर्तमान तस्वीर

आज का पार्वती-अरगा पक्षी अभयारण्य:

सुरक्षित लेकिन संवेदनशील स्थिति में है

पक्षियों के लिए अभी भी भरोसेमंद आवास बना हुआ है

संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में है

अगर मौजूदा प्रयास सही दिशा में चलते रहे, तो आने वाले वर्षों में यह अभयारण्य उत्तर प्रदेश के सबसे सफल वेटलैंड संरक्षण मॉडल के रूप में उभर सकता है।

FAQs

1. पार्वती-अरगा पक्षी अभयारण्य कहाँ स्थित है?

पार्वती-अरगा पक्षी अभयारण्य उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में स्थित है। यह दो प्राकृतिक झीलों — पार्वती ताल और अरगा ताल — के आसपास फैला हुआ है और अयोध्या व गोंडा जैसे प्रमुख शहरों के नज़दीक स्थित होने के कारण आसानी से पहुँचा जा सकता है।

2. पार्वती-अरगा पक्षी अभयारण्य किस लिए प्रसिद्ध है?

यह अभयारण्य मुख्य रूप से प्रवासी पक्षियों, वेटलैंड पारिस्थितिकी और रामसर साइट के रूप में प्रसिद्ध है। सर्दियों के मौसम में यहाँ बड़ी संख्या में विदेशी पक्षी आते हैं, जिससे यह क्षेत्र पक्षी-प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए खास बन जाता है।

3. पार्वती-अरगा पक्षी अभयारण्य घूमने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?

यहाँ घूमने का सबसे अच्छा समय नवंबर से फरवरी के बीच होता है। इस दौरान मौसम ठंडा और अनुकूल रहता है तथा प्रवासी पक्षियों की संख्या सबसे अधिक होती है, जिससे बर्ड-वॉचिंग का अनुभव शानदार बनता है।

4. पार्वती-अरगा पक्षी अभयारण्य में कौन-कौन से पक्षी देखे जा सकते हैं?

यहाँ 150 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें स्थानीय और प्रवासी दोनों शामिल हैं। प्रमुख पक्षियों में सारस क्रेन, पेंटेड स्टॉर्क, नॉर्दर्न पिनटेल, ग्रेलैग गूज और विभिन्न जल पक्षी शामिल हैं।

5. क्या पार्वती-अरगा पक्षी अभयारण्य रामसर साइट है?

हाँ, पार्वती-अरगा पक्षी अभयारण्य को अंतरराष्ट्रीय महत्व का वेटलैंड (Ramsar Site) घोषित किया गया है। यह दर्जा इसके पर्यावरणीय महत्व, जैव विविधता और वेटलैंड संरक्षण की दृष्टि से इसकी भूमिका को दर्शाता है।

निष्कर्ष

पार्वती-अरगा पक्षी अभयारण्य उत्तर प्रदेश की एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहर है, जो पक्षी संरक्षण और वेटलैंड संतुलन में अहम भूमिका निभाता है।
यदि संरक्षण प्रयास और जागरूकता इसी तरह जारी रहे, तो यह अभयारण्य भविष्य में एक आदर्श इको-टूरिज़्म और जैव विविधता संरक्षण मॉडल बन सकता है।

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Parveen Kumar

Hello! Welcome To About me My name is Parveen Kumar Sniya. I have completed my B.Tech degrees in education. I Working last 4 years Digital Plaform like as Youtube,Facebook, Blogging etc.

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