चाँदपुर गढ़ी (गढ़वाल)- परमार वंश से जुड़ा गढ़वाल की पहली राजधानी का अनसुना इतिहास
प्रस्तावना
उत्तराखंड का गढ़वाल क्षेत्र केवल प्राकृतिक सौंदर्य के लिए ही नहीं, बल्कि अपने प्राचीन गढ़ों, राजवंशों और ऐतिहासिक विरासत के लिए भी जाना जाता है। इन्हीं ऐतिहासिक धरोहरों में चाँदपुर गढ़ी का नाम अत्यंत महत्वपूर्ण है।
चाँदपुर गढ़ी वह स्थल है जहाँ से गढ़वाल राज्य की राजनीतिक चेतना ने आकार लिया, और जहाँ से परमार (पंवार) वंश के शासकों ने गढ़वाल को एक संगठित राज्य के रूप में स्थापित किया।
यह गढ़ न केवल एक सैन्य संरचना था, बल्कि यह राजधानी, प्रशासनिक केंद्र, सांस्कृतिक धुरी और सत्ता का प्रतीक भी रहा।
चाँदपुर गढ़ी की भौगोलिक स्थिति
चाँदपुर गढ़ी वर्तमान उत्तराखंड राज्य के गढ़वाल मंडल में स्थित है। यह गढ़ एक ऊँची पहाड़ी पर बना हुआ है, जहाँ से चारों ओर की घाटियाँ, नदी मार्ग और पुराने व्यापारिक रास्ते स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं।
भौगोलिक विशेषताएँ:
पहाड़ी चोटी पर स्थित
प्राकृतिक ढालें (Natural Slopes) सुरक्षा का कार्य करती हैं
आसपास घने वन और जल स्रोत
सामरिक दृष्टि से अत्यंत उपयुक्त स्थान
यही कारण था कि प्राचीन काल में इसे राजधानी के रूप में चुना गया।
गढ़वाल का प्रारंभिक राजनीतिक परिदृश्य
चाँदपुर गढ़ी के उदय से पहले गढ़वाल क्षेत्र में:
लगभग 52 छोटे-छोटे गढ़ थे
प्रत्येक गढ़ का अपना स्वतंत्र शासक था
कोई केंद्रीय सत्ता नहीं थी
आपसी संघर्ष आम थे
इन परिस्थितियों में एक ऐसे शक्तिशाली केंद्र की आवश्यकता थी जो सभी गढ़ों को एक सूत्र में बाँध सके — और यही भूमिका चाँदपुर गढ़ी ने निभाई।

परमार (पंवार) वंश और चाँदपुर गढ़ी
🔹 परमार वंश का परिचय
परमार वंश भारतीय इतिहास का एक प्राचीन राजपूत वंश माना जाता है। गढ़वाल में इस वंश को पंवार नाम से भी जाना गया।
गढ़वाल में परमार वंश का आगमन केवल सत्ता परिवर्तन नहीं था, बल्कि यह:
प्रशासनिक सुधार
सामाजिक संगठन
सांस्कृतिक स्थायित्व का प्रारंभ था।
राजा कनकपाल और चाँदपुर गढ़ी
गढ़वाल के इतिहास में राजा कनकपाल को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।
राजा कनकपाल से जुड़ी मान्यताएँ:
वे मूल रूप से दक्षिण/मध्य भारत से आए थे
धार्मिक यात्रा के दौरान गढ़वाल पहुँचे
स्थानीय शासक की पुत्री से विवाह हुआ
इसके पश्चात उन्हें चाँदपुर गढ़ी का शासन प्राप्त हुआ
यहीं से परमार वंश का गढ़वाल में राजनीतिक उदय हुआ।
चाँदपुर गढ़ी को उन्होंने अपनी राजधानी बनाकर शासन की नींव रखी।
चाँदपुर गढ़ी: गढ़वाल की पहली राजधानी
चाँदपुर गढ़ी को गढ़वाल की प्रथम संगठित राजधानी माना जाता है।
राजधानी के रूप में इसकी भूमिका:
राजकीय निर्णय यहीं लिए जाते थे
कर वसूली और प्रशासनिक नियंत्रण
सैन्य रणनीति और सुरक्षा व्यवस्था
न्यायिक कार्य
यह गढ़ गढ़वाल राज्य की राजनीतिक चेतना का केंद्र बन गया।
चाँदपुर गढ़ी का स्थापत्य (Architecture)
चाँदपुर गढ़ी का निर्माण पूर्णतः पर्वतीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया गया था।
स्थापत्य की प्रमुख विशेषताएँ:
🔹 1. प्राकृतिक सुरक्षा
ऊँचाई पर स्थित
चारों ओर खड़ी ढलान
संकीर्ण प्रवेश मार्ग
🔹 2. पत्थर की मजबूत दीवारें
स्थानीय पत्थरों से निर्मित
मोटी और ऊँची दीवारें
समय और युद्ध दोनों का सामना करने में सक्षम
🔹 3. आंतरिक संरचना
राजमहल के अवशेष
सैनिकों के आवास
अनाज भंडारण कक्ष
जल संग्रहण टैंक
यह दर्शाता है कि यह गढ़ केवल युद्ध के लिए नहीं, बल्कि दीर्घकालीन निवास और शासन के लिए बना था।
जल प्रबंधन प्रणाली
पर्वतीय क्षेत्र में जल सबसे बड़ी चुनौती होता है।
चाँदपुर गढ़ी में:
वर्षा जल संचयन की व्यवस्था
जलाशय और कुंड
पत्थर से बने जल मार्ग
यह बताता है कि उस समय के शासकों को वैज्ञानिक सोच और पर्यावरणीय समझ थी।
सैन्य महत्व
चाँदपुर गढ़ी:
बाहरी आक्रमणों से सुरक्षा
पड़ोसी गढ़ों पर नियंत्रण
व्यापारिक मार्गों की निगरानी के लिए एक आदर्श सैन्य केंद्र था।
यह गढ़ गढ़वाल की सुरक्षा ढाल की तरह कार्य करता था।

राजा अजयपाल और चाँदपुर गढ़ी
परमार वंश के सबसे शक्तिशाली शासकों में राजा अजयपाल का नाम विशेष रूप से लिया जाता है।
राजा अजयपाल के योगदान:
52 गढ़ों का एकीकरण
गढ़वाल को संगठित राज्य का रूप
प्रशासनिक व्यवस्था का विस्तार
उनके शासन काल में चाँदपुर गढ़ी की भूमिका ऐतिहासिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण रही।
बाद में राजधानी का स्थानांतरण हुआ, लेकिन चाँदपुर गढ़ी की ऐतिहासिक गरिमा बनी रही।
सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व
चाँदपुर गढ़ी केवल सत्ता का केंद्र नहीं थी, बल्कि:
धार्मिक अनुष्ठानों
सांस्कृतिक आयोजनों
परंपराओं का भी प्रमुख स्थल थी।
यहाँ शासक, पुरोहित और आम जनता — तीनों का संपर्क बना रहता था।
पुरातात्विक महत्व
आज भी चाँदपुर गढ़ी में:
दीवारों के अवशेष
भवनों की नींव
पत्थर के चबूतरे मिलते हैं, जो इसके गौरवशाली अतीत की गवाही देते हैं।
वर्तमान स्थिति
आज चाँदपुर गढ़ी:
एक ऐतिहासिक धरोहर है
शोधार्थियों के लिए महत्वपूर्ण स्थल
पर्यटन की दृष्टि से संभावनाशील
हालाँकि संरक्षण की अभी भी आवश्यकता है।
पर्यटन के लिए उपयोगी जानकारी
घूमने का सर्वोत्तम समय: अक्टूबर से मार्च
हल्की ट्रेकिंग आवश्यक
फोटोग्राफी के लिए उपयुक्त
प्रकृति और इतिहास का संगम
FAQs – Chandpur Garhi(गढ़वाल)
1. Chandpur Garhi कहाँ स्थित है और यह किस जिले में आती है?
उत्तर:
Chandpur Garhi उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन ऐतिहासिक गढ़ है। यह पहाड़ी पर स्थित होने के कारण सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है और प्राचीन काल में गढ़वाल राज्य की राजधानी के रूप में प्रसिद्ध था।
2. चाँदपुर गढ़ी का निर्माण किस वंश ने किया था?
उत्तर:
Chandpur Garhi का संबंध परमार (पंवार) वंश से माना जाता है। परंपराओं के अनुसार इस गढ़ को परमार वंश के शासकों ने विकसित किया और यहीं से गढ़वाल में उनके शासन की शुरुआत हुई।
3. Chandpur Garhi गढ़वाल के इतिहास में क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर:
Chandpur Garhi को गढ़वाल की प्रथम संगठित राजधानी माना जाता है। यहीं से गढ़वाल के विभिन्न छोटे-छोटे गढ़ों को एक राजनीतिक इकाई में जोड़ने की प्रक्रिया शुरू हुई, जिसने आगे चलकर गढ़वाल राज्य का स्वरूप लिया।
4. क्या आज भी Chandpur Garhi के अवशेष देखे जा सकते हैं?
उत्तर:
हाँ, वर्तमान समय में Chandpur Garhi में किले की दीवारों, भवनों की नींव, जल संरचनाओं और चबूतरों के अवशेष देखे जा सकते हैं, जो इसके ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व को दर्शाते हैं।
5. Chandpur Garhi घूमने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?
उत्तर:
Chandpur Garhi घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस अवधि में मौसम सुहावना रहता है और पहाड़ी मार्गों पर यात्रा अपेक्षाकृत आसान होती है।
निष्कर्ष:
चाँदपुर गढ़ी गढ़वाल की ऐतिहासिक चेतना और परमार वंश के उदय का प्रमुख केंद्र रही है। यहीं से गढ़वाल राज्य की संगठित सत्ता और प्रशासनिक व्यवस्था ने आकार लिया। आज यह गढ़ उत्तराखंड की गौरवशाली विरासत और प्राचीन इतिहास का जीवंत प्रतीक