Shibu Soren की राजनीतिक यात्रा: Jharkhand Mukti Morcha से Dishom Guru तक
1️⃣ भूमिका
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ToggleShibu Soren, भारत के एक ऐसे राजनेता हैं जिन्होंने न केवल झारखंड राज्य के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाई, बल्कि आदिवासी समुदाय की आवाज भी बने। झारखंड के राजनीतिक इतिहास में Shibu Soren का नाम हमेशा सम्मान और संघर्ष के प्रतीक के रूप में याद किया जाएगा। उन्हें “Dishom Guru” यानी आदिवासियों के गुरु के नाम से जाना जाता है। इसमें हम उनके जीवन, संघर्ष, उपलब्धियों और विवादों पर विस्तृत चर्चा करेंगे।

2️⃣ प्रारंभिक जीवन
Shibu Soren का जन्म 11 जनवरी 1944 को नेमरा गांव, रामगढ़ (तत्कालीन बिहार) में हुआ था। वे संथाल जनजाति से ताल्लुक रखते हैं। जब वह छोटे थे, उनके पिता को ज़मींदारों ने मार डाला था, जिसके कारण उनका बचपन काफी कठिनाइयों में बीता। इस घटना ने Shibu Soren के भीतर अन्याय के विरुद्ध एक गहरा विद्रोह पैदा किया।
3️⃣ संघर्षों की शुरुआत
कम उम्र में ही Shibu Soren ने ज़मींदारों और साहूकारों के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी थी। उन्होंने “संथाल नवयुवक संघ” नाम से एक सामाजिक संगठन की स्थापना की, जिसका उद्देश्य आदिवासी समाज की रक्षा और उन्हें शिक्षा, भूमि और अधिकार दिलाना था। यही वह दौर था जब Shibu Soren ने जनता की समस्याओं को समझना शुरू किया और राजनीति की ओर कदम बढ़ाया।
4️⃣ Jharkhand Mukti Morcha की स्थापना
1972 में Shibu Soren ने Jharkhand Mukti Morcha (JMM) की स्थापना की। यह संगठन झारखंड को एक अलग राज्य बनाने की माँग कर रहा था। Shibu Soren ने आदिवासियों की भूमि, संसाधनों और अस्तित्व को बचाने के लिए कई जनांदोलन चलाए। धीरे-धीरे Shibu Soren झारखंड के हर गांव और आदिवासी क्षेत्र में एक प्रतीक बन गए।
5️⃣ राजनीतिक करियर
Shibu Soren ने अपना पहला लोकसभा चुनाव 1980 में जीता। इसके बाद वे 1989, 1991, 1996, 2004 में भी सांसद बने। उन्होंने संसद में बार-बार आदिवासी हितों की बात उठाई और झारखंड राज्य की मांग को केंद्र तक पहुँचाया। Shibu Soren ने न केवल संसद में बल्कि सड़क पर भी जनसमर्थन जुटाया।
6️⃣ मुख्यमंत्री कार्यकाल
Shibu Soren तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रहे:
- पहला कार्यकाल (मार्च 2005): मात्र 10 दिनों का रहा, क्योंकि उन्हें बहुमत नहीं मिल पाया।
- दूसरा कार्यकाल (2008–2009): इसमें भी राजनीतिक अस्थिरता बनी रही।
- तीसरा कार्यकाल (2009–2010): यह उनका सबसे स्थिर कार्यकाल था, परंतु सहयोगी दलों के समर्थन वापस लेने से उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।
हर कार्यकाल में Shibu Soren ने आदिवासी अधिकारों, खनिज नीति और ग्रामीण विकास पर बल दिया।
7️⃣ केंद्रीय मंत्री के रूप में
Shibu Soren को 2004 में कोयला मंत्री बनाया गया। उस समय उन्होंने कोयला खनन में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने की नीति अपनाई। हालांकि एक आपराधिक मामले के कारण उन्हें पद से हटना पड़ा, लेकिन बाद में वे दोबारा मंत्री बने। Shibu Soren ने अपने केंद्रीय कार्यकाल में झारखंड को विशेष दर्जा दिलाने की दिशा में प्रयास किए।
8️⃣ विवाद और आलोचनाएं
Shibu Soren का राजनीतिक जीवन विवादों से भी अछूता नहीं रहा। 1994 में उनके निजी सचिव की हत्या के मामले में उन्हें जेल जाना पड़ा। हालांकि बाद में वे अदालत से बरी हो गए। 1975 में कुछ दंगों में उनका नाम सामने आया था। लेकिन इन सबके बावजूद, Shibu Soren ने अपने संघर्ष और सेवाभाव से लोगों का विश्वास कायम रखा।
9️⃣ पारिवारिक जीवन
Shibu Soren की पत्नी रूपी किस्कु हैं। उनके चार बच्चे हैं — दुर्गा सोरेन, हेमंत सोरेन, बसंत सोरेन और अंजलि सोरेन।
हेमंत सोरेन आज झारखंड के मुख्यमंत्री हैं और उन्होंने अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया है।
दुर्गा सोरेन एक युवा नेता थे लेकिन 2009 में उनका निधन हो गया।
बसंत सोरेन भी विधायक हैं और JMM में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
Shibu Soren का पूरा परिवार आदिवासी समाज और झारखंड की राजनीति में सक्रिय है।
🔟 Shibu Soren की विरासत
Shibu Soren को उनकी जनसेवा, आदिवासी हितों की रक्षा और झारखंड आंदोलन में योगदान के लिए याद किया जाता है। वे आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। उनके अनुयायी उन्हें “Dishom Guru” के नाम से पुकारते हैं, जो उनकी जननायक छवि को दर्शाता है।
🔢 आदिवासी समाज में योगदान
Shibu Soren ने जीवनभर आदिवासी समाज की संस्कृति, अधिकार और आत्मसम्मान की रक्षा की।
उन्होंने भूमि सुधार कानूनों को बदलने की माँग की।
वन अधिकार कानून के तहत आदिवासियों को अधिकार दिलाने में भूमिका निभाई।
शिक्षा और स्वास्थ्य योजनाओं में जनजातीय क्षेत्रों को प्राथमिकता दिलाई।
उनकी सोच थी कि बिना आदिवासी समाज के सशक्तिकरण के झारखंड प्रगति नहीं कर सकता।-

🔟 मृत्यु और राष्ट्रीय प्रतिक्रिया
4 अगस्त 2025 को Shibu Soren का निधन हो गया। उनके निधन पर पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। झारखंड में 3 दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया।
प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, विपक्षी नेता और आम जनता ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। उनके बेटे हेमंत सोरेन ने उन्हें “झारखंड के पितामह” बताया।
FAQs:
1. Shibu कौन थे?
उत्तर: Shibu झारखंड के प्रमुख राजनेता, Jharkhand Mukti Morcha (JMM) के संस्थापक और तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रहे। उन्हें आदिवासी समाज के नेता और “Dishom Guru” के नाम से जाना जाता है।
2. Shibu का जन्म कब और कहां हुआ था?
उत्तर: Shibu का जन्म 11 जनवरी 1944 को बिहार (अब झारखंड) के रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में हुआ था।
3. Shibu को Dishom Guru क्यों कहा जाता है?
उत्तर: उन्हें “Dishom Guru” इसलिए कहा गया क्योंकि उन्होंने आदिवासियों के अधिकार, ज़मीन और संस्कृति के संरक्षण के लिए आजीवन संघर्ष किया।
4. Jharkhand Mukti Morcha की स्थापना में Shibu Soren की क्या भूमिका थी?
उत्तर: Shibu ने 1972 में Jharkhand Mukti Morcha की स्थापना की और झारखंड को अलग राज्य बनाने के आंदोलन का नेतृत्व किया।
5. Shibu कितनी बार मुख्यमंत्री बने?
उत्तर: Shibu तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने – 2005, 2008 और 2009 में।
6. Shibu के परिवार में कौन-कौन सक्रिय राजनीति में हैं?
उत्तर: उनके पुत्र हेमंत सोरेन वर्तमान में झारखंड के मुख्यमंत्री हैं और बसंत सोरेन भी विधायक हैं। उनके दिवंगत पुत्र दुर्गा सोरेन भी एक प्रभावशाली नेता थे।
7. Shibu केंद्रीय मंत्री कब बने थे?
उत्तर: Shibu 2004 में UPA सरकार में कोयला मंत्री बनाए गए थे।
8. Shibu का सबसे बड़ा योगदान क्या माना जाता है?
उत्तर: Shibu का सबसे बड़ा योगदान झारखंड राज्य का निर्माण और आदिवासी समाज को राजनीतिक पहचान दिलाना है।
9. Shibu किन विवादों में घिरे थे?
उत्तर: वे अपने निजी सचिव की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए थे, लेकिन बाद में उच्च न्यायालय से बरी हो गए। इसके अलावा उन पर राजनीतिक सौदेबाजी के आरोप भी लगे।
10. Shibu Soren का निधन कब हुआ?
उत्तर: Shibu Soren का निधन 4 अगस्त 2025 को हुआ। उनके निधन से झारखंड और आदिवासी समाज ने एक महान नेता खो दिया।
निष्कर्ष: Shibu Soren की जीवन यात्रा का सार
Shibu Soren केवल एक नाम नहीं, बल्कि झारखंड की आत्मा हैं। उनका पूरा जीवन संघर्ष, समाजसेवा और राजनीतिक प्रतिबद्धता का उदाहरण रहा है। उन्होंने आदिवासी समाज को वह आवाज दी जो सदियों से दबाई जा रही थी। एक साधारण गाँव से निकलकर उन्होंने जो पहचान बनाई, वह किसी क्रांति से कम नहीं।
Shibu Soren ने न केवल झारखंड राज्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, बल्कि आदिवासी संस्कृति, अधिकार और अस्मिता की रक्षा के लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ी।
उनकी नीतियाँ, विचार और निर्णय आमजन से गहराई से जुड़े हुए थे। यद्यपि उनका राजनीतिक सफर विवादों से अछूता नहीं रहा, फिर भी जनता के दिल में उनकी जगह हमेशा बनी रही।
उनकी विरासत आज भी झारखंड के जंगलों, गांवों और जनमानस में जीवित है। उनके पुत्र हेमंत सोरेन आज उनके अधूरे सपनों को आगे बढ़ा रहे हैं, और Shibu Soren की विचारधारा को आधुनिक झारखंड की राजनीति में जीवित रखे हुए हैं।
इसलिए, जब भी झारखंड की बात होगी, आदिवासी चेतना की बात होगी, और जनांदोलनों की बात होगी — वहां Shibu का नाम स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा।
Shibu एक युग पुरुष थे, जिन्होंने यह साबित कर दिया कि प्रतिबद्धता, संघर्ष और जनता से जुड़ाव ही सच्ची राजनीति की पहचान है।
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